संसार का सबसे पीड़ित प्रजाति अगर कोई है वो है पुरुष की ! जितनी मुसीबत में ये प्रजाति है इतनी मुसीबत में तो सफ़ेद गेंडा भी नहीं !
सभी शहरो में यु कहे हर घर में पुरुष को पति बना कर प्रतडित किया जा रहा है ! अपने ही घर में बेघर कर दिया जाता है इन बेचारो को ! दिन भर गधे की तरह मेहनत करने और कुत्ते की तरह ईमानदार रहने के बाबजूद दो वक्त की इज्जत की रोटी भी नसीब नहीं होती इन बदनसीबो को !
इसे बड़ी सजा और क्या होगी की शाम को प्राईम टाइम में इन को जबरस्ती एकता कपूर की सिरिअल देखने को मजबूर किया जाता है !
इनका हौसला इतना पस्त हो चूका है की बिरोध करने की भी हिम्मत नहीं किसी में, बाप दादा के ज़माने से ही ये सहते आ रहे है , सर उठाने पर सर कुचल दिए जाने का डर है इन गरीब को ! डर इतना की ये डर अब इनकी आत्मा में बैठ गया है !
शायद बहुत जल्द पुरुष आयोग की जरूरत पड़ेगी , आखिर अब तक सहते रहेगे ये बेचारे कभी तो आवाज़ उठानी होगी , रामलीला मैदान पर किसी को तो घरना देना होगा . अपने हक के लिए केंडल जलाने होगे !
अब और ज्यादा नहीं लिख सकता डर सबको लगता है . गला सब का सूखता है बॉस !!!!!!!
सभी शहरो में यु कहे हर घर में पुरुष को पति बना कर प्रतडित किया जा रहा है ! अपने ही घर में बेघर कर दिया जाता है इन बेचारो को ! दिन भर गधे की तरह मेहनत करने और कुत्ते की तरह ईमानदार रहने के बाबजूद दो वक्त की इज्जत की रोटी भी नसीब नहीं होती इन बदनसीबो को !
इसे बड़ी सजा और क्या होगी की शाम को प्राईम टाइम में इन को जबरस्ती एकता कपूर की सिरिअल देखने को मजबूर किया जाता है !
इनका हौसला इतना पस्त हो चूका है की बिरोध करने की भी हिम्मत नहीं किसी में, बाप दादा के ज़माने से ही ये सहते आ रहे है , सर उठाने पर सर कुचल दिए जाने का डर है इन गरीब को ! डर इतना की ये डर अब इनकी आत्मा में बैठ गया है !
शायद बहुत जल्द पुरुष आयोग की जरूरत पड़ेगी , आखिर अब तक सहते रहेगे ये बेचारे कभी तो आवाज़ उठानी होगी , रामलीला मैदान पर किसी को तो घरना देना होगा . अपने हक के लिए केंडल जलाने होगे !
अब और ज्यादा नहीं लिख सकता डर सबको लगता है . गला सब का सूखता है बॉस !!!!!!!
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