"उनको देख कर चेहरे
पर रौनक क्या आ गयी लोगो ने समझा चलो बीमार का हाल अच्छा है " ये किसी शायर का किसी
बीमार के साथ किया गया बेहद गटिया मजाक है , सर दर्द से फटा जा रहा हो और नैतिकता निभाने के चक्कर में जरा सा मुस्करा दिए तो हाल अच्छा कैसे हो गया ,
एक तो बीमार होते ही हाल पूछने लोग इस तहर आते है जैसे सदियों से इस मौके की तलाश में हो , घर कोई दाशनिक स्थल या मुजियम बन जाता है, बीमार अन्टिक पीस.....
आते ही पूछते है तबियत कैसी है , जी बढ़िया बेड पर लेट कर तो बस टाइम पास कर रहा हूँ , जितने लोग उतने घरेलु नुश्खे दादी वाली ,,,, पता नहीं इतनी खतरनाक दादी किसकी थी जो बुखार से लेकर ओपन हार्ट सर्जरी तक का इलाज बता कर गयी है , मैं भी असमान से तो टपका नहीं पर मेरी दादी ने कभी कुछ नहीं बताया ,,,,,,
आपके बिना बजट वाली चाय की चुस्की लेते हुए कहेगे आज कल बीमारी का क्या है , किसी को कुछ भी हो जाता वो अपने नरेश को यु ही पेट में दर्द हुआ और दो दिनों में ही चलबसा बेचारा ,,,,, बीमार बेड पर पड़े पड़े सोचते रहता है क्या पता अब मेरा भी बेड पर से उठाना हो भी या न हो ???
इसी लिए शायद पूरानी फिल्मो में डॉक्टर बीमार को कही दूर पहाड़ो पर जाने की सलाह देते होगे की कोई डराने वाला शुभचिंतक वहां न होगे तो बीमार खुद ही ठीक हो जायेगा !
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