Friday, 10 May 2013

दहेज की नैतिकता



जब कोइ दहेज की बात पर लडको या उसके माता पिता को भला बुरा कहता है तो दिमाग झन्ना उठता है , कानून की बात करे तो कानून ने दहेज नाम हटा कर लड़की को पैत्रिक संपत्ति पर अधिकार देकर दहेज को अधिकारिक जामा पहनाया !!!! ,



रिश्ता बराबर बालो में होता है* , हमारे पिता जो दहेज मांग रहे है वो हमारी आधी संपत्ति से ज्यादा हो तो बोलो , अगले की औकात नहीं तो रास्ता देखे , चिल्लाने की क्या जरुरत है ?


पुराना घिसा पीटा डालोग मारेगे लड़की माँ बाप रिश्ते नाते छोर कर आती है ,टेलीफोन युग में काहे का छोर के आती है, उसके नाते रिस्तो का बिल भी लडको को भरना होता है , नाते रिश्ते तो छोर कर हम भी जाते है रोज़ी-रोटी के चक्कर में , वो तो आते ही हमारे रूम और बेड पर कब्ज़ा कर लेती है , अपने ही घर में हम डरे डरे से घूमते है साहब  ...!!!!!



और क्या है हाँ खाना --- भर थाली खुद तो खाती है चार रोटी किसी  गरीब के लिए बना दिया तो कौन सा पहाड़ तोड देती है यार , बदले में दुनिया भर की डिमांड !!!!!! 



 भेड की चाल चलना बंद करो किसी ने कह दिया गतल है सभी कहने लगे गलत है , गलत है ... प्यार के बदले प्यार हिसाब बराबर , पर मान लो शादी के अगले दिन ही लड़के कुछ गलती करते है तो लड़की कानूनन पति के संपत्ति की अधिकारी है , अगर लड़की की गलती हो तो ?????? और सब ठीक रहा तो क्या हम मरते वक्त दहेज का सामन साथ ले जाते है क्या ?? जिन्दा भी रहे तो उस सामान की छोरो घर के किस सामान पर अपना हक रह जाता है  !!!!

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