मेरे साथ एक अजीब दुर्घटना घट गई है। मुझे
हर कुत्ते में एक इंसान नज़र आता है और हर इंसान में एक कुत्ता।
कुत्ता एक ऐतिहासिक प्राणी है। कुत्ते ने इंसान को 'इंसान' बनाया। कहते हैं जब इंसान सभ्य हुआ तो पहला काम उसने यह किया कि उसने कुत्ते को पालतू बनाया। मेरा ख़याल यह है कि जब इंसान ने कुत्ते को पालतू बनाया तब वह सभ्य कहलाया।
कुत्तागिरी के अनेक पहलू हैं। दरअसल इंसान जिससे भी आगे निकलना चाहे निकल सकता है। वह कुत्ते से भी आगे निकल गया। रोटी के लिए अपने मालिक के आसपास दाँत निपोड़े, हिलने-डुलने की कला आख़िर उसने कहाँ से सीखी? आपस में लड़ने की गुणवत्ता आखिर कुत्तो से ही तो ली गयी है ,
हाँ, यह अलग ही बात है कि उसने अपनी इस कला को इतना निखारा कि आप कह नहीं सकते कि यह कला कुत्ते के संसार द्वारा मानव को दी गई एक अनुपम भेंट है।
बस एक बात दिल को बड़ा कचोटती है की एक तरफ तो कुत्ते की वफादारी की मिसाल देते है दूसरी तरह कुत्ते शब्द को गाली की तरह क्यों प्रयोग किया जाता है ????????
कहते है की पुरुष कुत्ते होते है , अब वफ़ा दार होना कोई अपराध तो नहीं
!!!!!!!!!!!!!!!
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