Tuesday, 17 December 2013

खुदा में भगवान

Fb par jab dharm ki bate hoti hai.. Man wichlit ho jata hai..
Mere gaw ke bahar ek Masjid hai jiske aage bachpan se hi utni hi sradha ke sath sar jukaya hai jitni ki gaw ke hanuman mandir ke samne..

jab jab azan ki awaz kano me gayi usi tarh hath jore hai jase sankh ki awaz par...

Mere hindu hone par mujhe sak nahi par kya karu bachpan ki adat hai KUDA me bhi mujhe HANUMAN, KRISHN , OR SHIV hi nazar aate hai...

घरजमाई

मेरे दिमाग में एक धमाकेदार, धांसू आईडिया आया है , क्यों न अपने कुवारेपन को भजा लू ! और अपने दूसरे बाप यानि ससुर के शरण में घरजमाई बन कर चला जाऊ ! इससे मेरे बाप को भी कुछ दिनों की शांति मिलेगी , और जमाई कितना भी निखट्टू , नाकारा हो ससुर के लिए तो सदा आदरणीय रहा है ! कुछ अपवाद हो सकते है पर उसपर कौन दिमाग लगाये , ससुर की प्रजाति तो गाय की तहर होती है जो खाने को दूध भी दे और अपना बच्चा यानि बेटी भी !

इसलिए वधु चाहिए सामाजिक कार्यक्रम के तहत अखबार में इश्तेहार देने की सोच रहा हूँ ! उसका नमूना :-

सस्ता एवं टिकाऊ घरजमाई उपलब्ध है !!

क्षत्रिय राजपूत सुन्दर (एक झूठ तो भगवान भी माफ़ करता है) , सुशील ,गुणकारी , गृहकार्य में दक्ष (मगर करेगा एक भी नहीं ), वर को घरजमाई बनाने हेतु स्वजातीय कन्या के पिता संपर्क करे ! इकलोती पुत्री के पिता को प्रार्थमिकता दी जायगी !

आवेदन करता आवेदन के साथ :-
१) अपने आय का लेखा जोखा इन्कमे टेक्स द्वरा मान्यता प्राप्त या साल भर का अकाउंट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से अभिप्रमाणित कर संलिप्त करे !
२) आवेदन के साथ Rs-151 का डी डी लगाये ! चाहे तो RTGS के माध्यम से पेमेंट कर चलान संलिप्त करे ! BOI A/C no- 320120003221 (IFSC Code:- RBJC4225)

Note:- चलान या डी डी अनिवार्य है , अन्यथा बिना सुचना के आवेदन रद्द कर डी जयगी !!!!!

तेरा चर्चा

हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते !
तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते !!

कुछ तो हम खुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी !
और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते !!

अज़मतें अपने चरागों की बचाने के लिए !
हम किसी घर में उजाला नहीं होने देते !!

मुझको थकने नहीं देता ये ज़ुरूरतों का पहाड़ !
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते !!

न्यूज चैनल

Newes chinal bhi dekhna chahiye...!

Sunne layak newes aaye na aaye dekhne layak jarur rahta..!

Sabhi cinal par surdriya naha dho ke freser wresar laga ke , kya bolti hai pata nahi par mast bolti hai.....!!

सेव

एक आदमी पुलिस नौकरी की इंटरव्यू देने गया !
अफसर ने पहला सबाल किया , मान लो ५० रु किलो सेब है तो तुम १०० ग्राम का कितना दोगे !
आदमी - पुलिस की नौकरी करुगा फिर भी १०० ग्राम सेब के भी पैसे दुगा लानत है !
अफसर - समझे नहीं चोलो मैं खरीदने जाऊ तो कितना दुगा !
आदमी - आप तो साहब हो आप क्यों दोगे कितने पेटी भिजवाने है आप तो बस हुकुम करो !
अफसर - अगर तुम्हारी बीबी ख़रीदे तो !
आदमी - अपनी बीबी को मैं जनता हूँ , अगर सौ ग्राम ख़रीदेगी तो सौ ग्राम का ही पूछेगी भाव !
अफसर - अगर तुम्हारा बाप खरीदे तो !
आदमी- मेरा बाप सेब क्यों खरीदेगा दांत नहीं है उनके वो तो बस केला खरीद सकते है !
अफसर - तुम्हारा भाई तो होगा वो तो खरीद सकता है , वो कितने देगा मेरे बाप !
आदमी - अपने भाई को कभी सेब खरीदते देखा नहीं वो तो पौवा खरीदता है !
अफसर - ओके ओके तुम्हारा कोई जिगरी दोस्त तो होगा वो पुलिस भी नहीं होगा वो तो खरीद सकता है !
आदमी - है न जिगरी दोस्त ! पर वो अगर सेब खरीदेगा तो दुकानदार को ५ रु देगा और कहेगा इतने के दे दो !
अफसर - हद हो यार !
आमदी - हद तो आप कर रहे हो साहब नौकरी दोगे एक को और सौ ग्राम सेब खरीदने में लगा दिया मेरा पूरा खानदान !
अफसर - सर नोचते हुए अच्चा अगर आम आदमी ख़रीदे तो !
आदमी - साहब जी आजकल आम आदमी सेब कहा खरीद पता है , सेब तो खास आदमी ही खरीदते है !
अफसर - अब तो बता दो खास आदमी ख़रीदे तो कितना चुकय्गा !
आदमी - अब जो खास आदमी है वो भला सेब खरीदने खुद क्यों जायगा जायगे उसके नौकर चाकर , चलो आपकी बात मान कर खुद चला भी गया तो क्या सौ ग्राम खरीद कर आयगा ! मान लिया आपकी अंतिम इच्छा समझ कर खरीद भी लिया तो उसका हिसाब तो देगे उसके सी . ए , पी ए !

अफसर झल्लाते हुए तुमने सीधे सबाल को कहा पहुचा दिया पर जबाब नहीं दिया !
आदमी - साहब आपही इस सबाल के पीछे पड़े हो मुझे तो सुरु से ही ये सबाल पसंद नहीं !

सारे फसाद की जड है सेब ...
अगर सेब न होता तो न आदम होते न हौवा , न हम होते न आप , न किलो होता न पौवा ! कहते है एक सेब आदमी को बीमारी से दूर करता है ! बीमारी से दूर रहता है तो आदमी तंदुरुस्त रहता है , तंदुरुस्त रहता है तो मेहनत करता है , मेहनत करता है तो तारकी करता है , तरक्की करता है तो शादी हो जाती है , शादी हो जाती है तो दुनिया भर का टेंशन !

लो और खाव सेब ......!!!!!

सुरक्षा के उपाय

Puchle dino Bihar ke Munger distic Jamalpur railway station ke pas naksali hamle RPFke 4 jawan sahid ho gaye... or unka hathiyar chin liya gaya !!

Rail prasasan ne eski kadi ninda karte hue surksha ke thosh kadam uthaye hai...!!

Rail par chalne wale scort team se banduk wapas le kar ek ek lathi thma diya gaya hai..

Sabzi bechne wali par hi jab jawazi dekhana hai to lathi kafi hai... esse shayad bina ek bhi naksali ko mare sahid hue jawano ki bahaduri ka koi galat arth na lagaye...

Chinta mat kariye ho raha hai bharat nirman.....

Delhi me AAP

Delhi me AAP party ki esthi wasi hai jase ki..

