अस्सी चुटकी नब्बे ताल रगड के खैनी मुह में डाल , तो फिर
खैनी का देख कमाल !
नशे की दुनिया का सबसे छोटा नशा है खैनी , आठ आने एक रूपये
में आपसी भाईचारा , दिमाग की शांति मिल रही है , यह सामाजिक अपराध नहीं, दौलत के नशे, कुर्सी के नशे, ताकत के नशे और मजहब के नशे
के आगे इसकी भला क्या औकात है
जानते है बुरी चीज़ है ! कौन नहीं जानता की भ्रष्टाचार
बुरा है फिर भी बंद हुआ क्या ? कौन नहीं जानता की रिश्वतखोरी
बुरी चीज है फिर भी बंद हुई क्या ? झूट बोलना पाप है यह कौन
नहीं जानता फिर भी दुनिया में झूटों की तादात कम हुई क्या ? जानकारी से कुछ नही होता
जानकारी किसी बीमारी का कोई इलाज नहीं है ।
खैनी तो देश की एकता अखंडता में महत्वपूर्ण योगदान देता है , किसी खैनी खाने
वाले को कहीं रगड़ते देख बिना जाती धर्म पूछे अपनी हिस्सेदारी पक्की करते है , और
खास बात छुटकी में खैनी उठाते हुए यहाँ “ लेने ” वाले का हाथ ऊपर होता
है देने वाले का निचे !
No comments:
Post a Comment