Friday, 10 May 2013

ब्लॉग पर होता क्या है यार

मार्क ज़ुकर्वार्ग को प्रणाम !

खुद के महान फेसबूकिये होने के भ्रम ने मुझे ब्लॉग पर लाके खड़ा तो कर दिया पर यहाँ क्या होता है और कैसे होता है ये तो पता नहीं !पर इस भयंकर बेरोजगारी के आलम में  फेसबुक पोस्ट के जुगाड में चोरी के लिए ब्लॉग दर ब्लॉग खाख छानते छानते हम भी ब्लोगर तो बन गए !

फेस बुक पर तो इतने दिनों में यही महसूस हुआ की वो एक छोकरी बाजो का अड्डा है , अपन जैसे बन्दों की वहाँ कोई सुनने वाला है नहीं तो  हम भी क्यों सुनाये भला ! खुद लिखेगे और खुद पढ़ भी लेगे , वाह वाह का क्या है वो भी खुद ही कर लेगे !

यहाँ लगता है इधर उधर से चोरी कर के अपना भेजा खपा के अब तक जितने फालतू के पोस्ट जमा किये है उसे स्टोर करने की अच्छी जगह है ये !

 यहाँ फ्रेंड कैसे बनते है , कोई मुझे देख पा रहा हो तो प्लीज बता दे !

आज तो पहला दिन है आगे देखते है होता है क्या ?

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