पिछले दिनों कई बार
सुनने को मिला “ म “ राशि! तो विचार आया क्यों न इसपर थोडा रिसर्च किया जाए !
विकिपीडिया से
प्राप्त जानकारी के अनुसार :-
“म” राशि के जातक सिंह राशि के होते है ! सिंह (Leo) राशि चक्र की पाचवीं राशि है.और पूर्व दिशा की द्योतक है.इसका चिन्ह
शेर है.इसका विस्तार राशि चक्र के 120 अंश से 150 अंश तक है इसका स्वामी सूर्य है,और इस राशि का तत्व अग्नि है इसके अन्तर्गत मघा और ,पूर्वाफ़ाल्गुनी नक्षत्र
के चारों चरण होते है !
· द्वितीय चरण के मालिक केतु-शुक्र है,जो जातक में सजावटी और सुन्दरता के प्रति भावना को बढाता है.
· तीसरा चरण केतु-बुध के अन्तर्गत आता है,जो जातक में कल्पना करने और हवाई किले बनाने के लिये सोच पैदा करता है,
· चौथा चरण चन्द्र-केतु के अन्तर्गत आता है,जो जातक में की जाने वाली कल्पना शक्ति का
विकास करता है.
· पूर्वाफ़ाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण शुक्र-सूर्य के सानिध्य में जातक को स्वाभाविक
प्रवॄत्तियों की तरफ़ बढाता है.
· दूसरा चरण सुन्दरता का बोध करवाने में सहायक होता है.
· तीसरा चरण सुन्दरता के प्रति मोह देता है और कामुकता की
तरफ़ भेजता है.
· चौथा चरण जातक के द्वारा किये गये वादे को क्रियात्मक रूप
मे बदलने में सहायता करता है.
इस राशि के जातक रसीली
वस्तुओं को पसंद करने वाले होते हैं,कम भोजन करना और खूब घूमना,इनकी आदत होती है,छाती बडी होने के कारण इनमे हिम्मत बहुत अधिक होती
है इस लगन
में जन्म लेने वाला जातक जीवन के पहले दौर मे सुखी,दूसरे में दुखी और अन्तिम अवस्था में पूर्ण सुखी होता है.
सिंह राशि शाही
राशि मानी जा्ती है,सोचना शाही,करना शाही,खाना शाही,और रहना
शाही,इस राशि वाले लोग जुबान
के पक्के होते हैं, वह
जो खाता है वही खायेगा,अन्यथा
भूखा रहना पसंद करेगा,वह आदेश
देना जानता है,किसी का आदेश उसे सहन नही है,जिस किसी से प्रेम करेगा,उसके मरते दम तक निभायेगा,जीवन साथी के प्रति अपने को पूर्ण रूप से
समर्पित रखेगा,अपने व्यक्तिगत
जीवन में किसी का आना इस राशि वाले को कतई पसंद नही है,और सबसे अधिक अपने जीवन साथी के बारे में वह किसी का
दखल पसंद नही कर सकता है,
इस राशि वाले
जातक सुगठित
शरीर के मालिक होते हैं.नॄत्य
करना इनकी आदत होती है,अधिकतर इस राशि वाले या तो बिलकुल स्वस्थ
रहते है,या फ़िर आजीवन बीमार
रहते हैं,जिस वारावरण
में इनको रहना चाहिये,अगर वह न मिले,इनके अभिमान
को कोई ठेस पहुंचाये,या इनके प्रेम मेम कोई बाधा आये,तो यह लोग अपने मानसिक
कारणों से बीमार रहने लगते है,
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