कबिता
कहानियो में ऐसा दर्शाया जाता है दुनिया में जो भी सुन्दर है ;श्रेष्ठकर
है वो स्त्री ही है ! ये तो एक योजना थी की ये बेबकुफ़ है इसे और बनाव ! पर
लगता है पासा उल्टा पड गया ! अब ऐसा समझा जाने लगा ! बचपन में एक कहानी
पढते थे भेडीया आया भेडीया आया ! वही हो गया है !
"स्त्री प्रकृति की अनुपम् कृति है "
ऐसा कहा जाता है ; पत्नी के रूप में एक एक प्रति (pis) अपनी अपनी सब के पास है कोई दिल पर हाथ रख कर बता दे की उसमे अनुपम क्या है ! वो अनुपम है तो लड़के क्या बाढ़ में बह कर दुनिया में आये है !
मतलब उसे भगवन ने फुर्सत से बनाया है ' लडको को क्या ठेके पर बनवाया है ; की खराब मटेरिअल यूज किया गया है !
शीप सी आंखे नहीं हमारी आँखों में क्या गोटीया बैठाई हुई है !
झील सी आंखे -अब बात बात कभी कभी बिना बात के भी रो रो कर गंगा जमुना बहाने वाली को रोत्लू न कह के झील कह दिया तो इसमे गलत फहमी पालने वाली कोई बात तो है नहीं !
रेशाम से बाल - सर पर जो झाड झाँखर उग आये है उसे रेशाम कह दिया एस रेशम की ओउकत तो तब पता चलती है जब खाने में एक बाल निकल जाय ! वैसे रेशम भी तो एक कीड़े का अवशिष्ट है !
हिरनी सी चाल ; नागन सा बलखाना ; कोयल सी बोली ........ सारे जानवरों वाले लक्षण ले के पता नहीं किस भ्रम में रहती है स्त्री !
"स्त्री प्रकृति की अनुपम् कृति है "
ऐसा कहा जाता है ; पत्नी के रूप में एक एक प्रति (pis) अपनी अपनी सब के पास है कोई दिल पर हाथ रख कर बता दे की उसमे अनुपम क्या है ! वो अनुपम है तो लड़के क्या बाढ़ में बह कर दुनिया में आये है !
मतलब उसे भगवन ने फुर्सत से बनाया है ' लडको को क्या ठेके पर बनवाया है ; की खराब मटेरिअल यूज किया गया है !
शीप सी आंखे नहीं हमारी आँखों में क्या गोटीया बैठाई हुई है !
झील सी आंखे -अब बात बात कभी कभी बिना बात के भी रो रो कर गंगा जमुना बहाने वाली को रोत्लू न कह के झील कह दिया तो इसमे गलत फहमी पालने वाली कोई बात तो है नहीं !
रेशाम से बाल - सर पर जो झाड झाँखर उग आये है उसे रेशाम कह दिया एस रेशम की ओउकत तो तब पता चलती है जब खाने में एक बाल निकल जाय ! वैसे रेशम भी तो एक कीड़े का अवशिष्ट है !
हिरनी सी चाल ; नागन सा बलखाना ; कोयल सी बोली ........ सारे जानवरों वाले लक्षण ले के पता नहीं किस भ्रम में रहती है स्त्री !
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