Saturday, 31 August 2013

दौलत और शोहरत की तमन्ना

दौलत और शोहरत की मुझे बरसों से तमन्ना है। वैसे भी इंसान उसी चीज़ की तमन्ना करता है जो उसके पास नहीं होती। यूं तो अक्ल भी मेरे पास नहीं है, मगर वो आ जाए ऐसी कोई ख़्वाहिश भी नहीं ! मौजुदा आमदनी में खर्च धटा दू तो अगले दस सालो में बचत होगी कुछ हज़ार रूपये ! इसी अनुपात में लोकप्रियता बढ़ी तो इन दस सालों में तीस-चालीस नए लोग ही मुझे जान पाएंगे !
मतलब ये कि मौजूदा पेस पर दस सालों में कुछ हज़ार रूपये और अपनी प्रतिभा से कायल या घायल हुए तीस-चालीस लोगों की कुल जमा-पूंजी ही मेरे पास होगी, जो मुझे कतई मंज़ूर नहीं है। मैं चाहता हूं कि जल्द ही मेरे पास लाखों रूपये हों, करोड़ों दीवाने हों, जिसमें भी दीवानियों की संख्या ज़्यादा हो,

जब मैंने अपनी ये ख्वाहिश मित्र को बताई तो उसने कहा कि इसका एक ही तरीका है, किसी रिएलिटी शो में चले जाओ। टीवी पर मेनली तीन तरह के रिएलिटी शो आते हैं। गाने का, नाचने का या अन्य किसी नायाब किस्म की मूर्खता का।
सोचने लगा कि मैं इनमें से किस रिएलिटी शो में जा सकता हूं ! जहां तक गाने का सवाल है, उससे जुड़ा मेरा और उनका, जिन्होंने मेरा गाना सुना, अनुभव अच्छा नहीं रहा।
इससे पहले कॉलेज में भी एक बार ऐसा हादसा हुआ था। मित्रों के प्रोत्साहन पर, बाद में पता चला कि उन्होंने मज़े लिए थे, मैंने सालाना फंक्शन में गायन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जैसे ही मैंने गाना शुरू किया जनता तो जनता वहां मौजूदा कौओं तक ने अपने कान बंद कर लिए, बाग के फूल मुरझाने लगे, कुत्ते भौंकने लगे और माइक में शॉर्ट सर्किट के बाद धुंआ निकलने लगा। कार्यक्रम संचालक ने बीच गाने में आकर मेरे कान में कहा कि हम वादा करते हैं कि पहला पुरस्कार तुम्हें ही देंगे, मगर भगवान के लिए अभी-इसी वक़्त गाना बंद कर दो।
अपनी संगीत प्रतिभा को निखारने गुरु जी के पास भी गए थे , उन्होंने कहा बेटा तुम्हारे अंदर बहुत पतिभा है पर मानव जाती के कल्याण के लिए इसे दावा कर ही रखो!
ये ऑप्शन मेरी लिए ख़त्म हो गया। रही डांस की बात। तो लाख चाह कर भी उस पर चांस मारने की हिम्मत नहीं पड़ती। डांसने के लिए पैर चलने बहुत ज़रूरी है। कुछ-एक नचनिया टाइप मित्रों ने सिखाने की कोशिश भी की मगर उन्हें भी लगा कि ‘भारी न होने के बावजूद’ हिलने के मामले में मेरे पांव अंगद के समान हैं।

कौन बनेगा करोड़पति टाइप में जाने का तो सबाल ही नहीं ..इसमे ज्ञान की जरुरत है , अपने ज्ञानी होने का इल्जाम अपने सर नहीं ले सकता ! अब किसने क्या किया क्यों किया सारे जहाँ का मैंने कोई ठेका थोड़ी ले रखा है !
कुल मिलाकर दोस्तों, तय नहीं कर पा रहा हूं किस रिएलटी शो में जाऊं। आख़िर में यही लगता है कि बेमतलब बातों की अंतहीन सड़क पर आवारा-निकम्मे दोस्तों के साथ बेहिसाब दौड़ने का मेरे पास बेशुमार अनुभव है। पांव चलें न चलें, ज़बान खूब चलती है। कभी ज़बान चलाने का कोई रिएलिटी शो हो तो बताइएगा, फिर कोशिश करेंगे।

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