हिंदू, जैन, बौद्ध, यहूदि, ईसाई, इस्लाम और सिख को बहुत से लोग धर्म मानते हैं। इन सबके अपने
अलग-अलग धार्मिक ग्रंथ भी हैं। धर्म ग्रंथों में सचमुच ही धर्म की
बाते हैं? पढ़ने पर पता
चलता है कि इतिहास है, नैतिकता है, राजनीति है, युद्ध है
और ईश्वर तथा व्यक्ति विशेष का
गुणगान। क्यों नहीं हम इसे किताबी धर्म कहें? जैसे कहते भी हैं कि यह सब किताबी बातें हैं
एक मित्र में कहा घर्म पर
कुछ लिखू , तो शुरुआत भगवत गीता के श्लोक से करता हूँ !!
अध्धाय ३का श्लोक ३५
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः
परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥
भावार्थ :
अच्छी प्रकार आचरण
में लाए हुए दूसरे के धर्म से गुण रहित भी अपना धर्म अति उत्तम है। अपने धर्म
में तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरे का धर्म भय को देने वाला है॥॥
हमने सुना था कि बिल्ली की धर्म की किताब में लिखा था कि जिस दिन
आसमान से चूहों की बरसात होगी उस दिन
धरती पर स्वर्ग का साम्राज्य स्थापित हो जाएगा। बिल्ली के सपने में चूहे दिखने का मतलब है कि आज का दिन शुभ
है। हो सकता है कि शेर के धर्म की किताब
को सबसे महान माना जाता हो। जंगल बुक के बारे में सभी जानते होंगे।
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