Wednesday, 15 May 2013

वस्त्र प्रेम



नौकरी छोड़ कर बाप की सब्सिडी का खा खा कर मोटा हो गया हूँ ! मोटा होने में परेशानी नहीं है उलटे बन्दा खाते पीते घर का दीखता है ! समस्या ये है की मेरी सारी फूलपैंट ने कमर में फिट होना छोड दिया है ! अचानक हुए इस हमले के लिए मैं तैयार नहीं था , दूसरी बात की उनमे से जादातर खुद की गाढ़ी कमाई के है !

चुकी किसी कन्या ने कभी भाव दिया नहीं तो अपनी कमाई खुद पे खर्च करने के अलावा कोई चारा नहीं था !किसी कन्या ने क्यों भाव नहीं दिया ? ये तो रिसर्च का विषय है , मेरी शकल खराब है या लड़कियों की अकल ! अपनी शक्ल खराब कह नहीं सकता , कह भी दू तो बदलने वाला है नहीं !

खैर मेरे लिए बचत का कोई मतलब था नहीं तो ऐसा नहीं है की यार दोस्तों के साथ रेस्टरो में जाके खर्च करने की कोशिश नहीं की, पर लोग शक के नज़र से देखते थे , अब किस किस को समझते की माना कानून ने मान्यता दे दी है पर मैं वैसा बिलकुल भी नहीं हू !

भावनाओ में बह के मुद्दे से भटक रहा हूँ शायद मुद्दा था फूलपैंट ! समझ में नहीं आ रहा की यु एक साथ सब का परित्याग कैसे कर दू आखिर कई यादे जुडी है उनसे जैसे ये पहली सैलरी की है , ये दूसरी की ......, ये दोस्त की शादी पर खरीदी !

घोर मुसीबत में था समझ नहीं पा रहे है क्या करू तो सोचा चलो फिर से आप सब को ही पकाया जाऐ !!!!!!!!!!!

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