Wednesday, 15 May 2013

फोकटिया



हमें बचपन से पढ़ाया गया है की आवश्यकता अविष्कार की जननी है, परन्तु केवल जननी किसी को पैदा करने के लिए काफी नहीं होती उसके लिए एक जनक की आवश्यकता होती है | और यदि हम इसी विषय पर गहन अध्ययन करें, तो हम पाते हैं की, किसी भी अविष्कार का जनक आलस्य  है और आलस्य रूपी ये जनक तभी आता है जब व्यक्ति पूर्ण रूप से मेरी तरह फ़ोकट हो|


  वैसे तो कई लोग आज फ़ोकट है| परन्तु विडम्बना यह है की, वो स्वयं को फ़ोकट मानने को तैयार नहीं ,परन्तु में ये सिद्ध कर सकता हूँ की, वो भी हम जैसे ही है| क्योंकि जिस तल्लीनता और लगन से आप ये लेख पढ़ रहे है, उससे साफ़ जाहिर होता है की, आप कितने बड़े निठल्ले और घटिया स्तर के पाठक है | अर्थात आप मुझसे बड़े फ़ोकट हे| पर किसी पर कीचड़ उछालना अपनी आदत नहीं, इसलिए मैं तो कहूँगा आप जैसे भी हे बहुत अच्छे  है |  

                    अब मैं मुख्य विषय पर आता हूँ और आपको बताता हूँ की मुझे फ़ोकट बनाने में ईश्वर , प्रकृति और समाज का बहुत बड़ा योगदान है | क्योंकि इश्वर ने मुझे एक दिमाग दिया हे जिससे मेने बहुत सोचा और फिर सोचा तब इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ की मुझे काम नहीं करना चाहिए वरन विचार करना चाहिए,
| कुल मिलाकर मैं यह कहना चाहता हूँ ,कि मैं भले ही आलसी हूँ ,पर काम करने का जज्बा तो रखता हूँ , चाहे वो मैं ना करूँ |तो आओ मिलकर हम राष्ट्रीय फ़ोकट संघ कि स्थापना करें और नित नए विचार एकत्रित करें , क्योंकि यह शाश्वत सत्य ही समाधान निकलता है और आज देश को समाधान की जरुरत है | तो सर्वप्रथम हम मिलकर देश के सम्मुख किसी समस्या को खडा करें | ताकि आने वाली पीढियां उसका समाधान खोजें ,

और अंत मैं यही कहूँगा कि , जब भी राष्ट्रीय फ़ोकट संघ का अधिवेशन हो तो आपसे बाउम्मीद गुजारिश है , कि अध्यक्ष पद के लिए आप मेरा ही नाम प्रशस्त करें | (सुनील पाटीदार)
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