Monday, 27 January 2014

कांग्रेस का इतिहास

आदरणीय राहुल जी ने बड़ी सच्ची बात कही " काग्रेस एक पार्टी नहीं बल्कि एक सोच है "
सही बात है कांग्रेस अमर है, वह मर नहीं सकती। उसके दोष बने रहेंगे और गुण लौट-लौट कर आएँगे। जब तक पक्षपात ,निर्णयहीनता ढीलापन, दोमुँहापन, पूर्वाग्रह, ढोंग, दिखावा, सस्ती आकांक्षा और लालच कायम है, इस देश से कांग्रेस को कोई समाप्त नहीं कर सकता।

आजादी  के इतने सालो में ज्यादा समय कांग्रेस ने राज किया ,इन सालों में कभी देश आगे बढ़ा, कभी कांग्रेस आगे बढ़ी। कभी दोनों आगे बढ़ गए, कभी दोनों नहीं बढ़ पाए। फिर यों हुआ कि देश आगे बढ़ गया और कांग्रेस पीछे रह गई। यह यात्रा कांग्रेस की महायात्रा है। वह खादी भंडार से आरम्भ हुई और सचिवालय पर समाप्त हो गई।
कांग्रेस हमारे देश पर तम्बू की तरह तनी रही, गुब्बारे की तरह फैली रही, हवा की तरह सनसनाती रही, बर्फ सी जमी रही। कांग्रेस ने देश में इतिहास बनाया, उसे सरकारी कर्मचारियों ने लिखा और विधानसभा के सदस्यों ने पढ़ा।
कांग्रेस हमारी आदत बन गई। कभी न छुटने वाली बुरी आदत। हम सब यहाँ-वहाँ से दिल दिमाग और तोंद से कांग्रेसी होने लगे।देश में समस्याएँ बहुत थीं, कांग्रेसी भी बहुत थे। समस्याएँ बढ़ रही थीं, कांग्रेस भी बढ़ रही थी। अब दिन ऐसा आया की समस्याएँ कांग्रेस हो गईं और कांग्रेस समस्या हो गई।

 समझने की कोशिश करते है कांग्रेस क्या है ?
खुद कांग्रेसी यह नहीं समझ पाया कि कांग्रेस क्या है? लोगों ने कांग्रेस को ब्रह्म की तरह नेति-नेति के तरीके से समझा। जो दाएँ नहीं है वह कांग्रेस है। जो बाएँ नहीं है वह कांग्रेस है। जो मध्य में भी नहीं है वह कांग्रेस है। जो मध्य से बाएँ है वह कांग्रेस है। मनुष्य जितने रूपों में मिलता है, कांग्रेस उससे ज्यादा रूपों में मिलती है। कांग्रेस सर्वत्र है। हर कुर्सी पर है। हर कुर्सी के पीछे है। हर कुर्सी के सामने खड़ी है। हर सिद्धांत कांग्रेस का सिद्धांत है है।

 इतिहास साक्षी है कांग्रेस ने हमेशा संतुलन की नीति को बनाए रखा। जो कहा वो किया नहीं, जो किया वो बताया नहीं,जो बताया वह था नहीं, जो था वह गलत था। अहिंसा की नीति पर विश्वास किया और उस नीति को संतुलित किया लाठी और गोली से। सत्य की नीति पर चली, पर सच बोलने वाले से सदा नाराज रही। पेड़ लगाने का आन्दोलन चलाया और ठेके देकर जंगल के जंगल साफ़ कर दिए। राहत दी मगर टैक्स बढ़ा दिए। शराब के ठेके दिए, दारु के कारखाने खुलवाए; पर नशाबंदी का समर्थन करती रही। हिंदी की हिमायती रही अंग्रेजी को चालू रखा। समस्याएँ उठी तो कमीशन बैठे, रिपोर्ट आई तो पढ़ा नहीं। कांग्रेस का इतिहास निरंतर संतुलन का इतिहास है। समाजवाद की समर्थक रही, पर पूंजीवाद को शिकायत का मौका नहीं दिया। एक को बढ़ने नहीं दिया। दूसरे को घटने नहीं दिया।
आत्मनिर्भरता पर जोर देते रहे, विदेशों से मदद माँगते रहे। ‘यूथ’ को बढ़ावा दिया, बुड्ढों को टिकिट दिया। जो जीता वह मुख्यमंत्री बना, जो हारा सो गवर्नर हो गया। जो केंद्र में बेकार था उसे राज्य में भेजा, जो राज्य में बेकार था उसे उसे केंद्र में ले आए। जो दोनों जगह बेकार थे उसे एम्बेसेडर बना दिया। वह देश का प्रतिनिधित्व करने लगा।
एकता पर जोर दिया आपस में लड़ाते रहे। जातिवाद का विरोध किया, मगर अपनेवालों का हमेशा ख्याल रखा। प्रार्थनाएं सुनीं और भूल गए। आश्वासन दिए, पर निभाए नहीं। जिन्हें निभाया वे आश्वश्त नहीं हुए। मेहनत पर जोर दिया, अभिनन्दन करवाते रहे। जनता की सुनते रहे अफसर की मानते रहे।

