Tuesday, 21 May 2013

जून का महीना और गर्मी छुट्टी

जून का महना आने को है , ये महीना बड़ा ही आदरणीय महीना है बच्चो के चेहरे पर गर्मी छुट्टी की खुशी ओह हो हो हो ! सच्छी खुशी किसको कहते है कैसे वो चेहरे से छलकी है सहज देखने को मिलता है !

दूसरा आम का महीना बाल्टी में डाल के आम खाने का मज़ा ही कुछ और होता है , हलाकि अब आम आदमी के बस की बात नहीं है !

चलिए लिए चलते है फ्लैसबैक में  :-

मेरे लिए गर्मी की छुट्टी का अनुभव कोई खास अच्छा नहीं रहा है चुकी मैं शिक्षक का बेटा हूँ , एक तो शिक्षक और मनहुश लगभग प्याय्वाची शब्द ही है तो मेरे साथ तो करेला ऊपर से नीम चढा साथ में मिर्च भी मिली हुई थी  क्योकि पिता श्री अग्रेजी के शिक्षक थे (मतलब है )! और आठवी कक्षा में मेरे क्लास टीचर भी ! और अग्रेजी के मामले में तो बचपन से ही मेरा  हाथ और दिमाग तंग ही रहा है !

पुरे स्कूल में पिता जी की छवि इतिहास के हिटलर और अभी के दौउद के आस पास ही होगी ! पर बता दू ऐसे सिर्फ स्कूल में ही थे , ८थ क्लास तक भी मैं उनके गोद पर चढता था आज ३० साल की उम्र में भी मुझे अगर बुखार हो जाय उनकी गोद में सोना दावा से ज्यादा असर करती है !

तो समझ सकते है मैं जिस प्रयोगशाला से निकला हूँ उसमे लंबी छुट्टियों में शिक्षक बच्चे कुटने की प्रेकटीस घर पर ही करते है ! यूँ तो हर भारतीय बाप बच्चे कुटने के मामले में आत्मनिर्भर होते  है !मतलब बच्चे पीटने के लिए खास वजह की भी आवश्यकता नहीं होती !

और ये ऐसी मान्यता है जो हर बच्चे को उसके बाप से विरासत में मिलती है और यही बच्चा कल बाप बन, बच्चों को पीट इस विरासत को आगे बढ़ाता है।

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