आज
कल देख रहा हूँ की मेरे ख्वाबो में कोई हसीनाये नहीं आ रही है ! सी बी आई लगाउगा ,
जाँच कमिटी बीठाउगा, जंतर मनतर पर धरना दुगा ,प्रदर्शन करुगा , भूख हरताल पर बैठ
जाउगा , केंडल जलाउगा , आर टी आई ( सुचना का अधिकार ) से पता लगाउगा की आखिर मेरे
ख्वाबो में नहीं आती तो जाती कहा है , ये मेरे मौलिक अधिकारों का हनन है खामोश
नहीं रह सकता ! एक ख्वाबो का ही तो आसरा है उसे भी कैसे खतम हो जाने दू !
कही
सरीफ लड़कियो को रात में घर से नहीं निकलना चहिये इस बात को ज्यादा सीरियसली तो
नहीं ले लिया , वैसे भी मेरे ख्वाबो में आके कोई सरिफो वाली हरकत तो करती नहीं थी
जो अचानक सराफत जाग गयी , वो ख्वोबो में आके नींद हराम कर देती थी पर अपन चैन से
तो सोते थे !
या
फिर रिसेसन की मार पड़ गयी है एक एक को कईयो के खाबो में जाना होता हो , कई तो
कईयों को बुला लेते है ! फिर वही इन्तजार है ...
“ मेरा नंबर कब आयगा “
मेरे
खाबो में आने से तेरा क्या बिगड जायगा ,
मेरा
दिल बहल जायगा और तेरा भी सैर हो जायगा !!!
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