Tuesday, 17 December 2013

घरजमाई

मेरे दिमाग में एक धमाकेदार, धांसू आईडिया आया है , क्यों न अपने कुवारेपन को भजा लू ! और अपने दूसरे बाप यानि ससुर के शरण में घरजमाई बन कर चला जाऊ ! इससे मेरे बाप को भी कुछ दिनों की शांति मिलेगी , और जमाई कितना भी निखट्टू , नाकारा हो ससुर के लिए तो सदा आदरणीय रहा है ! कुछ अपवाद हो सकते है पर उसपर कौन दिमाग लगाये , ससुर की प्रजाति तो गाय की तहर होती है जो खाने को दूध भी दे और अपना बच्चा यानि बेटी भी !

इसलिए वधु चाहिए सामाजिक कार्यक्रम के तहत अखबार में इश्तेहार देने की सोच रहा हूँ ! उसका नमूना :-

सस्ता एवं टिकाऊ घरजमाई उपलब्ध है !!

क्षत्रिय राजपूत सुन्दर (एक झूठ तो भगवान भी माफ़ करता है) , सुशील ,गुणकारी , गृहकार्य में दक्ष (मगर करेगा एक भी नहीं ), वर को घरजमाई बनाने हेतु स्वजातीय कन्या के पिता संपर्क करे ! इकलोती पुत्री के पिता को प्रार्थमिकता दी जायगी !

आवेदन करता आवेदन के साथ :-
१) अपने आय का लेखा जोखा इन्कमे टेक्स द्वरा मान्यता प्राप्त या साल भर का अकाउंट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से अभिप्रमाणित कर संलिप्त करे !
२) आवेदन के साथ Rs-151 का डी डी लगाये ! चाहे तो RTGS के माध्यम से पेमेंट कर चलान संलिप्त करे ! BOI A/C no- 320120003221 (IFSC Code:- RBJC4225)

Note:- चलान या डी डी अनिवार्य है , अन्यथा बिना सुचना के आवेदन रद्द कर डी जयगी !!!!!

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