Thursday, 20 November 2014

बेरुखी पर शायरी

उसकी बेरुखी पर जी चाहता है ,
चार शायरी हम भी पेल दे ग़ालिब !

अर्ज़ है

उसकी बेरुखी पर जी चाहता है ,
चार शायरी हम भी पेल दे ग़ालिब !

फिर सोचता हूँ जाने दो क्यों बिलावजह खोपड़ी खपाए !!!!

मोर्निग वाक

मोर्निग वाक में स्वक्ष हवा मिलती है या नहीं ये तो पता नहीं
सबेरे सबेरे नहाई धोयी लडकियों को देख कर मन स्वक्ष जरुर हो जाता है

"दुनिया के पतियो, एक हो जाओ।''

कुछ हास्यरस का लेख समझकर मेरे इस मार्मिक निबंध को भी हंसी में दरगुज़र करना चाहें,पर मैं एकदम गंभीर भाव से कहता हूं कि ऐसा करना मेरे साथ नहीं, मेरी महान पति-बिरादरी के साथ भी अन्याय का कारण होगा।
सबकी सुनवाई है, पति गरीब की नहीं।देखिए, मालिक के मुकाबले में आज मजदूर को शह दी जाती है, सवर्ण के मुकाबले में अवर्ण तरज़ीह पाता है और गोरों के मुकाबले दुनिया की सहानुभूति कालों के पक्ष में तो हो सकती है, लेकिन पत्नी के मुकाबले में कोई भी निष्पक्ष न्यायाधीश बेचारे पति की हालत पर विचार करने को तैयार नहीं है।
घर में पत्नी के आते ही एक ओर मां, बहन और भाभी की तरफ से खुलेआम जोरू का गुलाम कहना आरंभ कर दिया है। पुरुषो को यह तसल्ली भी नहीं कि कम-से-कम घरवालों की इस घोषणा से श्रीमतीजी को तो प्रसन्नता होगी ही। उलटा उनका आरोप यह होता है कि हम मां, बहनों और भावजों के सामने भीगी बिल्ली बन जाते है ! मां कहती है कि लड़का हाथ से निकल गया, बहन कहती है भाभी ने भाई की चोटी कतर ली।लेकिन पत्नी का कहना होता है कि तुम दूध पीते बच्चे तो नहीं, जो अभी भी तुम्हें मां के आंचल की ओट चाहिए।
पतियों के जुल्म के दिन तो हवा हुए। अगर हमें मानवता की रक्षा करनी है तो पहले सब काम छोड़कर पत्नियों के जुल्मों से असहाय पतियों की रक्षा करनी होगी।आप न जाइए यू.एन.ओ., न बैठाइए जांच कमीशन, न कीजिए पंच फैसला, खुद ही अपनी-अपनी अक्ल पर थोड़ा ज़ोर डालकर सहानुभूति से इस मसले पर विचार कीजिए, तो मेरी बात को सच पाइएगा।
तनख्वाह लाकर सीधे पहले घर में देनी है,
धोबी, कैंटीन और रेस्तरां के बिल सब वाहियात हैं।
रात को नौ बजे सोने और सुबह छः बजे उठने की मुझे सख्त ताकीद होती है।
ज्यादा चाय पीने, देर से घर लौटने और कभी सिनेमा-थियेटर का ज़िंक्र करने पर तो खास तौर की सजाएं निश्चित होती है !
किस-किस प्रकार के और किन-किन लोगों से दोस्ती रखनी है, कैसे-कैसे लोगों के घर जाना है और किन-किन को घर बुलाना है।
अब ज़िंदगी किसकी खराब हुई है, इसका फैसला आप खुद करें। खुदा के लिए इस प्रश्न को वर्ग-संघर्ष का, बिरादरी का या अपने मान-अपमान अथवा स्वार्थों और हितों का न बना दें। यह भी सोचें कि पति भी आख़िर मनुष्य है। भगवान ने उसे भी दिल और दिमाग दिया है। इस नई रोशनी ने उसमें भी तमन्नाएं भर दी हैं। वह भी दूसरों की तरह न्याय का हकदार है।
अगर आपने घर में ही इस मसले को हल नहीं किया तो वह दिन दूर नहीं जब पति लोग पत्नियों के दमन के विरुद्ध बगावत कर देंगे और पत्नियों की इस मीठी नादिरशाही को ख़त्म करने के लिए उनका नारा होगा, "दुनिया के पतियो, एक हो जाओ।''

पंखा चलाना चाहिए या नहीं ।

अक्टूबर नवम्बर के महीने में अपनी स्थिति पहले प्यार में धोखा खाए लोग जैसी हो गयी है ।
रात कश्मकश में कट जाती है पंखा चलाना चाहिए या नहीं ।
कल तक जिस पंखे से हवा न दे पाने की शिकायत थी वो भी सबसे कम में हवा तेज़ दे रही है ।
और पंखा बंद कर दो तो मच्छर कटते है । कम्बल तान लो गर्मी लगती है । गर्मी से बचने के लिए पैर बहार निकालो तो फिर मच्छर टूट पड़ते है ।
पूरी रात छुपन छुपाई खेलने में निकल जाती है ।