Ladka apni premika ko samandar kinaye baith kar julfo me hath ferte hue uski mang chand taro se bharne ki bat kar chuka ho..
Or basp ke shadi ke liye razi na hone par kahe chalo bhag kar sadi kar lete hai...... !!!@@

कोल्ड काफी

यु तो मैं शकल से ही ढावे पर खाने वाला नज़र आता हूँ ! पर मेरी भी इच्छा हुई कॉफी पीने की तो मैं रेस्टोरेंट चला गया !
कई कारण है की मैं रेस्टोरेंट में नहीं जाता !
एक तो जाते ही बड़ा सा चिठ्ठा थमा देते है वो भी अग्रेजी में लिखी हुई ! और उसमे भी अजीब अजीब आइटम के नाम लिखे होते है ! एक तो आज तक सस्पेंस है की पनीर बटर मसाला में घी डालते है की मख्खन ! मुगी के इतने टाइप होते है की कनफुजिया जाते है ! अपन तो मुर्गी की मुंडी मचोरो छिलो पकाव खाव में यकी रखने वालो में है !
दूसरी की कुर्सी टेबुल ए सी पर इतना खर्चा किया दो चार बल्ब लगा देते तो कितना खर्चा हो जाता ! इतने में एक भाई साब शायद अपनी गर्लफ्रेंड के साथ पधारे और आते ही कोने का टेबल पकड़ा तब बल्ब का लोजिक मेरे समझ में आया !
पर उन भाई साब पर तरस आ रहा था क्योकि उनकी गर्लफ्रेंड शायद अपने साथ अपनी भी गर्लफ्रेंड को साथ ले कर आई थी ! माले मुफ्त दिले बेरहम लगाव कप पे कप ! बेचारे डबल खचा करके भी हाथ मलते ही रह गए ! अपना नहीं यार !!!!
मेरी कॉफी आ गयी मैं तो उसे जल्दी से पीने लगा की कही उन भाई साब और बहन जी के चक्कर में मेरी ठंढी हो गयी तो कोल्ड कॉफी का रेटे 40 रु था !!!!

गुप्त त्याग

काग्रेस के बिरोधी भी इस बात को मानते है की देश के लिए राजीव गाँधी की सोच अच्छी थी ! उन्होंने देश में कम्पुटर लाया अब जुकर्वार्ग फेसबुक लेकर आ गए इसके लिए वो तो जिम्मेदार नहीं है ! ये अलग बात है इसका परिणाम उनके ही बीबी बच्छे को झेलना पडा !

उनके सुपुत्र श्री राहुल गांघी के देश के प्रति गुप्त त्याग को तो कोई समझ नहीं पाया ! जनसँख्या नियंत्रण में बिफल रही सरकार को समलैंगिक सम्बन्ध से उम्मीद की एक किरण नज़र आई भी थी तो सुप्रीम कोर्ट ने उसपर भी पानी फेर दिया !

फिर तो काग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ पर ही अमल करना होगा !

सरकार करना चाहती है तो कोई न कोई न कोई अपना पैर बिच में दल देता है फिर कहते है सरकार कुछ करती नहीं !

स्त्री

कबिता कहानियो में ऐसा दर्शाया जाता है दुनिया में जो भी सुन्दर है ;श्रेष्ठकर है वो स्त्री ही है ! ये तो एक योजना थी की ये बेबकुफ़ है इसे और बनाव ! पर लगता है पासा उल्टा पड गया ! अब ऐसा समझा जाने लगा ! बचपन में एक कहानी पढते थे भेडीया आया भेडीया आया ! वही हो गया है !

"स्त्री प्रकृति की अनुपम् कृति है "
ऐसा कहा जाता है ; पत्नी के रूप में एक एक प्रति (pis) अपनी अपनी सब के पास है कोई दिल पर हाथ रख कर बता दे की उसमे अनुपम क्या है ! वो अनुपम है तो लड़के क्या बाढ़ में बह कर दुनिया में आये है !

मतलब उसे भगवन ने फुर्सत से बनाया है ' लडको को क्या ठेके पर बनवाया है ; की खराब मटेरिअल यूज किया गया है !
शीप सी आंखे नहीं हमारी आँखों में क्या गोटीया बैठाई हुई है !

झील सी आंखे -अब बात बात कभी कभी बिना बात के भी रो रो कर गंगा जमुना बहाने वाली को रोत्लू न कह के झील कह दिया तो इसमे गलत फहमी पालने वाली कोई बात तो है नहीं !

रेशाम से बाल - सर पर जो झाड झाँखर उग आये है उसे रेशाम कह दिया एस रेशम की ओउकत तो तब पता चलती है जब खाने में एक बाल निकल जाय ! वैसे रेशम भी तो एक कीड़े का अवशिष्ट है !

हिरनी सी चाल ; नागन सा बलखाना ; कोयल सी बोली ........ सारे जानवरों वाले लक्षण ले के पता नहीं किस भ्रम में रहती है स्त्री !

Tuesday, 26 November 2013

काम

जब बेराजगार थे तो चैन में थे ' बाप का खाते थे चैन की बंसी बजाते थे ; ऐसा नहीं था आने वाले कल की थोरी चिंता थी मगर काम करने पर पता चला कल की कल की बात है यहाँ तो साली आज ही नाम में दम किये रहती है !

बाप जी के धर्म खाते से लेपटोप खरीद लाए थे तो लगा था ये कमाल की चीज़ है ! अब दिनभर टक टकी लगाये हुए सारा दम  कुर्सी पर बैठे बैठे पिछवाड़े में जमा हो जाता है ! दिन भर के किचिर किचिर में शाम होते होते कुछ बचता नहीं ! जो बचता है उसे  पूर्णतया आदमी तो नहीं कहा जा सकता !

कौन कहता है की काम करने के लिए पढ़ा लिखा ग्रेजुएट होना चाहिए मैं तो यही समझा है काम  करने के लिए एक गधा चाहिए बस एक गधा !
तजुर्बे की कह रहा हूँ कुछ दिनों पहले एक कम्पनी में मुलाजिम के तोर पर कम किया बस गधे की तरह कम करते जाव यही डीजिग्नेसन थी अपनी ! फिर उसे छोड कर अपना छोटा सा काम शुरू किया सोचे अपना बॉस हम खुद होगे पर साहब हालत इसी हो गयी की गधे से कुत्ते होगे ! वो भी धोबी के !

अब समझ आया मुलाजिब भी धोबी का गधा बॉस भी घोबी का कुत्ता ! घोबी इनके बिच इसलिए आ जाता है क्योकि दोनों को धोना बहुत आसान है ! मुलाजिम गधे को तो कम से कम खाना तो नसीब होता है ! धोबी का कुत्ता तो घर का न घाट का !

Wednesday, 6 November 2013

अकबर इलाहाबादी

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार1 नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ

 इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं,
हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है।

ख़ुदा की राह में अब रेल चल गई ‘अकबर’!
जो जान देना हो अंजन से कट मरो इक दिन.

क़द्रदानों की तबीयत का अजब रंग है आज
बुलबुलों को ये हसरत, कि वो उल्लू न हुए.

munwar rana

अब रुलाया है तो हँसने पे न मजबूर करो
रोज़ बीमार का नुस्ख़ा नहीं बदला जाता

उम्र इक तल्ख़ हक़ीक़त है ‘मुनव्वर’ फिर भी
जितने तुम बदले हो उतना नहीं बदला जाता.

कुछ रोज़ से हम सिर्फ़ यही सोच रहे हैं
अब हमको किसी बात का ग़म क्यों नहीं होता

पत्थर हूँ तो क्यों तोड़ने वाले नहीं आते
सर हूँ तो तेरे सामने ख़म क्यों नहीं होता

मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए
वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुए

नये तरीक़े से मैंने ये ये जंग जीती है
कमान फेंक दी तरकश में तीर होते हुए

जिसे भी चाहिए मुझसे दुआएँ ले जाए
लुटा रहा हूँ मैं दौलत फ़क़ीर होते हुए


Monday, 4 November 2013

फैशन टी वी

Faishan tv dekh raha tha yaar usme faishan kidhar hota ...

Bas mast music to hota hai !!

Or kuch chudail type ladkiya chithdo me ghumte rahti hai...!!

Kis hisab se unhe modal kaha jata hai pata nahi , kuch to etni khatarnak hoti hai ki unke bachche to paida hote hi hard attack aa jay....!!

Wo jo jatti hai kya kahte hai cat walk.. or log ese kutte ki tarah gurte hai esliye shayad ese cat walk kaha jata hoga...

Kamal hai !!!

