Tuesday, 28 May 2013

प्यार की भाषा

इकोनॉमिकस पर बात करनी हो तो इंग्लिश में करिये !

राजनीती पै बात करनी हो तो हिंदी में करिये !

मुहब्बत पर बात करनी हो तो उर्दू में करिये !

अगर उर्दू में गर्लफ्रेंड को " कातिल " कह दे तो वो खुश हो जायगी , वही हिंदी में " हत्यारन " या इंग्लिश में "MUDRER " कह दे तो बेडा गर्क  समझो गयी भैस पानी में !

हुल्लड मुरादाबादी का शेर है :

हमारे प्यार की चिठ्ठी तुम्हारे बाप ने खोली , २
हमारा सर न बच पता अगर उर्दू उन्हें आती !!!!!

भला आदमी

समाज का एक लुप्तप्राय प्राणी है "भला आदमी " ! इसके बारे में अकसर कहा जाता है बेचारा भला आदमी ,
ये बेचारा इसलिए होता है क्योकि इसके पास कोई चारा नहीं होता और भला आदमी बन जाता है ! इसके सामने किसी की हिम्मत नहीं होती की इसे गलत आदमी बता दे !मेरी राय  में तो मिस यूनिवर्स की तरह मिस्‍टर भला अथवा मिस्‍टर जेन्‍टलमैन प्रतियोगिता होना चाहिए !

आइये नज़र डालते है कुछ भले आदमी पर !

भले होने के अनेक कारण हैं। पहला कारण तो मेरी आर्थिक विषमता है। ये एक अभिशाप हो सकता है पर स्थिति दयनीय होने से भलेपन का तमगा तो लग ही जाता है !धनाढ्‌य का भला बने रहना कठिन है , गरीब होने का ये फायदा है आचरण में शुद्धता बनी रहती है !हलाकि गरीबी की सीमारेखा के नीचे वालों के तो नखरे ही न्‍यारे हैं। दो रूपये किलो का गेहूँ और तीन रूपये का चावल खाकर मद में चूर हैं।


मौटे तौर पर मेरे भले होने का दूसरा कारण शारीरिक रूप से कमजोर होना भी है , भुजा में ताकत आज के युग में परम आवश्यक है !जो अच्छे से अच्छा च्वनप्राश खा कर भी शारीरिक रूप से संपन्न नहीं हो पता उसके निरीहता को  अंत में भले मानुष का नाम दे दिया जाता है !कभी कभी तो किसी की शारीरिक संरचना ही ऐसी होती है जिसे देखते ही भला आदमी घोषित कर दिया जाता है !



भले आदमी बनने की विवशताएँ कुछ भी हो सकती हैं, लेकिन इसमें मुझे कोई बुराई नजर नहीं आती। अब भला रूप मेरी तो हर प्रकार से सहायता करता है। मैं शालीनता को तहेदिल से अपनाये हुए हूँ, सबसे अच्‍छा व्‍यवहार रखता हूँ, मीठा बोलता हूँ, तो मेरे काम भी बन ही जाते हैं। जब काम बन जाता है, उल्‍लू सीधा हो जाता है तो भला बने रहने में भला आपत्ति क्‍या है ? मौहल्‍ले में सब मेरा सम्‍मान करते हैं, ऐसा मुझे लगता है।  भले आदमी की अपनी मुसीबतें हो सकती हैं, लेकिन यह इमेज बनाने के बहुत काम आता है। महिलायें मानती हैं कि भला आदमी है, इससे बात करने में कोई हर्ज नहीं है। इसलिए इस क्षेत्र में थोड़ा-बहुत स्‍कोप मुझे कई बार आशा की किरण की तरह कौंधता दिखाई देता है।
चाहे जो हो, भलापन मैं छोड़ूँगा नहीं। किसी तरह गिनीज बुक में मेरा नाम दर्ज भले आदमी के रूप में हो जाये, इसकी जुगाड़ में मैं आजकल लगा हुआ हूँ। भला आदमी खोजने मैं जाऊँगा नहीं, क्‍योंकि दूसरा मिल गया तो मुझसे भला न कोय' का अर्थ क्‍या रह जायेगा।


इसे सरकारी संरक्षण की आवश्यकता है , वृहत पैमाने पर इसका शिकार किया जा रहा है

फेसबुक फेक्ट

फेसबुक फेक्ट :-

अगर आपके किसी फ्रेंड ( लड़का ) के फ्रेंड लिस्ट में अचानक ७७ फ्रेंड से २४ फ्रेंड हो जाय तो समझ जाये की उसे कुछ दिनों के लिए ही सही लाइफ टाइम वाली गर्ल फ्रेंड मिल गयी है !