कुछ समझ में नहीं आता कोई बस इतना बता दे इस मौसम में पंखा चलाना चाहिए या नहीं ।

हनीमून

हनीमून के बारे में सोच रहा था , हनीमून से मेरा परिचय बहुत बचपन में 3-4 साल की उम्र में ही हो गया था जब चाचा जी की शादी हुई वो हनीमून मानाने जा रहे थे तो मैं भी जिद पर अड़ गया की मैं भी जाउगा हनीमून मंनाने !
माँ ने प्यार से समझया की अच्छे बच्चे हनीमून नहीं मानते ! और फिर मुझे बहलाने हनुमान जी के मंदिर ले जाया गया , तभी से मैं भी जनता हूँ की हनुमान जी हनीमून विरोधी है !
हलाकि उनके भक्त और पुजारी के बीच अब इस मामले में मतभेद नज़र आता है इसकी वजह महिला भक्त है जब महिला भक्त हनुमान जी के दर्शन को आती है इस बीच पुजारी उनके दर्शन करने में लग जाते है !

खैर बात हनीमून की हो रही थी तो ये संबेधानिक रूप से शादी के बाद मनाया जाता है ! और अगर शादी एक जीवन का अंत है तो हनीमून की जगह कश्मीर से बेहतर क्या होगी क्युकी कश्मीर के लिए किसी ने कहा है "अगर धरती पर अगर कही जन्नत है तो यहीं है"

कश्मीर में आतंकवाद का एक कारण ये भी हो सकता है की सब लोग वहां हनीमून मानाने पहुच जाते है ! वहां के लोगो को लगता होगा की सब ने इसे हनीमून का अड्डा बना दिया है जिससे धरती नापाक हो रही है और इसी चक्कर में कश्मीर को पाक बनाना चाहते हो !
वैसे आतकवाद और शादी में कोई बहुत ज्यादा अंतर भी नहीं होता ! शादी के कुछ दिन बात से धर में भी विष्फोट हमले दह्सतगर्दी शुरु हो ही जानी है फिर तो घर का माहोल भी कश्मीर सा हो जाना है तब मना लो हनीमून !

Tuesday, 18 November 2014

पहला सफ़ेद बाल

आज पहिला सफ़ेद बाल दिखा कान के पास काले बालो के बीच झाकते रजत तार ने सहसा मन को जिक्झोर दिया !
ऐसा लगा पार्क के घूमते हुए अचानक झाड़ी से शेर निकल आया हो !
अपने कान्हा को दृदय से लगाये राधा को अपने बाप के दर्शन हो जाय !

रोज आत्म रीती से आईने में घुघराले काले केशो के देख कर सवार कर  प्रसन्न होता था !पर आज यह सफ़ेद बाल कान में फूस फुसा उठा " भाई मेरे एक बात कांफिडेंस में कहू अपनी दूकान अब समेटना शुरू कर दो !

तभी से दुखी हूँ ज्ञानी कहेगे जो आवाश्यम्भावी है उसे होने पर क्या दुःख !  मौत तो निश्चित है तो क्या जीवन भर समसान में अपनी चिता रचते रहे ! वो क्या कम ज्ञानी थे जो मरणासन्न लक्ष्मण को गोद में रख कर विलाप कर रहे थे !
दुःख है पर दुखी नहीं हूँ मैं मुझे गुस्सा है आईने पर वैसे तो यह बड़ा दयालु है हमेशा मुझे मेरा चेहरा सुधार कर दिखता रहा है आज अचानक क्रूर कैसे हो  क्या एक बाल को छुपा नहीं सकता था ! अगर यह न दिखता तो कौन  सा इसकी ईमानदारी पर कलंक लग जाता !
मगर आईने का क्या दोष बाल तो अपना सफ़ेद हुआ है जिसे सर पर रखा अपने शारीर का रस पिलाया वो धोखा दे गया !
उखाड़ तो दुगा इसे पर किले में सुरंग बन गयी तो दुसमन को आते देर नहीं लगेगी दुसमन को अपने सर पर बिठाये रखना होगा  मालूम है कुछ ही दिनों में ये सभी वफादार बालो को भी अपनी ओर कर लेगा !

मैंने देखा है सफ़ेद बाल के आते ही लोगहिसाब लगाने लगते है की जीवन में अब तक क्या किया क्या पाया क्या जमा किया ! जीवन का हिसाब लगाना गलत है बेईमानी है व्यर्थ है ! बालो की जड़ बहुत गहरी नहीं होती ह्रदय से नहीं उगता यह सतही है ! यौवन सिर्फ काले बालो से नहीं होता ! यौवन नवीन भाव , नवीन विचार को ग्रहण करने की तत्परता का नाम है !यौवन सहस उत्साह निर्भयता और खतरों से भरी जिंदगी का नाम है !
यौवन लीक से बच निकलने की इच्छा का नाम है ! सबसे ऊपर बेहिचक बेबकुफिया करने का नाम यौवन है ! मैं बेबकुफिया करता हूँ ! कोई जरुरत नहीं है हिसाब करने की बाल सफ़ेद होते है तो क्या !

यह सब मैं किसी दुसरे को नहीं कह रहा अपने आप को समझा रहा हूँ किसी दुसरे से कोई भय नहीं है मेरे बाल सफेद हो जाने से किसी का क्या बिगड़ेगा पर मन तो अपना है इसे तो समझा पड़ेगा भैया आल इस वेल ! तू परेशान मत हो ऐसा भी क्या हो गया और अगर तू ढीला नहीं होता तो क्या बिगड़ने वाला है !