Tuesday, 14 May 2013

विवाह संस्कार

विवाह  को अगर थोडा गौर  से सोचा जाय तो " विवाह " , वि + वाह को जोड़ कर बनता है ! और 'वाह ' में छुपी है 'आह ' ! यानि वाह और आह को जो जोड़ता है वो है विवाह ! शादी को शादी के पहले की फीलिंगस " वाह " केटगरी में आता है और बाद की फीलिंग्स " आह " ! वाह के एक्स्पिअरी डेट को लोग जिंदगी भर शादी की शालगिरह के रूप में मानते है !


विवाह संस्कार के प्रक्रियो पर अगर ध्यान दिया जाय तो हम पाते है की :-

शुरुआत  उबटन ( हल्दी ) से होती है ! मछली को फ्राय करने के पहले  के सीन जरा याद कर लीजये ! फिर लडको को शहर में घुमाया जाता है ,यानी आपका  तमासा स्टार्ट हो चूका है बैंड बज चूका है आपका बाजा बजने वाला है !लड़की को लाल जोड़े पहनाये जाते है , "लाल"  सिम्बोल ऑफ डेनजर !

फिर  लड़की को कुछ लोग पकड़ कर लाते है ताकि भागने न पाए ! फिर फंसी जैसी तो नहीं होती पर गले में कुछ डाला जरुर जाता है , लोग तो उसे वरमाला वरमाला कहते है , पर मेरे हिसाब से वो लडके का आखरी चांस होता है भाग सको तो भाग लो ! पर भाग भी  नहीं सकते सामने बाराती बैठे होते है !

यही  से दोस्त और दोस्ती पर से विश्वास उठ जाता है की जिस दोस्त पर जान छिरकते थे इस मुसीबत की घडी में कोई मदद को न आया !

फिर शुरू होता है संस्कृत में घिटिर-पिटिर मतलब तो भगवान जाने ! पर उसमे होता है 'कन्यादान ' दान शब्द तो बस ग़लतफ़हमी के लिए है , यहाँ बस मुसीबत का ट्रांसफर होता है , फिर 'पाणिग्रहण' में नर और मादा एक दूसरे का हाथ पाकड कर जीवन भर एक दूसरे को पानी  पीने -पिलाने की कसम उठाते है ! और सिंदूर द्वारा आफत को रजिस्टर्ड किया जाता है !

फिर आग के सामने आकाश , पाताल , हवा को साक्षी मान कर सात वचनों के साथ सात फेरे लेकर भोला भाला इंसान सात जन्मो के लिए  फेरे में पड़ जाता है ! यहाँ गौर करने वाली बात ये भी है साक्षी क्या क्या है ?
आग जो जलाती है , आकाश जिसे पा नहीं सकते , पाताल जो होता नहीं  , हवा जिसे देखा  नहीं !

तब  और क्या भगवान, बुजुर्ग से जितने आशीर्वाद बटोर सकते है बटोर लीजये क्योकि निकट भविष्य में यही काम आनी है ! और देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान देने में  जुट जाइए !

"शहीदों के मजारो पर जलेगे हर बर्ष दिए !"

कृपया  दो दीऐ से ज्यादा न जलाए ! ( जन हित में जरी परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार )






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