किसी को भी लिखी गयी बातों में अपनी कहानी नज़र आये तो मैं
इसका जिम्मेदार नहीं , इसके जिम्मेदार आप और आपकी उम्र होगी !!
अभी मैं उम्र की उस दहलीज पर खड़ा हूँ जहां ये जवानी साथ छोड़
कर भागी रही है और बुढ़ापा अपनी ओर खीच रहा है , इंसान उस लकीर पर तब तक खड़ा रहना
चाहता है जब तक खड़ा रह सके ! ये रस्सा कस्सी जारी है ! सफ़ेद होते बलों को मेहदी से
रंगा जाता है , चेहरे पर पड रही लकीरों को दाढ़ी मुछो से छुपाया जाता है ! आस पड़ोस
के जवान होते बच्चो को देख कर नए नए शब्द मुहाबरे सिखने की कोशिश की जा रही है !
हम तो खुद को
स्मार्ट समझने की गलती भी नहीं करते क्योकि इस स्मार्टनेस को देख कर आस पड़ोस के
बच्चे ठहाका लगा सकते है , नवयुवतिया ये सोचने पर विवश हो सकती है की आखिर “अंकल को हुआ क्या है ?”
बस ब्रह्म को कोश सकते है की हाय हम अभी जवान क्यों न हुए ?
इतनी आज़ादी इतना खुलापन हमारे जवानी में तो न था ! हमारे समय में तो कन्याए अपनी
दुनिया चोटी में बांध कर रखती थी मनो चोटी खुली तो भूकंप आ जायगा !
एक चीज़ जो उम्र के साथ सबसे ज्यादा बढ़ी है वो है “इगो “ ! गलती से भी किसी
ने जिसपर फ़िदा है ( यूँ तो हर पाचवी पर फ़िदा हो जाते है ) टेढ़ी बात की , भाव नहीं
दिया , या अंकल कह के निकल गयी तो लगी इगो में आग ! और आग लग गई तो लग गयी फुक
मारने से किसी का भला हुआ है क्या ?
अपना तो अब कुछ नहीं हो सकता !! आपमें से कोई बच सकता है बच
के बताये !!!!!!!!!!! बेहतर तो होगा बड़े मिया तैयारी कर लो , अभी से टारगेट सेट कर
लो !!!!
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