Friday, 10 May 2013

सरकार का इस्ताफा



यह लेख पूर्णत काल्पनिक है किसी को भारत देश से कोई समानता दिखाई देती है तो ये उसकी जिम्मेदारी है !
सब कहते है घोटालों की सीरीज पर सरकार को इस्ताफा देना चाहिए ! अगर घोटालों की वज़ह से सरकार इस्ताफा देने लगी तो हो गया काम , बल्कि होना ये चाहिए को जो मंत्रालय बच गए है वो जल्दी अपने घोटाले की रिपोर्ट आउट करे ,तो लगे की सरकार एक्शन में है !

किसी ने कहा सरकार निकम्मी हो रखी है इस्ताफा होना चाहिए ! ये तो सारा सर इल्जाम है, सरकार निकम्मी बिलकुल नहीं आप ही बताये अगर भ्रष्टाचार हो रहा है तो मतलब  सरकार को निकम्मी नहीं कहा जा सकता है ! मंत्री जी के रिस्तेदार की मुनाफे की बात नहीं है संबिधान ने सब को बराबरी का दर्जा दिया है मतलब मंत्री के रिस्तेदार का विकास हुआ यानि आम आदमी का विकास हुआ !

महगाई से पब्लिक की हालत खराब है इसलिए सरकार से इस्ताफा माँगा जा रहा है ! लो काहे की महगाई , लोग महगा खरीद रहे है तो महगा बिक रहा है !
आप कहोगे महगा खरीदकर खायगे नहीं तो जिन्दा कैसे रहेगे , जिन्दा रहने का मसला अलग है साहब अभी महगाई की बात हो रही है बस महगाई की बात करे , वैसे भी जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ में है कोई क्या कर सकता है !!

फिर भी आप को लगता है सरकार कुछ नहीं कर रही तो चलिए तो हर घोटाली मंत्रालय के एक एक चपरासी को सस्पेंड कर दिया जायेगा,घोटालों – घपलों के  मुख्य आरोपी भी चपरासी ही है यही नेता और अफसरों को चाय पिलाते है , चाय पीकर ही नेता और अफसर इस तरह की हरकत करते है !
अब तो पता चल जायगा न की सरकार कितनी जल्दी कितना एक्शन करती है ! खुश !!!!!!!!!!!

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