बॉयज अगर आप रोज दाढ़ी नहीं बना रहे है तो आपको आलसी होने के
ख़िताब से नाबजा जा सकता है , हाँ कम से कम मलाइका अरोड़ा , नेहा घूपिया ,
चित्रांगदा सिंह जैसे फ़िल्मी अदाकारा को फोलो करने वाली महिला तो जरुर !
दाढ़ी रखने पर आलसी कहा जाना पुरुषत्व को अपमानित करना नहीं
तो और क्या है ! सेव कब और कितने दिनों में करना है ये कहने का अधिकार किसी को
कैसे हो सकता है ! किसी महिला को तो बिलकुल भी नहीं ! आप खुद अपनी मर्जी के मालिक
है , और मुछ के मामले में तो नो चांस !!!!!!!!!!!!!
अगर पत्नी/गर्लफ्रेंड किस(KISS) में परेशानी का
हवाला देकर क्लीन सेव को मजबूर करती है तो बच्चे पैदा करने में भी असहनीय दर्द और
ढेरो परेशानी होती है तो वो भी छोड़ देगी क्या ? जरा उनसे पूछिए जिनकी मुछ दाढ़ी
कभी नहीं निकलने वाली है उनसे प्यार/शादी
करना चाहेगी ? तो 99 % मुह टेढा कर लेगी , मतलब दाढ़ी मुछ वाले ही
चहिये तो दाढ़ी मुछ से नफरत क्यों ?
इतिहास को देखे तो :-
सिकंदर के समय से क्लीन सेव की परंपरा शुरू हुई , सिकंदर ने
अपने सैनिको को क्लीन सेव रहने की तानाशाही फरमान निकला था !
धर्म की अगर बात करे :-
हिंदू – साधू
महात्मा दाढ़ी रखते थे तो क्या वो आलसी थे !
सीख – गुरु गोबिंद सिंह ने दाढ़ी को सीखो की पहचान कहा !
ईसाई – चित्र और मूर्ति में ईसा मसीह को हमेशा दाढ़ी में ही
दिखाया गया है !
मुसलिम – इस्लाम में गहरी आस्था रखने वाले दाढ़ी रखना पसंद
करते है !
यहूदी – यहूदी धर्म ने दाढ़ी को पवित्रता से जोड़ा जाता है !
सभी धर्मो के अलग अलग बिचार धारा आस्था के बाबजूद दाढ़ी के मामले में सभी एक मत
रखते है !
अगर विज्ञापनों से प्रभावित होकर आप ये सोचते है की दाढ़ी
मुछ मुड लेने से लड़किया मरती है , मरती भी होगी !, तो उस मुर्दे को कितने दिन तक
ढोते रहोगे उसका क्रिया करम कीजये और
कहानी खतम कीजये !
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