भारतीय माँ की चालाकी

Facebook bahut se log maa par kai sare post karte hai..!! Achchi bat hai maa-baap enka joint accout ke rup me perents kaha jata hai.. enki ezat to karni hi chahiye....!!

Mere dimag me ek baat aayi..!!

Khas kar bhartiy maa bahut chalak hoti hai pyar -muhbbat khana-pina sab apne jimme rakhti hai or bachche ko datne ka theka baap ji ko de rakha hai...

Aji aap kuch kahte kyu nahi hai esko...!

Film ke wilan wali imeg bana rakhi hai baap ki...

Han es ke badjud mata shri bich bich me ye kah kar ungli bhi karte rahti hai..paapa kuch kah rahe hai tum samajh rahe ho ki nahi...!!

Or pita shri bhi manmohan singh ki tarah chalu ho jate hai.. yahi sikha hai tumne ? Es liye padhaya tuko ?

Jaise wo jawani me kitne bade sadhu ho ..kabhi kisi ladki ko cheda hi na ho... baap bante hi sex gyan ke mamle bilkul hi anadi ban jate hai baap.......!!

Yaad aaya fist year me mera ek dost tha jise lagta tha ki uska baap ab tak virgin hai.. wo to jab maine use bataya tab wo samjha..or bola

Papa esa kaise kar sakte hai wo bhi mammi ke sath.........!

बबली ब्यूटी पार्लर

Abhi rode par ek bord dekh "Babli beauty parlar "

Jia par likha tha "YAHAN DULHAN BHI TAIYAR KI JATI HAI.."
Main sochne lags yaar log kahan se kahan pahuch gaye Maal patane ki dukan khul gayi or main abhi tak sadko par hi try kar raha hun !!

Gadi par tha nahi to main dukan me jake kahne wala tha ki kisi ko meri Dulhan banne ke liye bhi taiyar kar do...!!

Abhi ja ke samjh aaya hai kamjor dimag fir dhokha de gaya.. uska matlab tha ki jo Dulhan banne ko taiyar ho wahan sirf uska make up hota hai...!!

Bhawnaye aahat ho gayi yaar case karne ka man kar raha hai ....!!!!

प्यार के तीन शब्द

Ek bhai sab ne muhhe Pyar se 3 shabd kahe ¡¡♥♡♥

Galat mat samjiye ga esa aadmi nahi hun main ki admi hu admi se pyar karta hun..!Mujhe yaki hai wo bhi waise nahi hoge...!¿¿

Fir ye muhabbat kyu jagi pata nahi.. par unhone mujhe payar se kaha ♡♡♡♡♥

Salee *** , Kutte *** , Kamine***

Ye nawazis hai ya sazis uparwala jane..♥♥

Ek sher ki line yad aa gayi
"Apna gunah ye tha ki hum begunah the"

Dusri bat fb par koi kuch bhi kah de uska kuch ukhad to sakte nahi...@@!
Wase bhi banda kuch de raha hai le to raha nahi hai !!
Ab bat aati hai diya kya...!!

Salee - ab riste dari ke liye thori jan pahchan to honi chahiye.. , khair ab kah hi diya to jija ji ko pranam !! Ya jiski bahan se kabhi milan ki choro dekha tak na ho wo sala kahe to thori taklif to hoti hai...!!

Kutte - Jab koi mujhe kutta kahta hai to sina garb se ful jata hai.... !! Dhatttttt wase wala nahi yaar.. matlab sina chora ho jata hai... akhir kutte to imandari ..,wafadari ke misal hai.. or main hun bhi ye alag bat hai abhi chance mila nahi esliye imandar hun....!!

Kamine - "Kamini" ka nam suna hai bhagwan indr ki apsara thi shayad.. usi ka pullig hai lagta hai Kamine... ! Matlab main bhi smart hun.. meri maa bhi kahti thi mera beta sabse sundar hai.. par pata nahi log es bat ko mante kyu nahi !! Shayad man ki akhnkho se dekhte nahi..

भगवान की गलती

Bhagwan se ek galti ho gayi ...

Ladkiyo ko bhi much dadhi deni chahiye..

Na chehra etna chikna hota na nazar fisalti !
Isme kisi ka kuch nahi gatta ...

Fir hum bhi aine ke samne khade hokar khud ko sarif batate . ! Jo ki main hun... log bhi kahte hai.. bas apne aap ko nahi samjha pa raha !!

फोन का इतिहास

अपने फोन के इतिहास पर अगर नज़र डाले तो पहले तो बीएसएनएल का चोगा हुए करता था , नंबर एक पर फोन लगे होते थे कई रूम में , मुझे तो अभी भी याद है मेरी गर्ल फ्रेंड से मेरे बाप जी ने मेरे हिस्से की गाली खायी थी ! और फिर जो मुझे खिलाई थी ! उस वक्त एक इंटरेस्ट होता था फोन लगाने में की आखिर उठेगा कौन ! मम्मी फोन उठा ले तो बैचैनी भी होती थी ! पुरे गाव में चार ही फोन थे पर काम पुरे गाव का चल रहा था !

फिर आया नोकिया 3310 घर में वही जिससे हथोरे का काम भी लिया जा सकता था , गन्दा हो जाय तो बर्तन के साथ दे दो धोने के लिए ! सारे फीचर्स का बाप था उसमे वो सांप वाला गेम ! पर उसपर तो पिता श्री का ही कब्ज़ा हुआ करता था !

मेरा पहला मोबईल फोन नोकिया 1600 ! कमाल का फोन था गिरने पर तीन टुकडो में बिखर जाता था फिर उठा कर पज्ज़ल की तरह जोड़ दो फिर चालू ! पर नोकिया यूजर में एक दिक्कत है कितना भी हायटेक मोबाइल वाला हो सब जगह जाके कहता है भाई सब पतली पिन का चार्जर होगा क्या !
फिर आया मिक्रोमक्स 15 दिन का बेटरी बेकअप ! फिर लावा के झनझनाहट से होते हुए पहुच गए सेम्सग तक ! यु तो उगली करने की आदत तो नहीं फिर टच स्क्रीन सेट ली है ! अजीब मुसिबत पाल ली है मैंने तो , यार करने कुछ जाव हो कुछ जाता है ! एक तो पहले किसी ने कुछ गलत बात की तो झट से काट तो सकते थे पर इसमे तो वो तेवर दिखाने का मौका भी नहीं मिलाता !

आगे और भी है एप्पल , इ –फोन ... इसमे क्या होता है ये तो भगवान जाने या फोन वाले ! पर आई- फोन का नया मोडल लोंच होने वाला था तो कुछ लोग तो इतने एक्साईटेड थे जैसे नए बच्चे के बाप बनने वाले हो !एक और है आई पैड मुह से बड़ा फोन ही होता है ! यार 45000 खर्च करने की मेरी तो औकात भी नहीं और इतना खर्चा करके आफत क्यों मोल लेना , इसे तो युज करने से जयादा तो चार्ज ही करना पड़ता है !

मेरे जैसे ?

ek friend ne kaha tum jaise fb par lakho mil jayge !

hum thore confjiya gaye ki mere jaise lakho ghum rahe hai or mujhe pata bhi nai, esa kaise ho sakta hai main to apne baap ka eklota beta hun ....!

or mana wo mere baap hai par nihayt sarif admi hai unke cerector ke bare me main kya koi bhi ungli bhi nahi utha skta...

waise bhi lakho to posible bhi nahi !!!!

thori der se hi sahi samjh aaya ki bat facebook friend ki bat ho rahi thi .... fb ke bare me main bhi jnta hun fb par 5000 frend add karne ki swidha hai fir lakho kaise !!

kon samjaye...........................!!!!!!

Sunday, 13 October 2013

prem ka simbol

mujhe es bat par sakt aapatti hai ki prem ka pratik(simbol) mahila ko samjha jata hai.. par dunya ki koi esi prem katha nahi hai jisme antim me ladki ne kast jhela ho ..

