‘Love at
first sight!’ ये जुमला बहुत सुना है, सुनने में ही अच्छा भी लगता है! पर
क्या ऐसा सच में हो सकता है ?
मैं भी मानता हूँ होता होगा , मेरे साथ भी हुआ है कई बार तो
एक ही दिन में दो बार भी हो जाता है , पर इसे प्यार कहते है ये किसी ने बताया नहीं
! हाँ जिसे ऐसी नज़रों से देखते थे वो कुछ बुदबुदाती जरुर थी मुझे तो पक्का यकी था
की वो गाली दे रही है , पर आज विचार आया शायद love you 2 कह रही हो, मैं मुर्ख समझ ही नहीं पाया !
लड़कियों का पहली नज़र में प्यार वाली बात पर क्या राय है
जानना भी जरुरी था , अब किसी लड़की से पूछने की हिम्मत तो है नहीं, न पर्याप्त साधन
है!
तो मैंने अपने आराध्य देव श्री श्री 508 गूगल जी महराज से
प्रार्थना की प्रभु मार्गदर्शन करे ! अन्य इष्ट देवता की तरह गूगल जी भी अपने पर तो
कुछ लेते नहीं तो उन्होंने शोध को आधार पर बताया की महिला पहली नज़र में कुछ निर्णय
नहीं ले पाती, उनके भीतर एक द्वंद्व चलता है, मतलब उन्हें Love at first sight नहीं
होता!
जान कर तसल्ली हुई की गाली ही देती होगी
! फिर ये सबाल उठा ! क्यों नहीं होती? गूगल महराज ने तो no result found.. कह के हाथ खड़े
कर दिए! मेरे हिसाब से कोई महिला भी अद्जेक्ट जबाब नहीं दे पायगी! तो इसपर मेरे
निजी विचार है की ---
प्यार का मामला निश्चत तौर पर दिमाग का
नहीं दिल का है वरना प्यार तक तो ठीक था,पर 80% लोग शादी नहीं करते! कुछ लोग कहते है पुरुषों का दिल बड़ा होता है, वगैरह
वगैरह!
पर मेरा मानना है की महिला का दिल तो पुरुषों से
बड़ा होता है पर दिल के constraction में problem है, महिला का दिल एक खाली
प्लाट है, थोडा अंदर जाके एक हॉल है जिसमे माँ बाप , भाई बहन , दोस्त रिश्तेदार सब
रहते है और गेट पर दरवान लगा रखा है तो एंट्री लेना मुश्किल है !
वही पुरुषों का दिल अपार्टमेंट नुमा
होता है, हर एक के लिए सेपरेट जगह ! पत्नी के लिए under
ground flor (parking) होती है जिससे उसे लगता है दिल
काफी बड़ा है और उसके अलावा कोई और है भी नहीं ! और टॉप पर गर्ल फ्रेंड भी आराम से
रह लेती है !
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