अगर आपकी कोई फेसबुक फ्रेंड (लड़की ) बिना किसी वजह के लाइक कमेन्ट के बाबजूद अन फ्रेंड कर दे तो उसका बुरा नहीं मानना चाहिए ! उसके लिए २ मिनट का मौन रख सकते है !
मतलब समझ लीजये की उस लक्ष्मीबाई के लक्ष्मी और बाई अलग होने वाले है ! यानि की शादी होने वाली है !

पार्टी का समर्थन

२०१४ के चुनाव में किस पार्टी को सत्ता में देखना चाहेगे :-

१) काग्रेस - वैसे कठपुतली का खेल तो पिछले कई वर्षों से देख ही रहे है ! अब तो युवराज का राजतिलक भी हो गया , इमोसनल ड्रामा तो याद ही होगा , पुरे देश को रुलाने के बाद माँ सोनिया भी रोई थी ! घोटालों का रेकोर्ड तो बन ही चूका है , महगाई के क्या कहने , मेरे ख्याल से तो अब किसी दूसरी पार्टी को चांस मिलना चाहिए !( घोटाले का )


२) आम आदमी पार्टी :- नवोदित पार्टी है पर केजरीवाल जी बढ़िया काम कर रहे है , पब्लिक को  फूल ऑन इंटरनेट कर रहे है , लाइट,केमरा,एक्शन ऊपर से डॉ, कुमार विश्वास का फ्री शो ,समझ सकते है कितना अच्छा काम है वरना डॉ कुमार महगे कवी है एक एक शो के लाख -लाख रूपये लेते है !

केजरीवाल जी को तो कुछ दिन खुलाशा ही करने दे !

केजरीवाल जी का बड़ा ऐह्शान होगा अगर एक खुलासा और कर दे की राहुल जी युवा अब तक रहेगे और उनकी शादी क्यों नहीं हो रही !

३ ) भारतीय जनता पार्टी :- अटल जी के बाद मोदी जी को प्रधान मंत्री का दावेदार बनाया है , अपनी घर गृहस्ती तो बसी नहीं ये छेड़े देश चलायगे , बड़े खतरनाक लोग है विकास की बात करते है , राम का नाम लेते है आतंकवादी है आतंकवादी(भगवा आतंकवाद ) तभी तो शांति चाहते है !

मेरे मानो हमरे लालू भैया को सत्ता दे दो , मेहनती आदमी है वरना आप ही बताये ९-९ बच्चे पैदा करना .,पलना कोई बच्चो का काम है !

पुरे भारत को राबड़ी जी के साथ मिल कर बिहार बना देगे , फिर लोग कमाने के लिऐ विदेश जाया करेगे , कितना फायदा होगा देश की डॉलर में कमाई होगी डॉलर में !!!!

( यहाँ मेरे व्य्व्क्तिगत सोच पर व्यंग लिखने की कोशिश की गयी है , किसी व्यक्ति या पार्टी की भावना को ठेस पहुचने की कतई कोशिश नहीं है !)

प्यारी चवन्नी

मनमोहन के राज में , हमारी प्यारी , राजदुलारी , चवन्नी जाती रही , हमारी आँखों के सामने वो दिन आ गए , जब दादा जी हमे चवन्नी दिया करते थे और हम भाग के जाते थे उसकी टॉफी लेने, वो चवन्नी पूरा दिन बना देती थी बचपन में ||



इस देश में तो वैसे भी चवन्नी बड़ी फेमस रही है , जब भी कोई बड़ा आदमी बनता है या उसकी पहुँच बड़े लोगो तक हो जाती है तो यही कहा जाता है कि भाई इसकी तो चवन्नी चलती है , लेकिन अब तो वो दिन भी गए, अब तो ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी , कहने का मतलब है अब ना चवन्नी है ना ही चवन्नी चलेगी |

