हजारों साल से नारी को बंधन में रखा गया । उनको पूरे कपड़े पहनने पर
विवश किया गया और उनके बाहर निकलने पर भी सख्त मनाही रहती थी ।लड़कों को तो
बिगड़ने का मौलिक अधिकार
प्राप्त होता है ।
नारी मुक्त हो रही है । शुरूआत कपड़ों से की है । आइडिया बुरा नहीं है । मर्द भी देख कर कम से कम शराफत से तो मुक्ति पा ही लेंगे ।
जब अंग्रेजी फिल्मों में समुद्र किनारे सनबाथ लेती युवतियों को देखता हूं तो ब्रह्मा को खरी खोटी सुनाने का मन करता है । बहुत बड़ा घटिया मजाक किया है उसने मुझे भारत में पैदा कर के । वैसे अब लगता है कि ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हो रहा है, सड़क पर टाईट जींस और मिनी स्कर्ट में आती जाती लड़कियाँ देख कर लगता है कि अब भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने में ज्यादा देर नहीं लगेगी ।
“ नाऊ आई एम फीलिंग हैप्पी । “ नारी सही मायने में आज मुक्त हुई है और इत्ती ज्यादा मुक्त हुई है कि हम पुरूषों को अपनी स्वतंत्रता पर शर्म आती है । औकात है तो एक हाफ से भी हाफ पैंट और एक चौथाई बनियान में शहर का आधा चक्कर लगा के दिखाईये । शर्मा आंटी की याद आती है न । पर आज की वीरांगनायें ऐसे छोटे मोटे कामों के लिये सहर्ष प्रस्तुत रहती हैं ।
एक नई संस्कृति का विकास हो रहा है इंडो-अमेरिकन संस्कृति । जो सिर्फ दैहिक सुखों मे ही विश्वास करती है ।कारें, ए.सी, बड़े होटलों में डिनर और लंच सस्ते हो गये पर शर्म, हया, तमीज, संस्कार, नैतिकता, मंहगे होते चले जा रहे हैं ।
पर नारी मुक्ति का जमाना है!!!!!!!!!!!!!
नारी मुक्त हो रही है !!!!!!!!!!!!!!!
नारी मुक्त हो रही है । शुरूआत कपड़ों से की है । आइडिया बुरा नहीं है । मर्द भी देख कर कम से कम शराफत से तो मुक्ति पा ही लेंगे ।
जब अंग्रेजी फिल्मों में समुद्र किनारे सनबाथ लेती युवतियों को देखता हूं तो ब्रह्मा को खरी खोटी सुनाने का मन करता है । बहुत बड़ा घटिया मजाक किया है उसने मुझे भारत में पैदा कर के । वैसे अब लगता है कि ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हो रहा है, सड़क पर टाईट जींस और मिनी स्कर्ट में आती जाती लड़कियाँ देख कर लगता है कि अब भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने में ज्यादा देर नहीं लगेगी ।
“ नाऊ आई एम फीलिंग हैप्पी । “ नारी सही मायने में आज मुक्त हुई है और इत्ती ज्यादा मुक्त हुई है कि हम पुरूषों को अपनी स्वतंत्रता पर शर्म आती है । औकात है तो एक हाफ से भी हाफ पैंट और एक चौथाई बनियान में शहर का आधा चक्कर लगा के दिखाईये । शर्मा आंटी की याद आती है न । पर आज की वीरांगनायें ऐसे छोटे मोटे कामों के लिये सहर्ष प्रस्तुत रहती हैं ।
एक नई संस्कृति का विकास हो रहा है इंडो-अमेरिकन संस्कृति । जो सिर्फ दैहिक सुखों मे ही विश्वास करती है ।कारें, ए.सी, बड़े होटलों में डिनर और लंच सस्ते हो गये पर शर्म, हया, तमीज, संस्कार, नैतिकता, मंहगे होते चले जा रहे हैं ।
पर नारी मुक्ति का जमाना है!!!!!!!!!!!!!
नारी मुक्त हो रही है !!!!!!!!!!!!!!!
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