" paro thakur sahab ke mahal chali jati hai.. liver ki bimari se dev das marta hai"

"laila apne mahal jati hai majnu sadko par pathro se pitta hai"

sirhi apne ghar jati hai farhad nahar khodte khodte kud ret ho jata hai"

kisi chehre , jagah , kam kisi ko bhi etna mat chahna chahiye ki uske na milne par jindgi bojh lagne lage...

tab ek sher arz karta hun...

"kud se bhi mil na sako itne pas mat hona !
ishq to krna magr devdas mat hona !!!"

isqu me char chize hoti hai....

chahna....

magna.....

yachna,.....

ya
kho dena.....

ye sare khel hai isme udas mat hona !

Saturday, 12 October 2013

जिंदगी की गाड़ी

Ek sadi suda mitr ne kaha ki use apne sathi se or kuch nahi chahiye bas pyar chahiye !!

Mere dimag me purane logo ki bat aagayi
" JINDGI KI GADI DO PAHIYO PAR CHALTI HAI "

Yani jindgi two wiler gadi ki tarah hai.. jab ye pyar ke sahare chal sakti hai to meri bike kyu nahi !!

To main pahuch gaya petrol pamp par or bola bhaiya esme 1 lt pyar bhar do...

Pump wale ne pyar se kaha koi gadi pyar se nahi chalti..
Main jo bharuga uske liye payment chahiye !!
Payment ke bad bhi gadi kitni dur jaygi ye es par nirbhar karta ki tumari gadi mailez kya deti hai..

होर्न बजाना

अभी सड़क जाम में फसा हुआ था तो एक बंधू पीछे से पो पो टे टे होर्न बजाए जा रहे थे , मन तो हुआ उतर कर पहले तो उनके कान के निचे दो बजा के दू फिर कहूँ अकल के अंधे दिमाग से पैदल तू गाड़ी से चलता क्यों है पैदल ही चला कर न !

मैं यहाँ कोई पार्क में टहलने निकला हूँ या मुझे शौक है धीरे धीरे चलने का , मोटर साइकिल में ऐसा गियर भी नहीं होता की उड सकू !

फिर अचानक उसके लिए मन में घनी सहानभूति हो आई की शायद उसकी की पहले से बजी पड़ी हो , देश की जो हालत है आम आदमी की तो बजते ही बजते रहती है , या फिर बेचारे की उसकी बीबी ने जस्ट जम कर बजायी हो , और भला आदमी होर्न के शोर में खुंद की शांति तलाश कर रहा हो !

फिर समझ आई होर्न की महत्ता ये बस के इसी चीज़ है जिसे दबा कर आदमी अपना फ्रसटेसन निकल सकता है , टेटेटेटेटे .... की आवाज में एक सुकून है , वरना तो बचपन से इंसान को हमेशा से दबाया ही जाता है ! एक बच्चा जिसकी दिमाग थोडा तेज है वो टोपर बन जाता है , इसमे बच्चे की क्या गलती , गर्ल फ्रेंड / बॉय फ्रेंड के लिए भी सुन्दर दिखना जरुरी है ... सुन्दर न होना किसी की गलती नहीं !

नियति कही न कही हर किसी को दबा ही देती है ... तो क्या हुआ कोई अपनी भड़ास होर्न बजा कर निकल ले तो ...!

फैशन टीवी

Faishan tv dekh raha tha yaar usme faishan kidhar hota ...

Bas mast music to hota hai !!

Or kuch chudail type ladkiya chithdo me ghumte rahti hai...!!

Kis hisab se unhe modal kaha jata hai pata nahi , kuch to etni khatarnak hoti hai ki unke bachche to paida hote hi hard attack aa jay....!!

Wo jo jatti hai kya kahte hai cat walk.. or log ese kutte ki tarah gurte hai esliye shayad ese cat walk kaha jata hoga...

Kamal hai !!!

खिडकी

sabere jaga to khidki se meri nazar ek sundar bala par padi !

chharahra badan , lambe bal , lachkti kamar , balkahti chhal , ufff us par hari salwar !

use dekh kar man me ek sher aaya !

arz hai ....!!

main bhi khud ko irsad irsad karne hi wala tha ki wo ...!!

palat gayi mera sher kutte ki tarah dum dawa ke bhaag gaya ! kahe ki sudar bala wo to bali ki chacheri bahan nikli ! hare kapdo me laga koi slim bhaish gehun ke khet me khush aayi ho !

bhagwan par se bharosha uth gaya sahab ! main to ab khidki me pahle parda lagwauga , matlab dekhna hi nahi hai udhar ab to !!

Raj kapur ki film teesri kasam ki taraha kasam khane ko man ho raha hai kisi ko pichhe se dekh kar koi anuman nahi lagauga !!

bhai jab tak samne se dekh na lu tab tak bibi ki tarah hi samjhuga ! galat mat samjhiye ka agar din raat mila kar 2-4 ghate nikal diya jay to banda jitni izat ki nazro se bibi ko dekhta hai utni izat to maa bahno ko bhi nahi deta !!!!!!

Thursday, 19 September 2013

बच्चे

हर किसी के अंदर एक बच्चा हमेशा रहता है जो विवश कर देता है इस तरह की  हरकते करने के लिए जो नहीं करना  चाहिए !

वो बच्चा हम बडो की दुनिया देख कर बड़ा होना ही नहीं चाहता !

लेकिन अब सोचता हूँ बच्चो की दुनिया भी कम मुसीबत नहीं है ,  अभी किसी बच्चे को स्कूल जाते देखता हू तो लगता है सुबह ६ बजे जागना कोई आसान काम तो नहीं है , उसपर अपने वजन से ज्यादा का बेग लाद कर ,  पुरे शहर का चक्कर लगते हुए स्कूल पहुचना , फिर नन्ही सी जान के लिए २ का पहाडा याद करना किसी पहाड से कम तो नहीं है ! हमसे ज्यादा व्यस्त है बेचारा !

हमारा जमाना कुछ और ही था हम तो गाव के स्कूल में पढ़े , आज के बच्चो की तरह नहीं थे की बस आई और चढ गए ! हम तो इज्जत के भूखे थे , स्कूल जाते नहीं थे बुलाए जाते थे , वो भी एसे नहीं चार लड़के घर आते थे और मुझे उठा कर ले जाते , गुरु जी पहले से गेट पर स्वागत के लिए खड़े रहते थे !

२१ तोपों की जगह छड़ी से सलामी दी जाती थी तब क्लास रूम जाते थे !

A zindgi chalo dhudhte hai tujhko

A zindgi chalo dhudhte hai tujhko ,... 
kali hai raat to kya chand taaro me dhundhege tujhe ,
 andhe hai raste to kya man ke ujalo se dhudhe ge tujhe ....

chupa ke aashu ankho me , daba ke dard dil me liye hotho pe muskan har birane me dhundhege tujhko ...

a zindagi chalo dhundhte hai tujhko !!!!!!

Monday, 16 September 2013

नाई

सैलून में किसी बच्चे को बाल कटवाते देखता हूँ तो

उस हाहाकारी सन्डे के भयावह मंज़र के बारे में सोचने लगता हूँ जब पिता जी मुझे लेकर नाइ के पास ले जाते थे ! भले से चेहरे होठो पर मुस्कान लिए हाथ में कैची के कारण किसी जल्लाद से कम तो नहीं दीखता था !

बच्चे  तो बच्चे है मामूली टोफ़ी के लिए अपनी गर्दन किसी को तो नहीं सौप सकते भाई !

बचपन से आज तक भी समझ नहीं आई की नाइ का कान में क्या इंटरेस्ट है ,पूरा टाइम देते है कान के पीछे ! पता नहीं उन्हें क्या मज़ा आता है कान के निचे कैची बजाने में , क्या हो साबित करना चाहते है की उनमे वो हुनर है की किसी की भी कान काट सकते है !

