मनमोहन
के राज में , हमारी प्यारी , राजदुलारी , चवन्नी जाती रही , हमारी आँखों
के सामने वो दिन आ गए , जब दादा जी हमे चवन्नी दिया करते थे और हम भाग के
जाते थे उसकी टॉफी लेने, वो चवन्नी पूरा दिन बना देती थी बचपन में ||
इस देश में तो वैसे भी चवन्नी बड़ी फेमस रही है , जब भी कोई बड़ा आदमी बनता है या उसकी पहुँच बड़े लोगो तक हो जाती है तो यही कहा जाता है कि भाई इसकी तो चवन्नी चलती है , लेकिन अब तो वो दिन भी गए, अब तो ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी , कहने का मतलब है अब ना चवन्नी है ना ही चवन्नी चलेगी |
वैसे भी मनमोहन के राज में किसी कि चल भी नहीं रही है, ना तो विपक्ष कि , ना ही जनता कि , ना ही बाबा कि और ना ही अन्ना कि बस चल रही है तो सिर्फ मेडम कि ||
खेर बात चवन्नी कि करे तो ही बेहतर है , क्यूंकि आज कल उसे कोई पूछ भी नहीं रहा था सो सरकार ने उसे समाप्त करना ही उचित समझा , वैसे भी जब से कांग्रेस सत्ता में आई हैं ठीक इन्द्रा गाँधी के समय से, उदारीकरण और विकसित राष्ट्र बनाने के चक्कर में चवन्नी का अवमूल्यन होता रहा है , और जब से हमारे अर्थशास्त्री साहब प्रधान मंत्री बने है तब से तो महंगाई कि ऐसी मार पड़ी है कि चवन्नी अगर आप भिकारी को भी दो , तो वो भी आप को दो बात सुना देगा ||
इस देश कि विडंबना है कि इस देश में आम हिन्दुस्तानी चवन्नी से कुछ भी नहीं खरीद सकता , वहीँ आम इंडियन लोग पांच पैसे , दस पैसे , चवन्नी में कम्पनियों के शेयर खरीद पा रहे है , इस देश में हिंदुस्तान और इंडिया के बीच खायी बढती जा रही है , और चवन्नी का दुखद अंत इस बात का एक और संकेत है ||
खेर चवन्नी तो सरकार ने बंद कि है लेकिन पिछले कुछ सालो से अठन्नी , रुपया सब गायब हो चला है , और सरकार कि जन विरोधी नीतियाँ इन्हें भी एक दिन बंद कर देगी , और हमारे जेहन में रह जायेगी सिर्फ यादें ||
इस देश में तो वैसे भी चवन्नी बड़ी फेमस रही है , जब भी कोई बड़ा आदमी बनता है या उसकी पहुँच बड़े लोगो तक हो जाती है तो यही कहा जाता है कि भाई इसकी तो चवन्नी चलती है , लेकिन अब तो वो दिन भी गए, अब तो ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी , कहने का मतलब है अब ना चवन्नी है ना ही चवन्नी चलेगी |
वैसे भी मनमोहन के राज में किसी कि चल भी नहीं रही है, ना तो विपक्ष कि , ना ही जनता कि , ना ही बाबा कि और ना ही अन्ना कि बस चल रही है तो सिर्फ मेडम कि ||
खेर बात चवन्नी कि करे तो ही बेहतर है , क्यूंकि आज कल उसे कोई पूछ भी नहीं रहा था सो सरकार ने उसे समाप्त करना ही उचित समझा , वैसे भी जब से कांग्रेस सत्ता में आई हैं ठीक इन्द्रा गाँधी के समय से, उदारीकरण और विकसित राष्ट्र बनाने के चक्कर में चवन्नी का अवमूल्यन होता रहा है , और जब से हमारे अर्थशास्त्री साहब प्रधान मंत्री बने है तब से तो महंगाई कि ऐसी मार पड़ी है कि चवन्नी अगर आप भिकारी को भी दो , तो वो भी आप को दो बात सुना देगा ||
इस देश कि विडंबना है कि इस देश में आम हिन्दुस्तानी चवन्नी से कुछ भी नहीं खरीद सकता , वहीँ आम इंडियन लोग पांच पैसे , दस पैसे , चवन्नी में कम्पनियों के शेयर खरीद पा रहे है , इस देश में हिंदुस्तान और इंडिया के बीच खायी बढती जा रही है , और चवन्नी का दुखद अंत इस बात का एक और संकेत है ||
खेर चवन्नी तो सरकार ने बंद कि है लेकिन पिछले कुछ सालो से अठन्नी , रुपया सब गायब हो चला है , और सरकार कि जन विरोधी नीतियाँ इन्हें भी एक दिन बंद कर देगी , और हमारे जेहन में रह जायेगी सिर्फ यादें ||
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