Friday, 10 May 2013

खैनी



अस्सी चुटकी नब्बे ताल रगड के खैनी मुह में डाल , तो फिर खैनी का देख कमाल !

नशे की दुनिया का सबसे छोटा नशा है खैनी , आठ आने एक रूपये में आपसी भाईचारा , दिमाग की शांति मिल रही है , यह सामाजिक अपराध नहीं, दौलत के नशे, कुर्सी के नशे, ताकत के नशे और मजहब के नशे के आगे इसकी भला क्या औकात है

जानते है बुरी चीज़ है ! कौन नहीं जानता की भ्रष्टाचार बुरा है फिर भी बंद हुआ क्या ? कौन नहीं जानता की रिश्वतखोरी बुरी चीज है फिर भी बंद हुई क्या ? झूट बोलना पाप है यह कौन नहीं जानता फिर भी दुनिया में झूटों की तादात कम हुई क्या ? जानकारी से कुछ नही होता जानकारी किसी बीमारी का कोई इलाज नहीं है ।

खैनी तो देश की एकता अखंडता में महत्वपूर्ण योगदान देता है , किसी खैनी खाने वाले को कहीं रगड़ते देख बिना जाती धर्म पूछे अपनी हिस्सेदारी पक्की करते है , और खास बात  छुटकी में खैनी उठाते हुए यहाँ लेने वाले का हाथ ऊपर होता है देने वाले का निचे  !

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