और गर्दन की सामत आनि तो पक्की है , ऊपर निचे दाये बाये ... अब गर्दन में स्प्रिग तो लगा नहीं है , मन तो होता है मुन्डी खोल के दे दू ले यार तुझको जो करना है कर ले हो जाय तो लौटा देना ! पर ऐसा सिस्टम है नहीं खोपड़ी में !
अब तो मुसीबत और बढ़ गयी जब दाढ़ी बनानी पड़ती है ! गले और अस्तुरे के बिच बस भगवान ही होता है , अगर नाई से किसी बात की खुन्नस हो गयी हो तो भगवान भी नहीं होता , बस नाई के ही रहमो करम पर है आप तो समझिए !
हम जैसो के लिए तो एक मुसीबत और है गर्दन से ज्यादा प्यारी मुछ है , वो कट गयी तो नाक काटने का खतरा है !

Sunday, 15 September 2013

भूतिया कहानी

सभी को होर्रार कहानी देखनी चाहिए !

जी मैं विक्रम भट की नयी फिल्म का प्रमोसन नहीं कर रहा , क्योकि एक तो मैं कमिसन खोर नहीं हूँ , दूसरा मुझे कमिसन देगा कौन , तीसरी मैंने अभी तक वो फिल्म देखि नहीं तो तारीफ करू !

मैं तो सीधी सादी भूतया फिल्म की बात कर रहा हू , बड़ी ज्ञान वर्धक कहानी होती है काम तो आनि ही है , जीवन का अकाट्य सत्य है मौत , अब हम जैसो ने ऐसा कोई काम तो किया नहीं की मोक्ष की उम्मीद भी हो , और जिस हिसाब से प्रोडक्सन हो रहा है की नया शारीर देने में भगवान को टाइम तो लगेगा ही इस बीच भुत की जिंदगी ही तो जिनी है ! तो भूतो के बारे में जानना फायदे मंद है की नहीं ...!

लड़कियों के लिए तो होर्रर फिल्म जीते जी भी फयदे का है क्युकी लड़की जैसे ही किसी की गर्ल फ्रेंड बनती है छोटी मोटी भूतनी तो बन ही जाती है , दांत वात तो नहीं निकले , पर लो बज़ट की भूतिया फिल्म की तरह खूबसूरत सा चेहरा बना कर इश्क विश्क गाना वाना गा कर सब कुछ होने के बाद गन्दा सा चेहरा बना लेती है ! मेरी तो समझ नहीं आती जब गला ही दबाना था तो उसमें चेहरा बनाने की क्या जरुरत थी !

थोडा पर्मोसन होने पर लड़की पत्नी बन जाती है यानि आदमखोर चुडेल ....... !! तो पता तो होना चाहिए न की पति का रोज कितना खून पीना चाहिए !

भूतिया फिल्म की कहानी का सार होता है डर ! शादी शुदा लाइफ का भी सार है डर , पहले जमाना था मायके चले जाने का डर था , अब तो सीधे महिला आयोग !

मुझे तो भूतिया कहानी एक महान पारिवारिक फिल्म की तरह लगती है !

आप क्या कहते हो ????????!!!!!!!

Thursday, 5 September 2013

निजी गुरु

आज शिक्षक दिवस पर सभी की अपनी अपनी निजी गुरु गर्लफ्रेंड , प्रेमिका , पत्नी को शाष्टांग प्रणाम करता हू !
तीनो पोस्ट के हिसाब से वैसे ही है जैसे टीचर , क्लास टीचर , प्रिंसिपल !

ये जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण पाठ हमें पढाते है , जेनरल नालेज से सरकारी नौकरी तो मिल सकती है पर ये हमें वो जानकारी देती है जो जीवन भर काम आये !

जीवन में इनके कदम पड़ते ही ये बदलना सुरु करती है , बदलते बदलते जब सामने वाला मिनी मुरारी बापू हो जाय तब ये इल्जाम भी लाद दिया जाता है की पहले जैसे नहीं रहे !!!!

तब तक तो बंदे को पता चल चूका होता है जीवन क्या है "माया " है और कुछ नहीं !
इस अनमोल ज्ञान को देने वाले गुरु को एक बार फिर से प्रणाम !!!!!

दिवस

हम फेसबुकिय प्राणी किसी भी दिवस को बड़ी धूम धाम से मनाते है !

कई बार तो बिना ये जाने की अमुख दिवस की क्या महत्ता है क्यों मनाया जाता है बिना जाने भी मना लेते है ! ये मान के चलते है चार लोग कह रहे है तो होगा ही  , जबकि उन चार लोगो में तीन लोग तो अपने ही जैसे है , पाचवा अपन भी हो लिए !

कभी कभी तो जोश में किसी के मरण दिन की भी शुभकामना दे डालते है , " जाती न पूछो साधू की " के तर्ज़ पर किसी धर्म संप्रदाय का दिवस हो हम पीछे नहीं रहते विस करने में ! अब नेट पेक पर जो खर्चा होना था हो ही लिया अब मुफ्त की शुभकामना की संपत्ति जितनी लुटा सको क्या फर्क पड़ता है !

वैसे ही आज कोचिग क्लास में डिस्काउंट पर अडमिसन लेने वाले भी शिक्षक दिवस मना रहे है , भैया अब गुरु शिष्य का रिश्ता रहा कहा , अब तो कस्टमर का रिश्ता बन गया है !

विश्व  पर्यावरण दिवस - अच्छा एक दिन में क्या उखाड लेगे !
विश्व जनसँख्या दिवस - पूरा विश्व जनता है हम भारतीय का दिन रात के मेहनत जो मुक्काम बनाया है वो कोई एक दिन में तो नहीं तोड़ सकता !

फादर्स डे , मदर डे - का फंडा तो आज तक समझ नहीं आया , मुझे लगता है अग्रेजो ने ये इसलिए बनाया क्योकि उन्हें तो अपने ओरिजनल मा बाप का पता रहता नहीं होगा तो उस दिन की जरुरत पड़ी होगी ताकि उन्हें खोज कर मिल सके !

एक कमाल का डे दिया अग्रेजो ने -
प्रेमी प्रेमिका दिवस - जो हर साल नए प्रेम के साथ मनाया जा सकता है !
इसी का देसी रूप ठीक नो महीने बाद आता है चिल्रेंस डे -

ये भी विकट प्रश्न है नेहरु जी के जन्मदिन को बच्चा दिवस क्यों मानते है ? अब बच्चो से कौन प्यार नहीं करता !
खैर अपना क्या ?


Saturday, 31 August 2013

मच्छर को बनाएं राष्ट्रीय कीट!

भारत में हम जिस भी चीज को राष्ट्रीय महत्व से जोड़ते है, कुछ समय बाद उसका अपने आप बेड़ा गर्क हो जाता है। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है लेकिन देश में कुछ लोग सिर्फ इसलिए कत्ल किए जा रहे हैं कि वे हिंदी भाषी हैं। मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है मगर आज हालत यह है कि सम्पूर्ण मोर बिरादरी जेड श्रेणी की सुरक्षा मांग रही है। हॉकी के एनकाउंटर के लिए हम भले किसी  को क्रेडिट दें दे , मगर हॉकी की शहादत के पीछे असल वजह उसका राष्ट्रीय खेल होना ही है। वहीं खुद को राष्ट्रपिता का वारिस बताने वालों ने साठ साल से ' गांधी ' को तो पकड़ रखा है, लेकिन ' महात्मा ' को भूल बैठे हैं।

  मेरा मानना है कि जब यह सिद्धांत इतना सीधा है तो क्यों न हम तमाम बड़ी समस्याओं को राष्ट्रीय महत्व से जोड़ दें, वे खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगी। जैसे मच्छरों का भयंकर आतंक है। मेरा मानना है कि अगर हमें मच्छरों का हमेशा के लिए नामोनिशान मिटाना है तो उसे राष्ट्रीय कीट घोषित कर देना चाहिए।

