Friday, 10 May 2013

राम कथा व्यंग



हे रामचन्द्र जी ! मुझे माफ़ करना मैं तुम्हारे भगतो पर व्यंग करने जा रहा हूँ !!

मित्रों नवरात्रा का समय है आप के अगल बगल रामचरित मानस का पाठ तो हो रहा होगा , फ़िलहाल मेरे पड़ोस में बोहनी हो चूक है !

मुझको समझ नहीं आता जब भोपू का आविष्कार नहीं हुआ होगा तब रामायण पाठ अजान किस तरह की जाती होगी , केन्द्र से १०० मीटर की दुरी तक सभी मकानों के खिडकी दरवाज़े पूरी कुसलता से बंद किये गए होगे , लोग कान में रुई ठूस कर बैठे होगे ,प्रभु तुम्हारे तस्वीर के आगे इतना शोर हो रहा है  क्या तुम्हारा सर दर्द से नहीं फटता ?

कोई पूछने जाए की भैया लौडीस्पिकर क्यों लगा रखा है तो कहेगे सबके कानो में राम कथा जा रही है पुन्य मिलेगा ,यार हमारे पुन्य के लिए तुम क्यों खट रहे हो ! रात के बारह बजे हमें पुन्य नहीं नींद चाहिए भैया !!!

रामायण पाठ का जब इतना महत्व है तो श्री राम ने फालतू में रावण से इतना लंबा युद्ध किया , बानरी सेना की भी जरुरत न थी , अयोध्या से एक दर्जन रामायण पाठ करने वाले बुला कर लंका में अखंड पाठ शुरू करवा देते ! रावण पगला जाता ! दौडा चला आता और निवेदन करता, हे राम ये चिल्लाहटे बंद करो! ये रही तुम्हारी सीता !!
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ऐसा नहीं की मैं रामायण पाठ का बिरोधी हूँ ! रामचरितमानस इतना लोकप्रिय और प्रसिद्ध ग्रन्थ है क्योकि इसमें राम कथा के माध्यम से सामाजिक रहन सहन और स्वच्छ जीवन के असंख्य फार्मूले भरे पड़े है ! कोई कम फसा तो फलाना चोपाई सुना कर मार्गदर्शन कर दिया गया !

कितनी अखंड रामायण में हम माइक प्रेम के चलते बालक कांड से उत्तरकांड तक चिल्लाते रहते है ,लेकिन इस तरह के रामायण पाठ से कुछ मिलने वाला नहीं है ,अर्थ समझोगे तो भाव उत्पन्न होगा , भाव उत्पन्न हुआ तो बेडा पर समझये! प्रभु तो भाव के भूखे है कांवेंसिग के नहीं !!!!

प्रभु एक बार और प्रकट हो जाओं ! प्रेस कांफ्रेंस बुलाव और अपने भक्तो से अपील करो की लौडीस्पिकर न लगाये लोगो को तकलीफ होती है !!

बोलो सियावर रामचंद की जय ! पवन सूत हनुमान की जय ! राम कथा समाप्त होती है , सब लोग आरती ले और और और थाली से छूटटे पैसे न उठाये !!!!!!!!!!!!!!  

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