Sunday, 16 September 2018

जॉन एलिया 1

ग़ुस्सा भी है तहज़ीब-ए-तआल्लुक़ का तलबगार 
हम चुप हैं भरे बैठे हैं गुस्सा न करेंगे

कल रात बहुत ग़ौर किया है सो हम ए "जॉन" 
तय कर के उठे हैं के तमन्ना न करेंगे