सरकार घोषणा करे कि राष्ट्रीय कीट होने के नाते मच्छरों का संरक्षण किया जाए। उसे
'गंदगी बढ़ाओ, मच्छर बचाओ ' टाइप कैम्पेन चलाने चाहिए। निगम कर्मचारियों को आदेश दिए जाएं कि वे अपनी अकर्मण्यता में सुधार लाएं। जिस गली में पहले हफ्ते में दो बार झाडू लगती थी, वहां महीने में एक बार से ज्यादा झाडू न लगे। गंदगी बढ़ाने के लिए पॉलिथीन के इस्तेमाल को प्रोत्साहन दिया जाए । गटर-नालियां जितने उफान पर होंगी, उतनी तेजी से मच्छर बिरादरी फल-फूल पाएगी और प्रावधान किया जाए कि एक मच्छर मारने पर पांच साल का सश्रम कारावास और दो लाख का आर्थिक दण्ड दिया जाएगा। कानून का आम आदमी में खौफ पैदा करने के लिए ' एक मच्छर आदमी को जेल भिजवा सकता है ' टाइप थ्रेट कैम्पेन भी चलाए जाएं। इसके लिए किसी बड़े स्टार की सहायता ली जा सकती है।
किसी सिलेब्रिटी को मच्छर अम्बेसडर घोषित किया जा सकता है। आप इसे कोरी बकवास न समझें। आपको हम बताते है इससे फायदा कैसे होगा ।
इधर निगम कर्मचारियों तक जैसे ही सरकार का फरमान पहुंचा उनका खून खौल उठा। उन्होंने तय किया कि अब वे कभी अपनी झाडू पर धूल नहीं चढ़ने देंगे। जो कर्मचारी पहले सड़क पर झाडू नहीं लगाते थे, वो खुंदक में अपने घर पर भी सुबह-शाम झाडू लगाने लगे। वहीं पॉलिथीन का ज्यादा इस्तेमाल करने के सरकारी आदेश के बाद महिलाएं पति की पुरानी पैंट का थैला बनाकर बाजार से सामान लाने लगीं। शाही घरानों के़ लड़कों ने, जो पहले जंगल में शेर का शिकार करने जाते थे, अब जीपों का मुंह शहर के गटरों की तरफ कर दिया। अब वह बंदूक के बजाय शिकार पर बीवी की चप्पलें ले जाने लगे और उनसे चुन-चुनकर मच्छर मारने लगे।

 नतीजा यह होगा   के महज तीन महीने के भीतर ही योजना बुरी तरह फ्लॉप होगी  सभी जगह  पूरी तरह मच्छरों से मुक्त हो जायगी ।
योजना की असफलता से उत्साहित कुछ लोगों ने प्रस्ताव रख सकते  है कि इसी तर्ज पर भ्रष्टाचार को राष्ट्रीय आचरण और दलबदल को राष्ट्रीय खेल घोषित किया जाए। इसी तरह 'अतिथि देवो भव' का स्लोगन बदलकर 'अतिथि छेड़ो भव' किया जाए। ऐसा करने पर ही इन समस्याओं से मुक्ति मिल पाएगी। 

दौलत और शोहरत की तमन्ना

दौलत और शोहरत की मुझे बरसों से तमन्ना है। वैसे भी इंसान उसी चीज़ की तमन्ना करता है जो उसके पास नहीं होती। यूं तो अक्ल भी मेरे पास नहीं है, मगर वो आ जाए ऐसी कोई ख़्वाहिश भी नहीं ! मौजुदा आमदनी में खर्च धटा दू तो अगले दस सालो में बचत होगी कुछ हज़ार रूपये ! इसी अनुपात में लोकप्रियता बढ़ी तो इन दस सालों में तीस-चालीस नए लोग ही मुझे जान पाएंगे !
मतलब ये कि मौजूदा पेस पर दस सालों में कुछ हज़ार रूपये और अपनी प्रतिभा से कायल या घायल हुए तीस-चालीस लोगों की कुल जमा-पूंजी ही मेरे पास होगी, जो मुझे कतई मंज़ूर नहीं है। मैं चाहता हूं कि जल्द ही मेरे पास लाखों रूपये हों, करोड़ों दीवाने हों, जिसमें भी दीवानियों की संख्या ज़्यादा हो,

जब मैंने अपनी ये ख्वाहिश मित्र को बताई तो उसने कहा कि इसका एक ही तरीका है, किसी रिएलिटी शो में चले जाओ। टीवी पर मेनली तीन तरह के रिएलिटी शो आते हैं। गाने का, नाचने का या अन्य किसी नायाब किस्म की मूर्खता का।
सोचने लगा कि मैं इनमें से किस रिएलिटी शो में जा सकता हूं ! जहां तक गाने का सवाल है, उससे जुड़ा मेरा और उनका, जिन्होंने मेरा गाना सुना, अनुभव अच्छा नहीं रहा।
इससे पहले कॉलेज में भी एक बार ऐसा हादसा हुआ था। मित्रों के प्रोत्साहन पर, बाद में पता चला कि उन्होंने मज़े लिए थे, मैंने सालाना फंक्शन में गायन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जैसे ही मैंने गाना शुरू किया जनता तो जनता वहां मौजूदा कौओं तक ने अपने कान बंद कर लिए, बाग के फूल मुरझाने लगे, कुत्ते भौंकने लगे और माइक में शॉर्ट सर्किट के बाद धुंआ निकलने लगा। कार्यक्रम संचालक ने बीच गाने में आकर मेरे कान में कहा कि हम वादा करते हैं कि पहला पुरस्कार तुम्हें ही देंगे, मगर भगवान के लिए अभी-इसी वक़्त गाना बंद कर दो।
अपनी संगीत प्रतिभा को निखारने गुरु जी के पास भी गए थे , उन्होंने कहा बेटा तुम्हारे अंदर बहुत पतिभा है पर मानव जाती के कल्याण के लिए इसे दावा कर ही रखो!
ये ऑप्शन मेरी लिए ख़त्म हो गया। रही डांस की बात। तो लाख चाह कर भी उस पर चांस मारने की हिम्मत नहीं पड़ती। डांसने के लिए पैर चलने बहुत ज़रूरी है। कुछ-एक नचनिया टाइप मित्रों ने सिखाने की कोशिश भी की मगर उन्हें भी लगा कि ‘भारी न होने के बावजूद’ हिलने के मामले में मेरे पांव अंगद के समान हैं।

कौन बनेगा करोड़पति टाइप में जाने का तो सबाल ही नहीं ..इसमे ज्ञान की जरुरत है , अपने ज्ञानी होने का इल्जाम अपने सर नहीं ले सकता ! अब किसने क्या किया क्यों किया सारे जहाँ का मैंने कोई ठेका थोड़ी ले रखा है !
कुल मिलाकर दोस्तों, तय नहीं कर पा रहा हूं किस रिएलटी शो में जाऊं। आख़िर में यही लगता है कि बेमतलब बातों की अंतहीन सड़क पर आवारा-निकम्मे दोस्तों के साथ बेहिसाब दौड़ने का मेरे पास बेशुमार अनुभव है। पांव चलें न चलें, ज़बान खूब चलती है। कभी ज़बान चलाने का कोई रिएलिटी शो हो तो बताइएगा, फिर कोशिश करेंगे।

Monday, 26 August 2013

अचार



बड़े बुजुर्गो के आचार विचार पर विचार करने से हमारे अंदर बढ़ता है शिष्टाचार , जब शिष्टाचार का अचार बना डाला जाय तो वो जाता है भ्रष्टाचार ! भ्रष्टाचार को खतम करने का ठेका तो केजरीवाल बाबू के आप ने ले ही लिए है !

हम तो ठहरे ओरिजनल टाइप के आम आदमी तो हम विचार करते है अचार पर ! अचार के नाम से मुह में पानी आया न ! बड़ा ही महत्वपूर्ण है अचार हमारे जीवन में !

जब बच्चा पैदा होने वाला तो मा को अचार यानि खट्टा खाने की इच्छा होती है ! यहाँ सभी पैदा हुए होगे कोई लक्की द्र से तो निकला नहीं होगा ! यानि हमारे पैदा होने से पहले ही जो पोष्टिक आहार हमें मिला वो खट्टा ही है ! तभी तो कहा गया है जिंदगी का मज़ा तो खट्टे में है !
फिर तो जीवन में खट्टे ही खट्टे है !

जिसको चाहा उसे पटा नहीं पाए तो अंगूर खट्टे है !

