Wednesday, 15 May 2013

रुदाली



एक प्रोफेशन होता है रुदाली का, इसका काम होता है- घणे प्रोफेशनल तरीके से रोना। किसी की मौत पर उसके परिजन, मित्रजन बहुत दुखी हो सकते हैं, पर जैसा दुख का प्रदर्शन रुदाली कर सकती है, वह परिजनों के बूते की बात नहीं है।

रुदालियां दुखी हों ही, ये सवाल निरर्थक है, चीत्कार-रुदन उनका प्रोफेशन है।
भारतीय राजनीती में नेता का भी रॉल कुछ वैसा ही है , "कोई दिल्ली वालो के दुःख में खाना पीना छोर के बैठा है ",,(केजरीवाल)
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किसी की मां रोती है "(राहुल) , " कोई खास धर्म का हिमायती है "(मुलायम) ," कोई खास जाती का हिमायती है " (मायावती ), कोई बिशेष राज्य का दर्जा माग रहा है " ,(नितीश) , " कोई बिहारी को अपने राज्य ( जो किसी के बाप की जागीर नहीं ) भागने पर तुला है "(राज ) , एक पार्टी ने कहा कि श्रीलंका को पड़ोसी मानने से इनकार करो। , "कोई एक राज्य में जीत का डंका पिटे जा रहा है "( मोदी ) हमारे लालू जी भी २० सालो तक सरकार बनाते रहे वो कितना जन हितेषी थे पता है .............

जी पहले बताया तो था-रुदालियां दुखी हों ही, ये सवाल निरर्थक है, चीत्कार-रुदन उनका प्रोफेशन है।

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