इस देश से कांग्रेस को कोई समाप्त नहीं कर सकता। कांग्रेस कायम रहेगी। दाएँ, बाएँ, मध्य, मध्य के मध्य, गरज यह कि कहीं भी किसी भी रूप में आपको कांग्रेस नजर आएगी।


Saturday, 25 January 2014

दिल्ली में आम आदमी की सरकार

दिल्ली में आम आदमी की सरकार बन गयी ! हो सकता है की आने वाले समय में कुछ अन्य राज्यों में भी आम आदमी सरकार में आ जाय ! तब उस सरकार ने अगर कोई घोटाले किये तो कम से कम खबरों में सुनना तो अच्छा जरुर लगेगा !

जैसे :-

छातिसगढ़ में आम आदमी ने कोयले के इतने हज़ार लाख खाए !

बिहार में चारा के अरबो रूपये आम आदमी चबा गए !

झारखण्ड में हजारो करोड खा गए आम आदमी !

2-जी से पुहुचा आम आदमी को करोडो का फायदा !

सोचिये विदेशों में भारतीय लोकतंत्र के प्रति कितना अच्छा सन्देश जायगा ! एक मिसाल होगा विश्व में की देखो इंडिया में सभी लोग मिल जुल कर खा रहे है !
कुमार विश्वास जी का कहना था की वो जब विदेश जाय तो सुनना चाहते है “In India very clean politics “ !
एक कवी की कल्पना तो पूरी हो ही जायगी न !!!!!!!!

केजरीवाल की बीमारी

Yaar kya batau mujhe bhi na Arvind kejriwal wali bimari ho gayi hai...!

Are nahi imandari ka bhut nahi chada wo to main hun hi kyuki fattu hun esliye samay se tax bharta hun..!

Or riswat mujhe dega kon jo main luga kahan se !!

Sidhi si bat hai yaar mujhe bhi #KHANSI Ho gayi hai !!@₩€♡♡♥♥

महिला आयोग की भावना

सुना है कपिल के चुटकुलों से महिला की भावना आहात हो गयी है !.
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लगता है महिला आयोग को भाव कुछ ज्यादा ही दे दी गयी है जहाँ तहां भड़क कर टूट रही है ! यहाँ तो कपिल कह कर दिखाते है की लोगो को हसाना उनका उदेश है !

वरना महिलाये जो सीरयल पसंद करती है उनमे एक है "पवित्र रिश्ता " सुन्दर सुन्दर दिखने वाली महिला को कितना जहरीला बात करते हुए दिखाया जाता है भावना आहात नहीं होती इसमे महिला की !

अपमान ; बदला कूट निति क्या ये परिवार की कहानी है भावना आहात नहीं होती किसी की !

और सस्कार को तो नंगा कर के छोड दिया गया है बाज़ार में ; अब तो सच में इससे किसी की भी भावना आहात नहीं होती !

मुझे लगता था पढ़ लिख के महिलाओं का नैतिक विकास हुआ है पर याद आता है हमारे यहाँ एक पुराणी लोकोक्ति है !

"केतो सायानी तय्यो जननी "

पैदैसी बेशर्म

Ek dost ne kaha tum Besaram ho rahe ho..!

Maine kaha dost insan ki utpatti me besarni ka bada yogdan hai..! Socho agar mere Dada;-Dadi sarmate hi rahte to hum paid par latak kar ya dharti ke andar se to upjte nahi !!
Main to paidaiesi besaram hun log kahte hai jab main paida hua to naga hi tha !

Dost bola wo to sabhi hote hai..!

