Tuesday, 17 December 2013

खुदा में भगवान

Fb par jab dharm ki bate hoti hai.. Man wichlit ho jata hai..
Mere gaw ke bahar ek Masjid hai jiske aage bachpan se hi utni hi sradha ke sath sar jukaya hai jitni ki gaw ke hanuman mandir ke samne..

jab jab azan ki awaz kano me gayi usi tarh hath jore hai jase sankh ki awaz par...

Mere hindu hone par mujhe sak nahi par kya karu bachpan ki adat hai KUDA me bhi mujhe HANUMAN, KRISHN , OR SHIV hi nazar aate hai...

घरजमाई

मेरे दिमाग में एक धमाकेदार, धांसू आईडिया आया है , क्यों न अपने कुवारेपन को भजा लू ! और अपने दूसरे बाप यानि ससुर के शरण में घरजमाई बन कर चला जाऊ ! इससे मेरे बाप को भी कुछ दिनों की शांति मिलेगी , और जमाई कितना भी निखट्टू , नाकारा हो ससुर के लिए तो सदा आदरणीय रहा है ! कुछ अपवाद हो सकते है पर उसपर कौन दिमाग लगाये , ससुर की प्रजाति तो गाय की तहर होती है जो खाने को दूध भी दे और अपना बच्चा यानि बेटी भी !

इसलिए वधु चाहिए सामाजिक कार्यक्रम के तहत अखबार में इश्तेहार देने की सोच रहा हूँ ! उसका नमूना :-

सस्ता एवं टिकाऊ घरजमाई उपलब्ध है !!

क्षत्रिय राजपूत सुन्दर (एक झूठ तो भगवान भी माफ़ करता है) , सुशील ,गुणकारी , गृहकार्य में दक्ष (मगर करेगा एक भी नहीं ), वर को घरजमाई बनाने हेतु स्वजातीय कन्या के पिता संपर्क करे ! इकलोती पुत्री के पिता को प्रार्थमिकता दी जायगी !

आवेदन करता आवेदन के साथ :-
१) अपने आय का लेखा जोखा इन्कमे टेक्स द्वरा मान्यता प्राप्त या साल भर का अकाउंट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से अभिप्रमाणित कर संलिप्त करे !
२) आवेदन के साथ Rs-151 का डी डी लगाये ! चाहे तो RTGS के माध्यम से पेमेंट कर चलान संलिप्त करे ! BOI A/C no- 320120003221 (IFSC Code:- RBJC4225)

Note:- चलान या डी डी अनिवार्य है , अन्यथा बिना सुचना के आवेदन रद्द कर डी जयगी !!!!!

तेरा चर्चा

हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते !
तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते !!

कुछ तो हम खुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी !
और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते !!

अज़मतें अपने चरागों की बचाने के लिए !
हम किसी घर में उजाला नहीं होने देते !!

मुझको थकने नहीं देता ये ज़ुरूरतों का पहाड़ !
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते !!

न्यूज चैनल

Newes chinal bhi dekhna chahiye...!

Sunne layak newes aaye na aaye dekhne layak jarur rahta..!

Sabhi cinal par surdriya naha dho ke freser wresar laga ke , kya bolti hai pata nahi par mast bolti hai.....!!

