Tuesday, 17 December 2013

तेरा चर्चा

हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते !
तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते !!

कुछ तो हम खुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी !
और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते !!

अज़मतें अपने चरागों की बचाने के लिए !
हम किसी घर में उजाला नहीं होने देते !!

मुझको थकने नहीं देता ये ज़ुरूरतों का पहाड़ !
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते !!

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