Friday, 10 May 2013

दुल्हे राजा



जहा अभी ठहरा हू वो रूम विवाह भवन के बगल में ही है ,तो यहाँ हर रोज किसी का बैंड बजता है , किसी का बैंड बज रहा हो इसमे मुझे कोई ऐतराज नहीं , जिसकी जिंदगी खराब हो वो जाने मुझे तो भैया नींद प्यारी है ! मेरे नींद की बैंड बजती है बस इतनी सी प्रॉब्लम है !

एक दिन के राजा दुल्हेराजा के शान में मैं कोई गुसताखी करू इतनी हिम्मत भी मुझमे नहीं ! बद्दुआ भी नहीं दे सकता बेचारे पर यु ही शनि भरी है और उसपर मैं कौन सी बद्दुआ दू !


अल्लाह उस्ताद बिस्मिल्लाह खान साहब को बहत्तर हूरो से नमाज़े हलाकि ये उस बुज़ुर्ग के लिए सजा से कम नहीं ! एक वही है जो सहनाई लेकर देर तक रोते रहते  है , मरने के बाद भी वही है जो सारे जहाँ के दुःख में रो लेते है ! उनके चुप होते ही रात के सन्नाटे को चीरती महिलाऔ की बेसुरा गाना और खी खी खी बहुत डरावनी और पकाउ लगती  है !

सबेरे दुल्हेराजा अपनी लुटी हुई सल्तनत समेट कर चले जाते है , रह जाते है हम दुआ करते की भगवान उसकी आत्मा की शान्ति दे !!!!

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