Wednesday, 15 May 2013

समझदारी का सिध्धान्त



एक मित्र ने कहा तुम कैसे लिख लेते हो हमें भी बताव , हम समझ रहे थे की वो कहना ये चाहते थे की यार तुम लिखते क्यों हो ? मैंने भी समझारी का सिद्धांतलगाया !

जी हाँ समझदारी का सिद्धांत यही तो वो सिद्धांत है जिसके आधार पर पत्निया पतियों पर सदियों से राज़ कर रही है ! मतलब अगर कोई न समझ रहा हो तो उसे समझाया जा सकता है पर कोई समझना न चाहे तो कोई समझा ही नहीं सकता , अगर कोई समझाने की कोशिश करे तो उसे तीसरी बात समझा दो !

अगर सामने वाला समझदार होगा तो वो समझ जायेगा इसे न समझाने में ही समझारी है ! आप समझे समझदारी के सिद्धांत को !

खैर मित्र को मैंने बताया लिखना कौन सी बड़ी बात है , कोई न कोई बात तो हर किसी के मन में आती है बस उसे कुछ अच्छे शब्द देना है , और आप में होनी चाहिए थोडी बेबकूफी , थोडा पागलपन ढेर सारी गलतफहमी की आप अच्चा लिखते है ,ज्ञान तो इन्टरनेट पर किलो के भाव मिलते है !

No comments:

Post a Comment