Thursday, 20 November 2014

हनीमून

हनीमून के बारे में सोच रहा था , हनीमून से मेरा परिचय बहुत बचपन में 3-4 साल की उम्र में ही हो गया था जब चाचा जी की शादी हुई वो हनीमून मानाने जा रहे थे तो मैं भी जिद पर अड़ गया की मैं भी जाउगा हनीमून मंनाने !
माँ ने प्यार से समझया की अच्छे बच्चे हनीमून नहीं मानते ! और फिर मुझे बहलाने हनुमान जी के मंदिर ले जाया गया , तभी से मैं भी जनता हूँ की हनुमान जी हनीमून विरोधी है !
हलाकि उनके भक्त और पुजारी के बीच अब इस मामले में मतभेद नज़र आता है इसकी वजह महिला भक्त है जब महिला भक्त हनुमान जी के दर्शन को आती है इस बीच पुजारी उनके दर्शन करने में लग जाते है !

खैर बात हनीमून की हो रही थी तो ये संबेधानिक रूप से शादी के बाद मनाया जाता है ! और अगर शादी एक जीवन का अंत है तो हनीमून की जगह कश्मीर से बेहतर क्या होगी क्युकी कश्मीर के लिए किसी ने कहा है "अगर धरती पर अगर कही जन्नत है तो यहीं है"

कश्मीर में आतंकवाद का एक कारण ये भी हो सकता है की सब लोग वहां हनीमून मानाने पहुच जाते है ! वहां के लोगो को लगता होगा की सब ने इसे हनीमून का अड्डा बना दिया है जिससे धरती नापाक हो रही है और इसी चक्कर में कश्मीर को पाक बनाना चाहते हो !
वैसे आतकवाद और शादी में कोई बहुत ज्यादा अंतर भी नहीं होता ! शादी के कुछ दिन बात से धर में भी विष्फोट हमले दह्सतगर्दी शुरु हो ही जानी है फिर तो घर का माहोल भी कश्मीर सा हो जाना है तब मना लो हनीमून !

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