साथियों को हरा कर यानी दात खट्टे कर जॉब लो !

फिर हर दिन बोस खट्टा सा मुह बना कर सामने खड़ा हो जायगा !


Sunday, 25 August 2013


कुछ चीजे रखी हुई है मेरे पास -

वो एक जिंदगी की किताब हर लफ्ज़ झूठे है जिसके ,
एक सुखा गुलाब जिसमे महक नहीं अब तो ,
कुछ कागज के पन्ने जो पीले हो चुकी है , शब्द भी बिखर चुके है जिसके ...!!...

ताख पर रखा हुआ है कुछ लम्हा जो बीतता नहीं ,
कुछ ख्वाब है मेरे तकिये के निचे जो टूटता नहीं ,
कुछ बाते जो दीवारों से गूंजती है ,

सोचता हूँ इन्हे समेट कर बहा दू दरिया में ,
दफ़न कर दूँ उनको ....
पर हर बार जब समेटने जाता हूँ इनको मैं खुद ही बिखर जाता हूँ

Sunday, 18 August 2013

मेहँदी का रंग

मेहँदी को रंग लाने  में बूटीपार्लर वाले की या मेहदी की क्वाईलिटी का दोष हो सकता है पर किसी हिसाब से किसी का भी प्यार किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं हो सकता !

पर कहा ये जाता है की "जिसका महबूब जिसको जितना प्यार करता है मेहँदी उतनी रंग लाती है "

जिसने भी ये कहा है यार खोजो तो उसको पीटना है ! ऐसा सब शगूफा बना देते है , किसी न किसी को किसी रोज मरवायगी इस तरह की बाते !!!!

प्याज

कितने महान , ज्ञानी , अंतर्यामी , थे हमारे साधू  महात्मा , भगवान बुध , महावीर........
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वो हमें हमेशा से लहसुन प्याज खाने से मना करते आये है !

उन्होंने प्याज के भविष्य को पहले ही जान लिया था !

प्याज के भाव ने हमारी आंखे खोल दी महाराज !

हम तुक्ष इंसान महापुरुषों की भविष्य की सोच और दिव्य दृष्टी को समझ नहीं पाए ! अपने इस नादाँ बालक को क्षमा करे !!!

जन्म दिन

लोगो को फेसबुक पर जन्मदिन की बधाईया बटोरते देख मेरे मन में भी सबाल उठ्ठा की मेरा ओरिजनल डेट ऑफ बर्थ क्या है ?
जब मैंने घरवालो से पुछा की मैं पैदा कब हुआ वो बोले बुधवार को , अब ये बुधवार तो हर हफ्ते आ जाता है , फिर उन्होंने दिमाग पर थोडा जोर ड़ाल कर बताया की उस साल काली गाय ने उजला बछड़ा दिया था उससे सात दिन बड़ा है तु!

मैंने कहा ये क्या बात हुई उसके आस पास की देश की कोई बड़ी दूरघटना बताये तो बाकि मैं गूगल पर सर्च कर लुगा !
उन्होंने कहा जिस दिन तुम पैदा हुए उसी दिन गाव के नए मुखिया के बाप की शादी हुए , अब ये तो गूगल का बाप भी नहीं बता पायगा की उसकी शादी कब हुई... !
मेरी तो समझ नहीं आया उनको सबसे बड़ी दुर्धटना मुखिया के बाप की शादी ही लगी ! मेरे पास अब एक क्लू तो था ! मैं मुखिया के पास गया की तेरे बाप की शादी कब हुई !

उसने कहा मुझे क्या पता मैंने कौन सा उनका कन्यादान किया था ! मैं तो उनके बारात में भी सामिल नहीं हुआ ! पर तुम्हे उनकी शादी में कोई ओब्जेसन है का ! मैंने कहा नहीं मुझे तो बस अपना डेट ऑफ बर्थ जानना था !
उसने कहा ये कौन सी बड़ी बात है तुम पंचायत ऑफिस चले जाव वहाँ सब के जनम मरण का रिकॉर्ड रहता है !
पंचायत ऑफिस में जाकर मैंने वहाँ के कर्मचारी से कहा चचा मुझे अपना डेट ऑफ बर्थ जानना है , वो बोले हाँ हाँ क्यों नहीं ! दो घंटे तक फाइल पलटने के बाद उन्होंने कहा पता चल गया बेटा !
तुम अब तक पैदा ही नहीं हुए ! मेरी तो पाँव के निचे से जमींन खिसक गयी पर तुरंत होश आया नहीं यार मैं हूँ !
मैंने कहा चाचा कैसी पागलो जैसी बाते करते हो , वो बोले मैं गलत नहीं कह रहा तुम्हारे बाप के घर कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ ! सरकारी रजिस्टर तो यही कहते है ,
लेकिन अब तो तुम्हे पैदा होना पड़ेगा ! मेरे पास 5000 से 15000 तक के डेट है तुम किस डेट में पैदा होना चाहोगे !
मैंने कहा मैं समझा नहीं , वो बोले VVIPडेट @15000जैसे 15 AUG, 26 JAN., VIPडेट @10000.. 15AUG, 26 JAN के आगे पीछे या फिर नोर्मल @ 5000 !!
मैंने कहा मेरी डिलेवरी तो वैसे भी नार्मल ही है तो आखिर कार 5000 देकर 22 SEPTMBER का डेट मिला मुझे !!!!!

Friday, 16 August 2013

sahir ludhyanwi

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है


कि ज़िन्दगी तेरी ज़ुल्फ़ों की नर्म छाँव में
गुज़रने पाती तो शादाब हो भी सकती थी
ये तीरगी जो मेरी ज़ीस्त का मुक़द्दर है
तेरी नज़र की शुआओं में खो भी सकती थी


अजब न था के मैं बेगाना-ए-अलम रह कर
तेरे जमाल की रानाईयों में खो रहता
तेरा गुदाज़ बदन तेरी नीमबाज़ आँखें
इन्हीं हसीन फ़सानों में महव हो रहता


पुकारतीं मुझे जब तल्ख़ियाँ ज़माने की
तेरे लबों से हलावट के घूँट पी लेता
हयात चीखती फिरती बरहना-सर, और मैं
घनेरी ज़ुल्फ़ों के साये में छुप के जी लेता


मगर ये हो न सका और अब ये आलम है
के तू नहीं, तेरा ग़म, तेरी जुस्तजू भी नहीं
गुज़र रही है कुछ इस तरह ज़िन्दगी जैसे
इसे किसी के सहारे की आरज़ू भी नहीं


ज़माने भर के दुखों को लगा चुका हूँ गले
गुज़र रहा हूँ कुछ अनजानी रह्गुज़ारों से
महीब साये मेरी सम्त बढ़ते आते हैं
हयात-ओ-मौत के पुरहौल ख़ारज़ारों से


न कोई जादह-ए-मंज़िल न रौशनी का सुराग़
भटक रही है ख़लाओं में ज़िन्दगी मेरी
इन्हीं ख़लाओं में रह जाऊँगा कभी खोकर
मैं जानता हूँ मेरी हमनफ़स मगर फिर भी


कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है

ज़िन्दिगी यूं हुई बसर तनहा


 
ज़िन्दिगी यूं हुई बसर तनहा
काफ़िला साथ और सफ़र तनहा

अपने साये से चौंक जाते हैं
उमर गुज़री है इस कदर तनहा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तनहा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तनहा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर ना जाने गये किधर तनहा

आज़ादी का जशन

मना लिए आज़ादी का जश्न , हो लिया फील गुड , देख लिए परेड !

तो तैयार हो जाइये कल के अपने परेड के लिए , वही ऑफिस वही बॉस ....!

टाइम से ऑफिस पहुचने की आज़ादी फील कीजये !

बॉस का गिसा पिटा भाषण में मनमोहन सिंह को फील कीजिये !

कम्पूटर के कीबोर्ड पर इंग्लिश टाइप करते हुए तो जरुर आज़ादी फील करेगे !

