कुछ
लोग फेसबुक पर 4999 फ्रेंड हो जाने पर खुद को सेलेब्रिटी
समझने लगते है , तो हम जैसे मुर्ख तो उन्हें नाली के कीड़े , बरसात में ठर्र ठर्र
करने वाले मेढक नज़र आयेगे ही ,,,,,
देश,
समाज , धर्म की कुछ बड़ी बड़ी शब्दों का इतेमाल करके , कुछ कॉपी पेस्ट मार कर , बिना
पूरा पोस्ट पढ़े like करने वालो के कुछ like को देख कर खुद को ओस्कर विनर राईटर महशुस
करते है
,
उन्हें
हम जैसा तुच्छ इंसान भला क्या समझा सकता है ....
कही
कभी पढ़ा था ,,” जो मुर्ख है उससे कही ज्यादा खतरनाक होते है पढ़े
लिखे मुर्ख “
“क्योकि वो बात को अपनी तरह से समझते है “
उन्हें
ये कैसे समझया जाय की समाज सामाजिक नियमों से चलता है न की नियमों को तोड कर , देश
हमसे है न की किसी नेता से , धर्म किसी दूसरे धर्म की बुराई करना नहीं सिखाता
.................
खैर
, तुमसे पहले जो इस कुर्सी पर था ,
उसे भी अपने खुदा होने का इतना ही गुरुर था ,,,,,,,,,,,
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