Thursday, 23 May 2013

एक शम वाइफ के नाम



एक शाम वाइफ के नाम . ओब्यसली मेरी नहीं होगी क्योकि मेरे अभी तक दिन खराब हुए नहीं है दोस्त की वाइफ साथ थी ! और वाइफ के मामले में अपना नजरिया साफ़ है वाईफ किसी की भी मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूँ !

दोस्त के मामले में तो अपनी ही समझता हूँ , समझू क्यों नहीं दोस्त की माँ माँ सामान , बहन बहन सामान , पिताजी, भाई , भाभी सब सामान तो फिर बीबी भाभी कैसे हो गयी !  बीबी ही कहलानी चाहिए , इस मुद्दे को संसद में उठाने वाला हूँ !

मैं ठहरा व्यंग लिखने वाला इस बात का सब को एहसान भी मानना चाहिए मुझे कबिता नहीं आती फिर भी  कबिताई नहीं करता हूँ ! मगर  कबिता खुद सामने आ जाय तो बहकना लाजमी है ! दोषी मौसम भी है , बरसात की भी आज ही होनी थी पर अफसोश उन्हें भीगते देख लेते तो मौसम ही बन जाता !

उनकी हरी साडी तो कयामत ही समझो ग्रीन सिग्नल की फील देने से  मन में लड्डू नहीं जलेबी तली जा रही थी! रस तो नहीं मगर बाजु वाले का लार जरुर टपक रहा था !
मुलाकात तो मेरी भी पहली ही थी वो भी बगैर दोस्त के ! वो सोफ्ट टच , शरमाना तो बरसात में आग ही लगा रही थी !
दिल को संभालते रहे हर हद्शे पर हम ,
अब क्या करे जब तेरे गेसू बिखर पड़े !!

No comments:

Post a Comment