चलिए सडको पर आती जाती भारतीय नारी को जींस में देखकर तो कम से कम आज़ादी फील कर ही सकते है !

ahmad faraz

इस से पहले कि बेवफा हो जाएँ
क्यूँ न ए दोस्त हम जुदा हो जाएँ

तू भी हीरे से बन गया पत्थर
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ

हम भी मजबूरियों का उज़्र करें
फिर कहीं और मुब्तिला हो जाएँ

अब के गर तू मिले तो हम तुझसे
ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएँ


बंदगी हमने छोड़ दी फ़राज़
क्या करें लोग जब खुदा हो जाएँ
(क़बा=ड्रेस)

Thursday, 15 August 2013

Vm Bechain

मिल गई आज़ादी अब मुख्तलिफ सविंधान लिखूंगा
जा महोब्बत तिरा कभी नही गुणगान लिखूंगा

अंग्रेजो से भी बदतर निकला तेरा व्यवहार
तारीख में तुझे सौ टका बेइमान लिखूंगा

जान गया खूबसुरती के पीछे की बद्सुरती
कैसा रहा तुम्हारा सब दीन ईमान लिखूंगा

कैसी थी तेरी सोच लोग खुद समझ जाएंगे
केवल तेरा नाम जब मैं पाकिस्तान लिखूंगा

जूनून मकसद रखना किसी के इश्क का नही
माने तो नौजवानों को आहवान लिखूंगा

जमीन पर झूठ फरेब मक्कारी बढ़ गई ज्यादा
इसीलिए नही झुकता कभी आसमान लिखूंगा

तसल्ली रख थोड़ी सी बुरा दौर गुजरने दे
लिए किस किसने बेचैन सभी इंतिहान लिखूंगा

via-  (bhanu)

Friday, 9 August 2013

व्रत

एक बात समझ नहीं आती की हिंदुस्तान में सारा व्रत पत्निया ही पति एक लिए क्यों रखती है , पति पत्नी के लिए कोई व्रत क्यों नहीं रखता !

एक भी व्रत बनाया ही नहीं गया है जो पति पत्नी के लिए रख सके ! कम से कम एक व्रत तो ऐसा होता की अगर पति न रखे तो पत्नी जी के दो-चार बाल ही झड जाते ! फिर पता चलता की भगवान का भय क्या होता है !
 बेचारा आदमी हर वक्त डरा हुआ महसूस करता है की बीबी जी ने अगर किसी पुरानी छोटी मोटी बात का खुन्नस निकालने के लिए व्रत तोड़ दिया , और भगवान जी ने बात को दिल पर ले लिया तो बन्दा तो मुफ्त में गया अपनी जान से !

एक है करवा चौथ का व्रत साल भर जो पत्नी पति को जीने नहीं देती एक करवा चौथ का व्रत साला मरने भी नहीं देता ,
अब मान लीजये बीबी करवा चौथ के दिन भोजन पानी ले के बीबी बैठ जाय और कहे की नेक्लेश दिल्वाव या मैं खाना खाती हूँ , अब मरता क्या न करता , कुछ हज़ार के लिए बांदा जान का रिस्क तो नहीं ले सकता !
ऐसा खूबसूरत चांस पुरुष को भी तो मिलना चाहिए !

Thursday, 8 August 2013

कैसे ????

याद हमारी उसको भी जब आ जाती होगी ,
फिर कैसे वो खुद को समझाते होगे    ..... !! ?

युही बैठे बैठे जब खयालो में खो जाती होगी ,
फिर कैसे खुद को वो बहलाती होगी ..... !!?


सावन की रिम-झिम जब आग लगाती होगी ,
वो कैसे फिर मन की उलझन को सुलझाती होगी !!?

पायल की रूंन झुंन जब नाम मेरे दुहराती होगी ,
फिर कैसे वो खुद को मानती होगी .... !!?

अपने साजन के बाहों में छुप कर तो  वो सो जाती होगी ,
फिर दर्पण में खुद से नज़रे कैसे मिलाती होगी ....!!?

याद हमारी उसको भी जब आ जाती होगी ,
फिर कैसे वो खुद को समझाते होगे    ..... !! ?


Monday, 5 August 2013

चुनाव चिन्ह



'चुनाव चिह्न' का बहुत बड़ा महत्त्व होता है। हर चिन्ह जनता के लिए संदेश देता है। वह पार्टी, नेता और उसकी नियति का घोषणा-पत्र होता है, जिसे गाहे-बगाहे लोग पढ़ अथवा समझ पाते हैं। बाकी लोग तो बस औपचारिकता निभाते हैं। अपने वोट की बलि उस पर चढ़ाते हैं।

'कमल का फूल-
यह भक्ति का प्रतीक है, धर्म का प्रतीक है। कमल का फूल कीचड़ में खिलता है। इसके माध्यम से नेता कहता ह,ै कि तुम सब कीचड़ की तरह ही हमारे लिए रहोगे और हम चुनाव जीतकर कमल की तरह खिलकर मुस्कराएँगे और देश में कीचड़ ही कीचड़ फैलाएँगे।



हाथ का 'पंजा' - भी अपना संदेश देता है और नेताओं की नियति का बयान करता है। यदि पंजे को जिताओगे तो पाँच वषरें तक लगातार चाँटे खाओगे। पूरी ताकत हमारे हाथों में होगी और तुम सदा पछताओगे। पंजे की मार कौन झेल पाएगा, जो जिताएगा, वही सताया जाएगा।


'हाथी' का निशान खाने का प्रतीक है। हाथी जिस तरह फल-फूल, पेड़-पौधे खाता है, उसी तरह नेता भी जीतकर देश को खाएगा और पाँच वर्षों में सब कुछ पचा जाएगा। यदि कोई इसके खिलाफ आवाज उठाएगा, तो हाथी बौरा जाएगा और सूँड़ से उठा-उठाकर सबको पटखनी लगाएगा। हाथी सिर्फ अपने नेता को पीठ पर बैठाएगा और जनता को कुचलता हुआ चला जाएगा।


'साइकिल' का निशान भी अद्भुत है। साइकिल को जो जिताएगा, वह घनचक्कर बन जाएगा। पहिए की तरह नचाया जाएगा। साइकिल की तरह देश को भी नेता पंक्चर कर जाएगा।


'लालटेन' का निशान भी कुछ बताता है। नेता के चरित्र को स्पष्ट रुप से समझाता है। जिस तरह लालटेन धीरे-धीरे घासलेट पी जाती है, उसी तरह लालटेन के निशान वाला नेता पूरे देश को पी जाएगा और जनता को पता भी नहीं चल पाएगा। उजाले में लालटेन जलाएगा और अँधेरे में बुझाएँगा। जो बचेगा, उस पर घासलेट डालकर आग लगाएगा।
 
धनुष-बाण वाला नेता किसी को जीवित नहीं छोड़ेगा। एक-एक को निशाना बनाएगा और अपना तीर सबके दिल में उतारेगा। विकास को धनुष-बाण पर रखकर नर्क तक पहुँचाएगा और स्वयं स्वर्गलोक का आनन्द उठाएगा।

'ताला-चाभी' का निशान चोट्टे नेताओं से बचने का संकेत देता है। यदि इसे जिताओगे तो बहुत पछताओगे। दिमाग का ताला बंद करके चाभी आतंकियों के हवाले कर दी जाएगी। तालाबंद कंपनियों की तरह देश भी रोयेगा, किन्तु ताला खुल नहीं पाएगा।
 
'हँसियां' का निशान काटने का प्रतीक है। जिस तरह किसान फसल काटता है, अन्न खाता है उसी तरह नेता वोटों की फसल काटेगा और पूरे देश को खायेगा। यदि थोड़ा-बहुत रह जायेगा तो बेच आएगा।



इस चुनावी महासंग्राम में जनता हर तरफ से मारी ही जाएगी। देश का चीरहरण होगा और नेता दुर्योधन की तरह खिलखिलाएगा। कोई कृष्ण जनता की लाज बचाने न आएगा। वोट कितना भी समझ-बूझकर दो, अन्त में राज्य धृतराष्ट्र ही चलायेंगे।