वैसे भी मनमोहन के राज में किसी कि चल भी नहीं रही है, ना तो विपक्ष कि , ना ही जनता कि , ना ही बाबा कि और ना ही अन्ना कि बस चल रही है तो सिर्फ मेडम कि ||



खेर बात चवन्नी कि करे तो ही बेहतर है , क्यूंकि आज कल उसे कोई पूछ भी नहीं रहा था सो सरकार ने उसे समाप्त करना ही उचित समझा , वैसे भी जब से कांग्रेस सत्ता में आई हैं ठीक इन्द्रा गाँधी के समय से, उदारीकरण और विकसित राष्ट्र बनाने के चक्कर में चवन्नी का अवमूल्यन होता रहा है , और जब से हमारे अर्थशास्त्री साहब प्रधान मंत्री बने है तब से तो महंगाई कि ऐसी मार पड़ी है कि चवन्नी अगर आप भिकारी को भी दो , तो वो भी आप को दो बात सुना देगा ||

इस देश कि विडंबना है कि इस देश में आम हिन्दुस्तानी चवन्नी से कुछ भी नहीं खरीद सकता , वहीँ आम इंडियन लोग पांच पैसे , दस पैसे , चवन्नी में कम्पनियों के शेयर खरीद पा रहे है , इस देश में हिंदुस्तान और इंडिया के बीच खायी बढती जा रही है , और चवन्नी का दुखद अंत इस बात का एक और संकेत है ||



खेर चवन्नी तो सरकार ने बंद कि है लेकिन पिछले कुछ सालो से अठन्नी , रुपया सब गायब हो चला है , और सरकार कि जन विरोधी नीतियाँ इन्हें भी एक दिन बंद कर देगी , और हमारे जेहन में रह जायेगी सिर्फ यादें ||

Thursday, 23 May 2013

IPL

बरेकिंग न्यूज :-
“IPL का फईनल मैच फिक्स्ड है “.
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जी हाँ विश्श्नीय सूत्रों से पता चला है , IPL का फईनल कौन जिंतने वाला है ये पहले से फिक्सड हो चूका है !
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श्री संत , बिंदु , साक्षी और भी जिनके नाम पुलिस सपोर्ट फिक्सिंग में ले रही है ये तो बस निमित मात्र है , असली खिलाडी तो कोई और ही है वो जो सर्वशक्तिमान है !
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जी हाँ मैं ईश्वर , खुदा , भगवान की बात कर रहा हूँ जिसने पूरी दुनिया में सारी चीजों को फिक्स कर रखा है !

एक शम वाइफ के नाम



एक शाम वाइफ के नाम . ओब्यसली मेरी नहीं होगी क्योकि मेरे अभी तक दिन खराब हुए नहीं है दोस्त की वाइफ साथ थी ! और वाइफ के मामले में अपना नजरिया साफ़ है वाईफ किसी की भी मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूँ !

दोस्त के मामले में तो अपनी ही समझता हूँ , समझू क्यों नहीं दोस्त की माँ माँ सामान , बहन बहन सामान , पिताजी, भाई , भाभी सब सामान तो फिर बीबी भाभी कैसे हो गयी !  बीबी ही कहलानी चाहिए , इस मुद्दे को संसद में उठाने वाला हूँ !

मैं ठहरा व्यंग लिखने वाला इस बात का सब को एहसान भी मानना चाहिए मुझे कबिता नहीं आती फिर भी  कबिताई नहीं करता हूँ ! मगर  कबिता खुद सामने आ जाय तो बहकना लाजमी है ! दोषी मौसम भी है , बरसात की भी आज ही होनी थी पर अफसोश उन्हें भीगते देख लेते तो मौसम ही बन जाता !

उनकी हरी साडी तो कयामत ही समझो ग्रीन सिग्नल की फील देने से  मन में लड्डू नहीं जलेबी तली जा रही थी! रस तो नहीं मगर बाजु वाले का लार जरुर टपक रहा था !
मुलाकात तो मेरी भी पहली ही थी वो भी बगैर दोस्त के ! वो सोफ्ट टच , शरमाना तो बरसात में आग ही लगा रही थी !
दिल को संभालते रहे हर हद्शे पर हम ,
अब क्या करे जब तेरे गेसू बिखर पड़े !!

