सबेरे जगा तो सर में
दर्द ने घनी तूफान मचा राखी थी सीधी शब्दों में कहे तो सर दर्द था ! अब मुझे
सहानभूति देने वाला तो कोई है नहीं सहानभूति के मामले में भी आत्मनिर्भर ही होना
पड़ता है ! और कहे भी तो क्या दर्द दिखाई भी तो नहीं देता , दर्द को दिखना चाहिए अब
बुखार होता है तो दीखता है , हड्डी टूटती है तो वो भी दीखता है , खून निकले तो नज़र
आती है फिर दर्द क्यों नहीं दीखता ! ऐसा भी नहीं है जो दीखता नहीं वो होता नहीं !
तो आज दर्द को पकड़ा और उससे कुछ बात चीत की !!!!
मैंने कहा क्यों
दर्द डार्लिंग तुम तो आजकल मुझे भूल ही गयी, आज मेरी याद कैसे आगई , बहुत दिनों बाद
आई हो कहो क्या लोगी चाय या ठंढा ?
दर्द बोली बस मुलाकात
का मुड हुआ चली आई कोई मनाही है क्या !और हाँ मैं कुछ लेती नहीं मैं तो बस देती हूँ !
मैंने कहा जानेमन
शुक्रिया तेरे आने का पर इतना नखरा भी ठीक नहीं , पुराना यार हूँ तुम्हारा थोडा
मुस्करा भी लिया करो ?
दर्द बोली मुझे मजाक
बिलकुल भी पसंद नहीं !
मैं – चलो ये बताव
तुम दिखती क्यों नहीं ?
दर्द – मैं हर जगह
हर तरफ हूँ , दिखने लगी तो लोग जी नहीं पायगे !
मैं – क्या तुम्हे
कभी हसी आती है ?
दर्द – हाँ आता है न
तीसरी बार प्यार में नाकाम आशिक को रोते देख कर बहुत हसी आती है ? फिर उसी की शादी
की सालगिरह पर हसी आती है !
मैं – क्या तुम्हे
दर्द होता है ?
दर्द – जब कोई बच्चा
या गरीबी का मारा कोई भी भूखे पेट सो जाता है तो मुझे रात भर नींद नहीं आती बहुत
दर्द होता है !
मैं – यानि दर्द को
भी तकलीफ होती है ?
दर्द – होती है न जब
तुम जैसा कोई कमीना मुझे भी इंजॉय करना शुरू कर देता है बहुत तकलीफ होती है , तू
मर मैं चली !!!
मैं – रुको रुको और
भी सबाल है , रुको तो सही !
चली गयी !!!!!!
नोट – कमाल की बात
ये है जब लिखना शुरू किये थे तो सर में दर्द थी अब नहीं है , कोई इस बात पर यकी
नहीं करेगा पर कसम से झूठ नहीं कह रहा थी अब नहीं है !
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