Maine kaha main to abhi bhi naga bazar chala jata hun..!

Dost;-dhaaaatttt.
Maine kaha sachi upar se kapde pahan leta hun andar se to naga hi hota hun..

Dost bola esme kon si badi bat hai sabhi hote hai..!
Maine kaha dhire bolo kisi mahila ne sun liya to unki bhawna aahat ho sakti hai.. fir aayog ki chitti aa sakti hai..!

कलयुग के हरिश्चंद्र

कलयुग के हरिश्चंद्र (केजरीवाल ) के घर कलयुग के विश्वामित्र (मोदी) के घर सबेरे सबेरे गए ! तो केजरीवाल घर के बाहर ही ब्रश करते हुए मिल गए !

मोदी ने कहा राजन कल आपने मेरे सपने में आके अपना पूरा राज पाठ मुझे दान कर दिया तो मैं वो लेने आया हूँ !

केजरीवाल मुह धोते हुए सपने में दान किया है न तो रात में सपने में अयो वही दुगा !

गठबंधन प्रेम का

प्रिय मित्र को समर्पित (पहलीबार और ताज़ी ब्रेकअप हुई है बेचारे की )

गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड का रिश्ता ऐसा है जैसे गठबंधन सरकार !इतिहास गवाह है गठबंधन घर्म के पालन में सैकडो समझोते करने पड़ते है ! मन संसद बन जाता है , राजनीती जोरो पर होती है , रोज नए दाँव खेले जाते हैं और रोज नए पैतरे बदले जाते हैं। अजब प्रेम की गजब कहानी।

इस राजनीती में लड़का स्वम को सत्ता पक्ष का समझता है और मज़े की बात तो ये है की लड़की भी स्वम के प्रति यही राय रखती है ! विवाद यहीं से शुरू हो जाता है ! फिर तो संसद सत्र बारहों महीने चलता है। न कोई छुट्टी, न कोई अवकाश। यहाँ बहस के लिए मुद्दों की आवश्यकता नहीं होती..."बहस अपनी जगह है और मुद्दे अपनी जगह।"

फिर आपके दोस्त स्पीकर की भूमिका अपना लेते है कभी कभी तो मार्सल बन कर आपको बाहर ही भिजवा सकते है ! गर्लफ्रेंड की फ्रेंड की कजरारी भोली नजरो पर मत जाए दरअसल ये शतिर अपनी भूमिका बदलने में एय्यारो को भी मात दे दे ! ये पत्रकार की तरह होते है सनसनी की तरह किसी को चटकारे ले कर सुना सकते है "ध्यान से देखिये भोला भाला दिखने वाला ये शख्स असल में वहसी दरिंदा है !"

अगर आप गुस्से में आके उसपर आघात करने की कोशिश करते है तो लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस पर हमले से सबका बोखलाना भी लाजमी है , मानवाधिकार की बाते होगी , विपक्ष बात करने को राजी न होगा , आपके खिलाफ विशेष प्रताव लाने की तैयारी भी हो सकती है मतलब फोन पर ब्लेक लिस्ट् , फेसबुक पर ब्लोक !

इस राजनीती में भी अपने प्रधानमंत्री से कुछ सीखना चाहिए कभी कभी कमजोर होना राजनितिक रूप से सही होता है तो आपको भी सदन में सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांग लेनी चाहिए !

अंत में आपके लीये कबीर की ये लाइन याद आती है " दुइ पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई.."

आकर्षण और गुरुत्वाकर्षण

सर्दी के मौसम में शारीर में पानी की कम जरुरत होती है क्यों ?

वैज्ञानिक कारण तो पढ़े लिखे लोग बतायगे , मैं व्यावहारिक कारण बताता हूँ ! वैसे इन पढ़े लिखे की बातों पर दिमाग पर ज्यादा लोड नहीं देना चाहिए !
अब देखिये न सीधे साधे आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत बता कर पहुत प्राण पिए है बचपन से ही , वो जो सेव की बात थी न वो तो बस कहने की थी असल में बड़ी चालाकी से आकर्षण के केन्द्र बिंदु को प्रकाशित किया गया था !

खैर बात पानी की हो रही थी ,

असल में गर्मी के दिनों में सुन्दर सुन्दर लड़कियो की सुंदरता देख कर मुह में पानी तो आ ही जाती है ! तो एक्स्ट्रा पानी की जरुरत तो होगी न ! जो सर्दी के दिनों में बच जाती है !

