Monday, 5 August 2013

चुनाव चिन्ह



'चुनाव चिह्न' का बहुत बड़ा महत्त्व होता है। हर चिन्ह जनता के लिए संदेश देता है। वह पार्टी, नेता और उसकी नियति का घोषणा-पत्र होता है, जिसे गाहे-बगाहे लोग पढ़ अथवा समझ पाते हैं। बाकी लोग तो बस औपचारिकता निभाते हैं। अपने वोट की बलि उस पर चढ़ाते हैं।

'कमल का फूल-
यह भक्ति का प्रतीक है, धर्म का प्रतीक है। कमल का फूल कीचड़ में खिलता है। इसके माध्यम से नेता कहता ह,ै कि तुम सब कीचड़ की तरह ही हमारे लिए रहोगे और हम चुनाव जीतकर कमल की तरह खिलकर मुस्कराएँगे और देश में कीचड़ ही कीचड़ फैलाएँगे।



हाथ का 'पंजा' - भी अपना संदेश देता है और नेताओं की नियति का बयान करता है। यदि पंजे को जिताओगे तो पाँच वषरें तक लगातार चाँटे खाओगे। पूरी ताकत हमारे हाथों में होगी और तुम सदा पछताओगे। पंजे की मार कौन झेल पाएगा, जो जिताएगा, वही सताया जाएगा।


'हाथी' का निशान खाने का प्रतीक है। हाथी जिस तरह फल-फूल, पेड़-पौधे खाता है, उसी तरह नेता भी जीतकर देश को खाएगा और पाँच वर्षों में सब कुछ पचा जाएगा। यदि कोई इसके खिलाफ आवाज उठाएगा, तो हाथी बौरा जाएगा और सूँड़ से उठा-उठाकर सबको पटखनी लगाएगा। हाथी सिर्फ अपने नेता को पीठ पर बैठाएगा और जनता को कुचलता हुआ चला जाएगा।


'साइकिल' का निशान भी अद्भुत है। साइकिल को जो जिताएगा, वह घनचक्कर बन जाएगा। पहिए की तरह नचाया जाएगा। साइकिल की तरह देश को भी नेता पंक्चर कर जाएगा।


'लालटेन' का निशान भी कुछ बताता है। नेता के चरित्र को स्पष्ट रुप से समझाता है। जिस तरह लालटेन धीरे-धीरे घासलेट पी जाती है, उसी तरह लालटेन के निशान वाला नेता पूरे देश को पी जाएगा और जनता को पता भी नहीं चल पाएगा। उजाले में लालटेन जलाएगा और अँधेरे में बुझाएँगा। जो बचेगा, उस पर घासलेट डालकर आग लगाएगा।
 
धनुष-बाण वाला नेता किसी को जीवित नहीं छोड़ेगा। एक-एक को निशाना बनाएगा और अपना तीर सबके दिल में उतारेगा। विकास को धनुष-बाण पर रखकर नर्क तक पहुँचाएगा और स्वयं स्वर्गलोक का आनन्द उठाएगा।

'ताला-चाभी' का निशान चोट्टे नेताओं से बचने का संकेत देता है। यदि इसे जिताओगे तो बहुत पछताओगे। दिमाग का ताला बंद करके चाभी आतंकियों के हवाले कर दी जाएगी। तालाबंद कंपनियों की तरह देश भी रोयेगा, किन्तु ताला खुल नहीं पाएगा।
 
'हँसियां' का निशान काटने का प्रतीक है। जिस तरह किसान फसल काटता है, अन्न खाता है उसी तरह नेता वोटों की फसल काटेगा और पूरे देश को खायेगा। यदि थोड़ा-बहुत रह जायेगा तो बेच आएगा।



इस चुनावी महासंग्राम में जनता हर तरफ से मारी ही जाएगी। देश का चीरहरण होगा और नेता दुर्योधन की तरह खिलखिलाएगा। कोई कृष्ण जनता की लाज बचाने न आएगा। वोट कितना भी समझ-बूझकर दो, अन्त में राज्य धृतराष्ट्र ही चलायेंगे।

 



 

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