इंसनी फितरत है की जब नया जूता खरीदता है तो सर झुका के चलता है , कारण जो भी हो , !
ये तो बड़ी बात नहीं है की मैंने भी खरीदी , बड़ी बात ये हो गयी की चलते हुए दो बालिकाएं बगल से गुजर गयी पता भी नहीं चला ! तब लगा भारी नुकसान हो गया !
तभी जुते से दिव्य ज्ञान मिला ,
जूता ही है जो हमें भगवान के करीब नहीं जाने देता , जब हम मंदिर जूता खोल कर जाते है तो जूता चोरी होने का डर हमेशा रहता है तभी तो त्वमेव माता पिता त्वमेव , त्वमेव बंधू सखा त्वमेव ! तक तो भगवान को देख कर कहते है , जबकी जूते की तरफ देखकर "त्वमेव सर्वम देव देव !
साली शादी में जूता चुराती है उसका उदेश्य होता है नज़र इनायत मिलने से है !
एक और मेन बात समझ में जूता पहनने से आदमी में सराफत आ जाती है ! और सराफत से घर गृहस्ती तो चलने से रही !
ये तो बड़ी बात नहीं है की मैंने भी खरीदी , बड़ी बात ये हो गयी की चलते हुए दो बालिकाएं बगल से गुजर गयी पता भी नहीं चला ! तब लगा भारी नुकसान हो गया !
तभी जुते से दिव्य ज्ञान मिला ,
जूता ही है जो हमें भगवान के करीब नहीं जाने देता , जब हम मंदिर जूता खोल कर जाते है तो जूता चोरी होने का डर हमेशा रहता है तभी तो त्वमेव माता पिता त्वमेव , त्वमेव बंधू सखा त्वमेव ! तक तो भगवान को देख कर कहते है , जबकी जूते की तरफ देखकर "त्वमेव सर्वम देव देव !
साली शादी में जूता चुराती है उसका उदेश्य होता है नज़र इनायत मिलने से है !
एक और मेन बात समझ में जूता पहनने से आदमी में सराफत आ जाती है ! और सराफत से घर गृहस्ती तो चलने से रही !
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