एक
सुन्दर कन्या मिल गयी , मैंने कहा देवी जी सुना है आज कल आप के बॉय फ्रेंड का
पोस्ट वेकेंट है मेरे से तो कोई पटती नहीं
आप पट जाव ,ये गारीब दिल से आपको दुआ देगा बाकि खर्च फिफ्टी – फिफ्टी कर लेगे ...
लड़की
बोली ऐसे कैसे पट जाऊ , पहले मेरे हुश्न की तारीफ करके दिखाव , मैंने मन ही मन
सोचा ये अगर आती होती तो अब तक २ -४ मेरे आगे पीछे डोल रही होती ,मगर इस बार मैं
मौका हाथ से जाने देने के मुड में बिलकुल नहीं था , तो मैंने तारीफ कुछ यु की
......
जी
बगुले सी चेहरे का रंग है आपका , भैस सी प्यारी दो आंखे , हथनी की चाल पाई है ,
भालू से है आपके बाल , नागिन सी काया है, कुत्ते की वफादारी है आपमें , कव्वे की
अक्ल ........
इतना
ही कह पाया था की उसने जगली सूअर की तरह मुझ पर आक्रमण कर दिया , बड़ी मुश्किल से
जान बचा कर भगा हूँ ,,
क्या
गलत कहा जी :- हंस कहो या बगुला मतलब तो उजले से है , भैस की आंखे देखिये कई मृग
नयनी पानी भरती नज़र आयगी उसमे, भालू के क्या घने लंबे काले बाल होते है साहब ,
हथनी ने क्या मदमस्त चाल पाई है मोर है क्या उसके सामने , नागिन सी स्लिम कौन है
भला , कुत्ते वफादारी में मिसाल है , कव्वे का अक्ल में कोई सानी नहीं .......
इतनी
बाते किसी लड़की को कौन समझाए , मैं तो खुद को समझा रहा हूँ बेटा तेरा कुछ नहीं हो
सकता , उठा कमंडल चल हरिद्वार ...............................
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