Friday, 10 May 2013

दोस्त की शादी का निमंत्रण पाकर



आज मेरे एक दोस्त की शादी का निमंत्रण मिला, उसकी बर्बादी की शहनाई बज उठी बेचारे के जीवन में नियम कानून का पर्व आरम्भ हुआ , जो किचड में कमल की अदा से खड़े हुए थे वो आज सेटेल डाउन होने के गर्व में तलहटी में जा रहे है,
अच्छे अच्छे जहाज डूबे है इस दरिया में मेनकाओ सी आंधी चली और कितने विश्वामित्रो के मठ नष्ट हुए है , कल तक जो बाईक पर बैठ कर सारा शहर चीर देता था , ठहाका लगता तो मोहल्ले कांप जाते , हम जैसे उधारी वालो के लिए तो कुबेर थे , सारा बिल वही चुकाते थे ,वो सारी दुनिया में भटकने का इरादा रखते थे , उनसे बड़ी बड़ी सम्भावनाये थी ....

मगर आज सारी सम्भावनाये समाप्त हो गयी !! एक खिची हुइ तलवार म्यान में रिटायर्ड हो गयी !! 

अब वो शादी कर रहे है अपने कुवारेपन का मेनोफेस्टो रद्द करके वो यहाँ वहाँ गुलाबी निमंत्रण बाट रहे है ,शर्म भी नहीं आती ऐसा करते हुए ,

 न जाने क्यों चलते चलते आदमी ऐसी मंजिल पर पहुच जाता है,, जहाँ वो शादी कर लेता है ?

अपने ही करम उसे हिप्नोटाइज करने लगते है , जिसे शादी करनी होती है वो किसी की नहीं मानता, अपनी आत्मा की भी नही ... न वो भुक्त भोगी की सुनता है न शुभचिंतक की !

मेहंदी रचे हाथो से ऐसा हेंड ग्रिनेट फेका जाता है की कुवारेपन का किला ढह ढहां के गिर जाता है , वो बड़ी बड़ी आँखों वाली का गाँधीवादी आक्रमण बेचारे के कल्पना के बाहर की चीज़ है !

तो कोई आश्चर्य नहीं की मेरा दोस्त शादी कर रहे है !! ये जो निमंत्रण मेरे है उसे एक न एक दिन कम्पोज होना ही था इसका प्रिंट आर्डर तो नियति ने कब से दे रखा था !

मेरे कानो में बाजो की आवाज से , घोड़े की हिनहिनाहट से , सहेलियों की खी खी खी से और शिकार कर लेने के बाद एक ससुर का निर्मम ठहाका सुनाई दे रहा है!!

औपचारिकता के इस नक्कारखाने में मेरे के दर्द को कौन सुनता है और पता नहीं उन्हें दर्द है भी या नहीं !!

हे प्रभू उन्हें क्षमा करना वो नहीं जानते की वो क्या कर रहे है !!!!!!!!!!!!!!!


मनुष्य एक विवाह्शील प्राणी है जिसने पैदा लिया वो शादी मनाना मागता ही है , कितनी भी श्रद्धा से हनुमान चालिसा क्यों न पढ़ी जाय शादी फिर भी हो जाती है !
एक आग का दरिया है डूब के जाना है ....बल्कि पूरी तरह से डूब जाना है , और ठंढा होकर दरिया को भी ठंढा करना है ,,,

ईश्वर भी जब इस पृथ्वी पर जन्म लेते है तो सालो साल शादी व्याह के चक्कर में निकल जाता है ! धरती जब पाप के भार से लद रही थी आप रुकमिनी का हरण कर रहे थे , भगवान राम क्या नहीं जानते थे की वो शिव का धनुष नहीं जिंदगी भर की मुसीबत उठा रहे है !!!! पर क्या करे मानव जनम लिया है तो शादी तो करनी ही पड़ेगी !!!!

जब भगवान नहीं छूटे तो आदमी की क्या विसात है !!!!!!!!!!!!!!

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