सिंपल !!!!

बकलोल आदमी पार्टी

Padhe likhe log post se dur rahe bhawnaye aahat ho sakti hai..!

Modi samrkhak kahte hai main BJP Birodhi hun , Kejriwal samrkhak AAP ka wirodhi mante hai...!

Rahul ji ko to main kuch kahta nahi Menka Gangi jiski chahi ho usse kon kahe !!
MM SINSH to bechare bhale aadmi hai... unko kuch kahna to bhrun hatya ka paap lene jaisa hai..!!

Main to soch raha tha apni hi ek party bana lu..!

B. B. P (I)

BHARI BAKLOLAADMI PARTY (I)

Ghosna patr jald prakasit karta hun....!!

नया जूता

इंसनी फितरत है की जब नया जूता खरीदता है तो सर झुका के चलता है , कारण जो भी हो , !

ये तो बड़ी बात नहीं है की मैंने भी खरीदी , बड़ी बात ये हो गयी की चलते हुए दो बालिकाएं बगल से गुजर गयी पता भी नहीं चला ! तब लगा भारी नुकसान हो गया !

तभी जुते से दिव्य ज्ञान मिला ,

जूता ही है जो हमें भगवान के करीब नहीं जाने देता , जब हम मंदिर जूता खोल कर जाते है तो जूता चोरी होने का डर हमेशा रहता है तभी तो त्वमेव माता पिता त्वमेव , त्वमेव बंधू सखा त्वमेव ! तक तो भगवान को देख कर कहते है , जबकी जूते की तरफ देखकर "त्वमेव सर्वम देव देव !

साली शादी में जूता चुराती है उसका उदेश्य होता है नज़र इनायत मिलने से है !
एक और मेन बात समझ में जूता पहनने से आदमी में सराफत आ जाती है ! और सराफत से घर गृहस्ती तो चलने से रही !

शरत जोशी बागला फिल्म

एक बार बंगला सिखने का धुन सबार हुआ , मैंने सोचा क्यों न बंगला फिल्म देखी जाय,फ़िल्म की विशेषता थी कि वह बंगला में थी और हमारी विशेषता थी कि हम बंगला नहीं जानते। पर मैंने भी कसम खायी थी की चित्र से समझना है ......
एक बंगला फ़िल्म पूरी गरिमा के साथ देखने बैठे, कहानी बंगाल के एक छोटे से क़स्बे में रहनेवाले बंगाली परिवार की थी।और हम बड़ी जल्दी समझ गए कि फ़िल्म सामान्य प्रेमकथा नहीं है। हीरोइन (आह, क्या भरी–पूरी हीरोइन थी!) इंटर कर चुकी है और उसके बी.ए. करने की समस्या है।हीरो भी इसी समस्या से ग्रस्त था। हीरोइन से पहली मुलाकात में ही पूछा, तोमार बीए होये गे छे?
हीरोइन ने इस प्रश्न पर कुछ उड़ता–उड़ता–सा जवाब दिया, आमार बीए कोरबार दोरकार नेई।
हम समझ गए कि लड़की इंटर कर चुकी है, मगर फिलहाल बी.ए. करने कै मूड में नहीं है, मगर हीरो चाहता था कि हिरोइन बी.ए. कर ले। वह जब मिलता, हीरोइन से एक ही प्रश्न घुमा–फिराकर करता, बीए, कोरबे ना कोरबे?

पिक्चर में एक अदद विलेन भी था, वह भी चाहता था कि हीरोइन ग्रेज्युएट हो जाए। जब हीरोइन कमर में घड़ा दाब झरने की तरफ़ जाती, विलेन पगडंडी काट खड़ा हो जाता और कहता, शुंदोरी! आमी तोमार शोंगे बीए कोरबोई कोरबो!

