Friday, 10 May 2013

मानवाधिकार



एक पत्नी पीड़ित मित्र मिल गए अपनी दर्द बरी दास्ताँ कह सुनाई,

मैंने कहा देश में महिला के लिए अलग से थाने बन रहे है मतलब बाकि थानों में पुरुषो की सुनी जाती होगी , चलो मेरे साथ कम्प्लेन लिखवाने। ,

उसने कहा नहीं मैं नहीं जाउगा बीबी को पता चल गया तो मारेगी। ,

मैंने कहा मर्द बनो ।, उसने कहा इसी बात का तो रोना है। ,
मैंने उसके पुरुषत्व को जगाने के लिए बहुत झकझोरा मगर वो रम की पूरी बोतल डालने के बाद जगा और हम थाने पहुचे ।,

थाने दार ने कड़क कर कहा क्या है ?
दोस्त ने अपनी पूरी अन्तः शक्ति लगा कर कहा जी मैं पत्नी से पीड़ित हूँ ।

थानेदार - तो .... वो तो मैं भी हूँ , मैं कहा जाऊ , खैर बोलो कब शादी हुए ,
दोस्त ने जल्द से कहा जी चार साल सात महीने और आज तीसरा दिन है सर वो तारीख भुलाये नहीं भूलती सर। , थानेदार व्हाट अ कोन्सिदेंट तुम्हारी और मेरी शादी एक ही दिन हुई है ।,
अच्छा क्या होता है तुहारे साथ ?

जी कभी खाना नहीं , कभी खाने में नमक , कभी मिर्च की सब्जी , बक बक , कीच कीच , कुछ बोलने पर पहले तो मायके जाने की धमकी देती थी पर कुछ दिनों से महिला आयोग जाने की धमक देती है , थानेदार आह भरते हुआ तुम्हारी मारती तो नहीं ? दोस्त सरमाते हुए जी कभी कभी ,
थाने दार गुस्से में बोल यार पूरी बात बताया करो रिपोर्ट तुम लिखाने आये हो या मैं ,

महिला आयोग की बात से पास बैठे व्यक्ति के कान खड़े हो गए , कहा मैं मानवाधिकार से हूँ , एक मानव पर अत्याचार हुआ है ये मेरा केस है ,

दोस्त बोल मैं तो एक पति हूँ सर मानव हूँ या नहीं ये तो आप ही जाने , पर आपनी पत्नी के लिए आप क्या करते है सर।

वो व्यक्ति भड़क गया बोल आप की बात हो रही है मेरे बारे में कहना मानवाधिकार के खिलाफ है , और आप इतने दिनों से अत्याचार सह रहे है ये भी एक अपराध है।

दोस्त बोला हम लोग तो बाप दादा के ज़माने से सहते आ रहे है , वो तो नए कानून की पड़ोस वाली को छुप छुप के भी नहीं देख सकते आने से अपने तकलीफ का एह्शास और कम्प्लेन लिखाने चला आया।

साहब बोले नहीं तुमने अपराध किया है , कमिटी बनेगी , जाँच होगा , तब तक तुम्हे जेल में रहना होगा .......

मैंने कहा सर जी ये तो शादी सुदा है, डाल दो जेल में कुछ दिन चैन से सो लेगा , इसकी तो अंतरात्मा भी नहीं जो आत्महत्या भी करे , मैं कवारा हूँ , अब तक कोई लड़की पटा नहीं पाया तो दोस्त गधा बोलते है , जिस लड़की को भी पटाने की कोशिश की वो कुत्ता बोल के निकल गयी , हरकते बंदरो बाली है , उल्लू तो हूँ ही , इनमे से जो समझ लीजये पर मानव तो बुल्कुल नहीं हूँ । मुझे जाने दीजिये ।

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