Thursday, 5 September 2013

दिवस

हम फेसबुकिय प्राणी किसी भी दिवस को बड़ी धूम धाम से मनाते है !

कई बार तो बिना ये जाने की अमुख दिवस की क्या महत्ता है क्यों मनाया जाता है बिना जाने भी मना लेते है ! ये मान के चलते है चार लोग कह रहे है तो होगा ही  , जबकि उन चार लोगो में तीन लोग तो अपने ही जैसे है , पाचवा अपन भी हो लिए !

कभी कभी तो जोश में किसी के मरण दिन की भी शुभकामना दे डालते है , " जाती न पूछो साधू की " के तर्ज़ पर किसी धर्म संप्रदाय का दिवस हो हम पीछे नहीं रहते विस करने में ! अब नेट पेक पर जो खर्चा होना था हो ही लिया अब मुफ्त की शुभकामना की संपत्ति जितनी लुटा सको क्या फर्क पड़ता है !

वैसे ही आज कोचिग क्लास में डिस्काउंट पर अडमिसन लेने वाले भी शिक्षक दिवस मना रहे है , भैया अब गुरु शिष्य का रिश्ता रहा कहा , अब तो कस्टमर का रिश्ता बन गया है !

विश्व  पर्यावरण दिवस - अच्छा एक दिन में क्या उखाड लेगे !
विश्व जनसँख्या दिवस - पूरा विश्व जनता है हम भारतीय का दिन रात के मेहनत जो मुक्काम बनाया है वो कोई एक दिन में तो नहीं तोड़ सकता !

फादर्स डे , मदर डे - का फंडा तो आज तक समझ नहीं आया , मुझे लगता है अग्रेजो ने ये इसलिए बनाया क्योकि उन्हें तो अपने ओरिजनल मा बाप का पता रहता नहीं होगा तो उस दिन की जरुरत पड़ी होगी ताकि उन्हें खोज कर मिल सके !

एक कमाल का डे दिया अग्रेजो ने -
प्रेमी प्रेमिका दिवस - जो हर साल नए प्रेम के साथ मनाया जा सकता है !
इसी का देसी रूप ठीक नो महीने बाद आता है चिल्रेंस डे -

ये भी विकट प्रश्न है नेहरु जी के जन्मदिन को बच्चा दिवस क्यों मानते है ? अब बच्चो से कौन प्यार नहीं करता !
खैर अपना क्या ?


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