चाहे ठंड का मौसम हो या बरसात के दिन हों या फिर ग्रीष्म ऋतु ही क्यों न हो, बदलना मौसम का काम है , इससे कम से कम नहाने के मामले में मेरे विचार तो नहीं
बदलते !मेरे लिए तो नहाना एक बहुत बड़े पराक्रम का कार्य होता है। लोटे में पानी भर कर सिर पर डालने के
पहले बहुत देर तक बेसुरी आवाज़ में गा गा के हिम्मत जुटानी पड़ती है।
मगर जनाब नहाने
की महिमा बताने
वाले बड़े ही ख़तरनाक लोग हैं। ये लोग अक्सर ग्रुप में काम करते हैं। जैसे ही इन्हें पता चला कि
फलां आदमी नहा कर नहीं आया..लगे उसे मैन्टली टॉर्चर करने।
एक तरफ प्रकृतिवादी कहते हैं कि नेचर से
छेड़छाड़ मत करो, और दूसरी तरफ उसके धरतीपुत्र अपनी अनमोल विल पॉवर, नहा कर वेस्ट करें। पर नहीं हम तो चार डिब्बे
ठंडें पानी के
डालकर ही
गौरवान्वित होंगे।
हम जैसो के लिए
सर्वोतम स्नान है कौवा स्नान ! पूजा-अर्चना के समय आखिर देवी देवताओं को भी एक फूल को पानी में डुबा कर फूल के उस
पानी को देवी देवता की प्रतिमा पर छिड़कते हुए "स्नानं ध्यानं समर्पायामि" कहते हुए
कौवा स्नान ही तो कराया जाता है। यह बात अलग है कि देवी-देवताओं के इस स्नान को कौवा स्नान न कह कर मन्त्र स्नान कह दिया जाता है। पर आप ही
सोचिये क्या नाम बदल देने से काम भी बदल जाता है?
नहाने में आस्था न रखने वाले प्यारे दोस्तों वक़्त आ गया है कि तुम काउंटर अटैक करो।
देश में पानी की कमी के लिए इन नहाने वालों को ज़िम्मेदार ठहराओ। इधर उधर की किसी भी रिपोर्ट का हवाला देकर
बताव की सिर्फ नहाने में 62% पानी की पर्बदी होती है !
और सभी मनुष्य के लिये कौवा स्नान ही सर्वोत्तम स्नान है। बस उँगली
को पानी में डुबाकर निकालिये और उँगली में लगे पानी को "स्नानं ध्यानं समर्पयामि"
कहते हुए अपने शरीर पर छिड़क लीजिये। बस हो गया नहाना।
कौवा स्नान के
फायदेः
- शरीर की गर्मी न निकल पाने की व्याकुलता में आप ठंडई और लस्सी जैसे पौष्टिक चीजों का सेवन अधिक करते हैं जिससे आपको पर्याप्त स्वास्थ्य-लाभ होता है।
- शरीर पर मैल की परत जम जाने के कारण आप अधिक मोटे-ताजे याने कि हृष्ट-पुष्ट नजर आते हैं।
- इत्र-सेंट आदि का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने लगते हैं (भाई आखिर शरीर के दुर्गन्ध को तो किसी न किसी प्रकार से छिपाना भी तो जरूरी है ना!) और नवाब की संज्ञा पाते हैं।
- मन्दिर आदि पवित्र किन्तु गैरजरूरी स्थानों में जाने की जहमत से बचे रहते हैं।
चलते-चलते
"यार, मैंने सुना है कि कई लोग महीनों तक बिना नहाये रह जाते हैं।"
"पता नहीं यार लोग कैसे महीनों तक बिना नहाये रह जाते हैं, यहाँ तो अठारह-बीस दिनों में ही खुजली छूटने लग जाती है।"
"यार, मैंने सुना है कि कई लोग महीनों तक बिना नहाये रह जाते हैं।"
"पता नहीं यार लोग कैसे महीनों तक बिना नहाये रह जाते हैं, यहाँ तो अठारह-बीस दिनों में ही खुजली छूटने लग जाती है।"
जिंदगी को आज़माना
चाहिए !
खुशियों में
मुस्कराना चाहिए !
और जब खुजली सात
दिनों तक न रुके !
तब जाके आदमी को नहा
लेना चाहिए !
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