Tuesday, 21 May 2013

और क्या हाल है



एक राष्ट्रीय प्रश्न है और क्या हाल है जिसका अन्तर्राष्ट्री उत्तर है सब बढ़िया है इसके अतिरिक्त कोई और दूसरा जवाब शायद बना ही नहीँ है । इस प्रश्न के माध्यम से परिचित व्यक्ति अपने कर्तव्य का निर्वाह कर लेता है और दूसरा व्यक्ति भी संक्षिप्त उत्तर देकर अपने उत्तरदायित्व से मुक्त हो लेता है


वास्तव मेँ ना तो पूछने वाले की मँशा ही हाल जानने की होती है और ना ही बताने वाले की । जब आमना सामना हो गए तो पुछ लिए, यह एक परम्परा सी बन गई है ।।

यदि उससे पूछ ही लिया जाय कि भैया अपने हाल बढ़िया करने के लिये आपने क्या नीति अपना रखी है तो शायद ही कोई सँतोषजनक उत्तर मिले और फिर सब लोग यह सोचकर की वार्तालाप लम्बा हो जायेगा विस्तार मेँ पूछते भी नहीँ है क्योँकि सब लोग सब बढ़िया हैइस उत्तर से ही सँतुष्ट हो जाते हैँ कि उनकी आशा के अनुरूप ही उन्हेँ उत्तर मिल गया और दोनोँ अपने अपने रास्ते चल देते हैँ ।

 वैसे पूछने वाला ये भलीभाँति समझता है कि सब बढ़ियाहै कहने वाला झूठ बोल रहा है आज के इस दौर मेँ सब बढ़िया हो ही नहीँ सकता, अगर सब बढ़िया है तो दाल में कुछ काला जरुर है

अक्सर मुझसे भी यह प्रश्न किया जाता रहा है और मैँ भी हमेशा ही सब बढ़िया हैकहकर परम्परा का निर्वाह कर दिया करता था किंतु जब हाल ही मेँ मेरे एक परिचित ने जब इस प्रश्न का पुन: प्रसारण किया गया तो प्रश्नकर्त्ता को यहीँ आशा थी कि मैँसब बढ़ियाहैकहकर अपने दायित्व से मुक्त हो जाऊँगा और हो भी सकता था लेकिन उस दिन सत्यमेव जयतेसिर पर सवार हो गया था और मैनेँ हकीकत बयान कर ही दी ।
मैनेँ मुँह बनाकर उत्तर दिया - हाल तो ठीक नहीँ है
क्योँ क्या हुआ ? उनके ऊपर जैसे बिजली गिर गई थी । उन्हेँ मुझसे ऎसे उत्तर की आशा नहीँ थी । उन्हेँ यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि मेरे भी हाल खराब हो सकते है । जैसे मैँ किसी दूसरे ग्रह का प्राणी हूँ और मेरे हाल बढ़िया के अलावा घटिया हो ही नहीँ सकते ।
 
उसके माथे पर चिंता की लकीरेँ उभर रहीँ थीँ । ये लकीरेँ मेरे बुरे हाल के कारण नहीँ थी बल्कि मेरा हाल क्यूँ बढ़िया नहीँ हैँ यह जानने के लिये कम और उसे कुछ देर तक अपना काम-धाम छोड़कर उसका वर्णन सुनने के लिये रुकना पड़ेगा, इस कारण अधिक थीँ । आज वो फँस गया था । मन ही मन वो पछता रहा था कि हाल क्योँ पूछ लिया , अच्छा भला अपने काम से जा रहा था । ये तो बड़ा बेशर्म किस्म का प्राणी निकला कि अपना हाल बढ़िया नहीँ बता रहा है, खराब बता रहा है । अपने आप को बड़ा सत्यवादी समझता है ।