सेव

एक आदमी पुलिस नौकरी की इंटरव्यू देने गया !
अफसर ने पहला सबाल किया , मान लो ५० रु किलो सेब है तो तुम १०० ग्राम का कितना दोगे !
आदमी - पुलिस की नौकरी करुगा फिर भी १०० ग्राम सेब के भी पैसे दुगा लानत है !
अफसर - समझे नहीं चोलो मैं खरीदने जाऊ तो कितना दुगा !
आदमी - आप तो साहब हो आप क्यों दोगे कितने पेटी भिजवाने है आप तो बस हुकुम करो !
अफसर - अगर तुम्हारी बीबी ख़रीदे तो !
आदमी - अपनी बीबी को मैं जनता हूँ , अगर सौ ग्राम ख़रीदेगी तो सौ ग्राम का ही पूछेगी भाव !
अफसर - अगर तुम्हारा बाप खरीदे तो !
आदमी- मेरा बाप सेब क्यों खरीदेगा दांत नहीं है उनके वो तो बस केला खरीद सकते है !
अफसर - तुम्हारा भाई तो होगा वो तो खरीद सकता है , वो कितने देगा मेरे बाप !
आदमी - अपने भाई को कभी सेब खरीदते देखा नहीं वो तो पौवा खरीदता है !
अफसर - ओके ओके तुम्हारा कोई जिगरी दोस्त तो होगा वो पुलिस भी नहीं होगा वो तो खरीद सकता है !
आदमी - है न जिगरी दोस्त ! पर वो अगर सेब खरीदेगा तो दुकानदार को ५ रु देगा और कहेगा इतने के दे दो !
अफसर - हद हो यार !
आमदी - हद तो आप कर रहे हो साहब नौकरी दोगे एक को और सौ ग्राम सेब खरीदने में लगा दिया मेरा पूरा खानदान !
अफसर - सर नोचते हुए अच्चा अगर आम आदमी ख़रीदे तो !
आदमी - साहब जी आजकल आम आदमी सेब कहा खरीद पता है , सेब तो खास आदमी ही खरीदते है !
अफसर - अब तो बता दो खास आदमी ख़रीदे तो कितना चुकय्गा !
आदमी - अब जो खास आदमी है वो भला सेब खरीदने खुद क्यों जायगा जायगे उसके नौकर चाकर , चलो आपकी बात मान कर खुद चला भी गया तो क्या सौ ग्राम खरीद कर आयगा ! मान लिया आपकी अंतिम इच्छा समझ कर खरीद भी लिया तो उसका हिसाब तो देगे उसके सी . ए , पी ए !

अफसर झल्लाते हुए तुमने सीधे सबाल को कहा पहुचा दिया पर जबाब नहीं दिया !
आदमी - साहब आपही इस सबाल के पीछे पड़े हो मुझे तो सुरु से ही ये सबाल पसंद नहीं !

सारे फसाद की जड है सेब ...
अगर सेब न होता तो न आदम होते न हौवा , न हम होते न आप , न किलो होता न पौवा ! कहते है एक सेब आदमी को बीमारी से दूर करता है ! बीमारी से दूर रहता है तो आदमी तंदुरुस्त रहता है , तंदुरुस्त रहता है तो मेहनत करता है , मेहनत करता है तो तारकी करता है , तरक्की करता है तो शादी हो जाती है , शादी हो जाती है तो दुनिया भर का टेंशन !

लो और खाव सेब ......!!!!!

सुरक्षा के उपाय

Puchle dino Bihar ke Munger distic Jamalpur railway station ke pas naksali hamle RPFke 4 jawan sahid ho gaye... or unka hathiyar chin liya gaya !!

Rail prasasan ne eski kadi ninda karte hue surksha ke thosh kadam uthaye hai...!!

Rail par chalne wale scort team se banduk wapas le kar ek ek lathi thma diya gaya hai..

Sabzi bechne wali par hi jab jawazi dekhana hai to lathi kafi hai... esse shayad bina ek bhi naksali ko mare sahid hue jawano ki bahaduri ka koi galat arth na lagaye...

Chinta mat kariye ho raha hai bharat nirman.....

Delhi me AAP

Delhi me AAP party ki esthi wasi hai jase ki..

Ladka apni premika ko samandar kinaye baith kar julfo me hath ferte hue uski mang chand taro se bharne ki bat kar chuka ho..
Or basp ke shadi ke liye razi na hone par kahe chalo bhag kar sadi kar lete hai...... !!!@@

