Friday, 17 May 2013

ख्वाबो में हसीना



आज कल देख रहा हूँ की मेरे ख्वाबो में कोई हसीनाये नहीं आ रही है ! सी बी आई लगाउगा , जाँच कमिटी बीठाउगा, जंतर मनतर पर धरना दुगा ,प्रदर्शन करुगा , भूख हरताल पर बैठ जाउगा , केंडल जलाउगा , आर टी आई ( सुचना का अधिकार ) से पता लगाउगा की आखिर मेरे ख्वाबो में नहीं आती तो जाती कहा है , ये मेरे मौलिक अधिकारों का हनन है खामोश नहीं रह सकता ! एक ख्वाबो का ही तो आसरा है उसे भी कैसे खतम हो जाने दू !

कही सरीफ लड़कियो को रात में घर से नहीं निकलना चहिये इस बात को ज्यादा सीरियसली तो नहीं ले लिया , वैसे भी मेरे ख्वाबो में आके कोई सरिफो वाली हरकत तो करती नहीं थी जो अचानक सराफत जाग गयी , वो ख्वोबो में आके नींद हराम कर देती थी पर अपन चैन से तो सोते थे !

या फिर रिसेसन की मार पड़ गयी है एक एक को कईयो के खाबो में जाना होता हो , कई तो कईयों को बुला लेते है ! फिर वही इन्तजार है ...
मेरा नंबर कब आयगा

मेरे खाबो में आने से तेरा क्या बिगड जायगा ,
मेरा दिल बहल जायगा और तेरा भी सैर हो जायगा !!!

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