मैँने क्रमश: को एक ओर धकेलते हुए कहा कुछ नहीँ बाथरूम मेँ फिसल कर हड्डी मे फ्रेक्चर हो गया है ,, डॉक्टर ने चलने फिरने से मना किया है ।
अच्छा ! अरे अरे ! यह तो बहुत बुरा हुआ। उसने खेद प्रकट किया ।
फिर उसने एक सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमेँ बताया गया था कि उसके परिवार या रिश्तेदारोँ मेँ या परिचितोँ मेँ कौन कौन, कब कब और कहाँ कहाँ बाथरूम मेँ फिसलकर अपनी हड्डी तुड़वा चुके हैँ तथा उनका क्या हश्र हुआ था। यदि वह चाहता तो बाथरूम मेँ फिसलने के कारण एवँ हड्डी टूटने की सँभावनाएँविषय पर शोध भी कर सकता था । उसकी याददाश्त तथा फिसलकर हड्डी तुडवाने वालोँ के प्रति उसकी रुचि के बारे मेँ जानकर मैँ उसके इस शौक का प्रशँषक हो गया था। तात्पर्य यह था कि बाथरूम मेँ फिसलकर गिरने की घटना कोई अनोख़ी घटना नहीँ थी इतिहास गवाह था कि हर देश, हर राज्य, हर जिले मुहल्ले तथा परिवार मेँ ये घटना घट चुकी है और लोगोँ की हड्डियाँ टूट चुकीँ हैँ ।
बाकी हाल तो बढ़िया हैँ ना ? उसने फिर पूछा ।

खाने पीने के लाले पड़े है कहे का बढ़िया यार
इस कथन के जबाब में एसी बात कही जो अकसर लोग कहते है किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा लो

उसकी इस बात पर पहले तो मेरा मन हुआ कि उसकी हत्या कर दूँ फिर इस परम वाक्य का यही अर्थ निकलता है कि मैँ अभी तक किसी बुरे डॉक्टर को ही दिखाता रहा हूँ तथा मैँ किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाना ही नहीँ चाहता हूँ ।

वो इस वाक्य को बोलकर मुझसे छुटकारा पाने की कोशिश कर ही रहा था कि मैंने फिर उसे धर लिया और उससे ही पूछा यहाँ अच्छा डॉक्टर कौन है ? आपको तो जानकारी होगी क्योँकि आप तो हड्डी तुड़वाने वालोँ के सम्पर्क मेँ रह चुके हैँ ।
वह बगलेँ झाँकने लगा । उसे इस प्रश्न की भी आशा नहीँ थी । उसे तो इलाज के इस महायज्ञ मेँ  बस अपनी आहुति ही देनी थी ।

अच्छा चलता हूँयह कहकर वह अपना स्कूटर स्टार्ट करने लगा किंतु चलते चलते फिर एक भारी भूल कर बैठा। परम्परा के अनुसार वह जाते जाते कह उठा और कोई काम हो तो बताना
मैँ इसी वाक्य की प्रतीक्षा कर रहा था ।
हाँ यार काम तो है। बडी मेहरबानी होगी यदि तुम होटल से टिफिन रोज़ ऑफिस जाते समय  यहाँ पहुँचा दो और शाम को वापस जाते समय खाली टिफिन वहाँ पहुँचा देना । तुम्हेँ परेशानी तो होगी पर . . . .।
उसने ना चाहते हुए भी बुरा सा मुँह बनाकर हाँ पहुँचा दूँगाइसमेँ परेशानी की क्या बात हैकह ही दिया । जाने क्यूँ उसकी आवाज़ कुछ भर्रा रही थी ।
दो तीन दिन तक तो टिफिन समय पर आता रहा, लेकिन वह कुछ बात नहीँ करता था चुपचाप दे कर चल देता था तथा और अब क्या हाल हैजैसा भी कुछ बोलता नहीँ था । फिर तीसरे दिन उसका फोन आया कि वह किसी रिश्तेदार की शादी मेँ बाहर जा रहा है इसलिये कुछ दिनोँ तक टिफिन पहुँचाने का कार्य नहीँ कर पायेगा आप कोई दूसरा इंतज़ाम कर लीजिये ।
मेरे घर आने वाले मेरे मित्र जब जब भी यह वाक्य कहते थे कि कोई काम हो तो बतानामैँ उन्हेँ उनकी इच्छा की कद्र करते हुए काम बता दिया करता था । किसी से दूध मँगाता तो किसी से सब्जी, तो किसी से दवाईयाँ ।

सबके रिश्तेदारोँ की शादियाँ एक साथ ही आ गईँ हैँ । अब यदि कोई मिलने आता भी है तो बाकी लोग उसको पहले से ही सावधान कर देते हैँ वहाँ जाकर और क्या हाल हैँ ? या कोई काम हो तो बतानाबिलकुल भी नहीँ कहना, नहीँ तो फँस जाओगे ।