कोल्ड काफी

यु तो मैं शकल से ही ढावे पर खाने वाला नज़र आता हूँ ! पर मेरी भी इच्छा हुई कॉफी पीने की तो मैं रेस्टोरेंट चला गया !
कई कारण है की मैं रेस्टोरेंट में नहीं जाता !
एक तो जाते ही बड़ा सा चिठ्ठा थमा देते है वो भी अग्रेजी में लिखी हुई ! और उसमे भी अजीब अजीब आइटम के नाम लिखे होते है ! एक तो आज तक सस्पेंस है की पनीर बटर मसाला में घी डालते है की मख्खन ! मुगी के इतने टाइप होते है की कनफुजिया जाते है ! अपन तो मुर्गी की मुंडी मचोरो छिलो पकाव खाव में यकी रखने वालो में है !
दूसरी की कुर्सी टेबुल ए सी पर इतना खर्चा किया दो चार बल्ब लगा देते तो कितना खर्चा हो जाता ! इतने में एक भाई साब शायद अपनी गर्लफ्रेंड के साथ पधारे और आते ही कोने का टेबल पकड़ा तब बल्ब का लोजिक मेरे समझ में आया !
पर उन भाई साब पर तरस आ रहा था क्योकि उनकी गर्लफ्रेंड शायद अपने साथ अपनी भी गर्लफ्रेंड को साथ ले कर आई थी ! माले मुफ्त दिले बेरहम लगाव कप पे कप ! बेचारे डबल खचा करके भी हाथ मलते ही रह गए ! अपना नहीं यार !!!!
मेरी कॉफी आ गयी मैं तो उसे जल्दी से पीने लगा की कही उन भाई साब और बहन जी के चक्कर में मेरी ठंढी हो गयी तो कोल्ड कॉफी का रेटे 40 रु था !!!!

गुप्त त्याग

काग्रेस के बिरोधी भी इस बात को मानते है की देश के लिए राजीव गाँधी की सोच अच्छी थी ! उन्होंने देश में कम्पुटर लाया अब जुकर्वार्ग फेसबुक लेकर आ गए इसके लिए वो तो जिम्मेदार नहीं है ! ये अलग बात है इसका परिणाम उनके ही बीबी बच्छे को झेलना पडा !

उनके सुपुत्र श्री राहुल गांघी के देश के प्रति गुप्त त्याग को तो कोई समझ नहीं पाया ! जनसँख्या नियंत्रण में बिफल रही सरकार को समलैंगिक सम्बन्ध से उम्मीद की एक किरण नज़र आई भी थी तो सुप्रीम कोर्ट ने उसपर भी पानी फेर दिया !

फिर तो काग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ पर ही अमल करना होगा !

सरकार करना चाहती है तो कोई न कोई न कोई अपना पैर बिच में दल देता है फिर कहते है सरकार कुछ करती नहीं !

स्त्री

कबिता कहानियो में ऐसा दर्शाया जाता है दुनिया में जो भी सुन्दर है ;श्रेष्ठकर है वो स्त्री ही है ! ये तो एक योजना थी की ये बेबकुफ़ है इसे और बनाव ! पर लगता है पासा उल्टा पड गया ! अब ऐसा समझा जाने लगा ! बचपन में एक कहानी पढते थे भेडीया आया भेडीया आया ! वही हो गया है !

"स्त्री प्रकृति की अनुपम् कृति है "
ऐसा कहा जाता है ; पत्नी के रूप में एक एक प्रति (pis) अपनी अपनी सब के पास है कोई दिल पर हाथ रख कर बता दे की उसमे अनुपम क्या है ! वो अनुपम है तो लड़के क्या बाढ़ में बह कर दुनिया में आये है !

मतलब उसे भगवन ने फुर्सत से बनाया है ' लडको को क्या ठेके पर बनवाया है ; की खराब मटेरिअल यूज किया गया है !
शीप सी आंखे नहीं हमारी आँखों में क्या गोटीया बैठाई हुई है !

झील सी आंखे -अब बात बात कभी कभी बिना बात के भी रो रो कर गंगा जमुना बहाने वाली को रोत्लू न कह के झील कह दिया तो इसमे गलत फहमी पालने वाली कोई बात तो है नहीं !

रेशाम से बाल - सर पर जो झाड झाँखर उग आये है उसे रेशाम कह दिया एस रेशम की ओउकत तो तब पता चलती है जब खाने में एक बाल निकल जाय ! वैसे रेशम भी तो एक कीड़े का अवशिष्ट है !

हिरनी सी चाल ; नागन सा बलखाना ; कोयल सी बोली ........ सारे जानवरों वाले लक्षण ले के पता नहीं किस भ्रम में रहती है स्त्री !