हमें आश्चर्य हुआ कि यह मुछंदर विलेन बी.ए. करने से अभी तक सिर्फ़ इसीलिए रुका हुआ है, क्यों कि यह हीरोइन शुंदोरी के साथ बी.ए. करना चाहता है!कमबख़्त हीरोइन बी.ए. क्यों नहीं कर लेती?
समझ नहीं आ रहा था कि हीरोइन यूनिवर्सिटी डिग्री लेने के मामले में गंभीर है, अथवा नहीं। वह हीरो के सामने मान लेती कि वह बी.ए. कर लेगी, जो ज़रूरी भी है, मगर जब विलेन उससे कहता तो वह साफ़ इनकार कर देती। एक बार तो उसने विलेन को कसकर डाँट दिया, जेटा आमी भावी, शेटा आमी कोरबो।
एक और दृश्य में हीरोइन की सहेली ने हीरोइन को इसी विषय में समझाते हुए कहा कि तुम बी.ए. क्यों नहीं कर लेतीं। हीरोइन ने कुछ कहा जिसका अर्थ शायद था कि 'ठीक है, मैं कर लूँगी!'
मेरे ख़याल से इसके बाद फ़िल्म समाप्त हो जानी चाहिए थी।मगर ऐसा नहीं हुआ। विलेन के स्नेही मित्रों ने हीरो को डंडे से पीटा। जवाब में हीरो ने भी हाथ दिखाए। शैक्षणिक प्रश्न का अंतत: इस स्तर पर निपटारा होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। हीरोइन ने हीरो की बाँह पर पट्टी बाँधी और कड़े शब्दों में अपने बाप से बी.ए. करने का ऐलान करते हुए कहा, आमा के बीए कोरते केऊ थामाते पारबे ना।
और सच भी है। इस स्वतंत्र भारत में यदि कोई बी.ए. का अध्ययन करना चाहे तो उसे कौन थाम सकता है? चित्र के अंत में हीरो हीरोइन का हाथ पकड़ एक ओर चला गया। शायद कालेज उसी ओर रहा होगा।

'बंगालवाले भी कमाल कर रहे हैं। कितनी नई थीम उठाकर फ़िल्में बना रहे हैं।' मैंने कहा।

वो तो बाद में एक मित्र दत्ता बाबु ने बताया अरे, बीए मतलब बैचलर ऑफ आर्टस्‌ नहीं। बीए यानी ब्याह, शादी, मैरेज।

Saturday, 4 January 2014

BALATKAR KI KHABAR

Balatkar ek jaghany apradh hai main bhi manta hun.. ese apradhi ko goli mar do ya fasi chadha diya jay ye to thik hai...!!

Lekin aaj kai case newes wagerah par sunta hun to sochne par wiwas ho jata hun ki ladki ko es bat ka pata ek mahine bad kyu chalta hai ..!!

Matlab ko kon sa paimana hai jisse ki pata chalta hai ki yaar ek sal se jo ho raha tha aslam me balatkar tha...!!

Merry Xmas".. !

Ek mahila mitr ne chat me likha.."Merry Xmas".. !!.
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Main to sirf "merry" padh kar 5 min tak main apne hone wale bachho ka nam chochne laga.

Thori der bat jab hosh aaya to aage padha to wahan "xmas" bhi tha..!!

Man to hua unse kahu devi ji mujhe to "merry" ke sath "me" add karke wahin utar do nahi jana aage !!

Par xmas mere padhne me Exam aaya.. nam sunkar hi halat kharab ho gayi, ki badi miskil se to un exam ke chakkar se jan chhuti hai...!!!

Ab merry ke liye bhi Exam dena hoga kya??

aam addmi ki sarkar

दिल्ली में आम आदमी की सरकार बन गयी ! हो सकता है की आने वाले समय में कुछ अन्य राज्यों में भी आम आदमी सरकार में आ जाय ! तब उस सरकार ने अगर कोई घोटाले किये तो कम से कम खबरों में सुनना तो अच्छा जरुर लगेगा !

जैसे :-

छातिसगढ़ में आम आदमी ने कोयले के इतने हज़ार लाख खाए !

बिहार में चारा के अरबो रूपये आम आदमी चबा गए !

झारखण्ड में हजारो करोड खा गए आम आदमी !

2-जी से पुहुचा आम आदमी को करोडो का फायदा !

सोचिये विदेशों में भारतीय लोकतंत्र के प्रति कितना अच्छा सन्देश जायगा ! एक मिसाल होगा विश्व में की देखो इंडिया में सभी लोग मिल जुल कर खा रहे है !
कुमार विश्वास जी का कहना था की वो जब विदेश जाय तो सुनना चाहते है “In India very clean politics “ !
एक कवी की कल्पना तो पूरी हो ही जायगी न !!!!!!!!