एक मित्र ने कहा तुम कैसे लिख लेते हो हमें भी बताव , हम समझ रहे थे की वो कहना ये चाहते थे की यार तुम लिखते क्यों हो ? मैंने भी “समझारी का सिद्धांत” लगाया !
जी हाँ “समझदारी का सिद्धांत “ यही तो वो सिद्धांत है जिसके आधार पर पत्निया पतियों पर सदियों से राज़ कर रही है ! मतलब अगर कोई न समझ रहा हो तो उसे समझाया जा सकता है पर कोई समझना न चाहे तो कोई समझा ही नहीं सकता , अगर कोई समझाने की कोशिश करे तो उसे तीसरी बात समझा दो !
अगर सामने वाला समझदार होगा तो वो समझ जायेगा इसे न समझाने में ही समझारी है ! आप समझे “ समझदारी के सिद्धांत “ को !
खैर मित्र को मैंने बताया लिखना कौन सी बड़ी बात है , कोई न कोई बात तो हर किसी के मन में आती है बस उसे कुछ अच्छे शब्द देना है , और आप में होनी चाहिए थोडी बेबकूफी , थोडा पागलपन ढेर सारी गलतफहमी की आप अच्चा लिखते है ,ज्ञान तो इन्टरनेट पर किलो के भाव मिलते है !
जी हाँ “समझदारी का सिद्धांत “ यही तो वो सिद्धांत है जिसके आधार पर पत्निया पतियों पर सदियों से राज़ कर रही है ! मतलब अगर कोई न समझ रहा हो तो उसे समझाया जा सकता है पर कोई समझना न चाहे तो कोई समझा ही नहीं सकता , अगर कोई समझाने की कोशिश करे तो उसे तीसरी बात समझा दो !
अगर सामने वाला समझदार होगा तो वो समझ जायेगा इसे न समझाने में ही समझारी है ! आप समझे “ समझदारी के सिद्धांत “ को !
खैर मित्र को मैंने बताया लिखना कौन सी बड़ी बात है , कोई न कोई बात तो हर किसी के मन में आती है बस उसे कुछ अच्छे शब्द देना है , और आप में होनी चाहिए थोडी बेबकूफी , थोडा पागलपन ढेर सारी गलतफहमी की आप अच्चा लिखते है ,ज्ञान तो इन्टरनेट पर किलो के भाव मिलते है !
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