Monday, 26 August 2013

अचार



बड़े बुजुर्गो के आचार विचार पर विचार करने से हमारे अंदर बढ़ता है शिष्टाचार , जब शिष्टाचार का अचार बना डाला जाय तो वो जाता है भ्रष्टाचार ! भ्रष्टाचार को खतम करने का ठेका तो केजरीवाल बाबू के आप ने ले ही लिए है !

हम तो ठहरे ओरिजनल टाइप के आम आदमी तो हम विचार करते है अचार पर ! अचार के नाम से मुह में पानी आया न ! बड़ा ही महत्वपूर्ण है अचार हमारे जीवन में !

जब बच्चा पैदा होने वाला तो मा को अचार यानि खट्टा खाने की इच्छा होती है ! यहाँ सभी पैदा हुए होगे कोई लक्की द्र से तो निकला नहीं होगा ! यानि हमारे पैदा होने से पहले ही जो पोष्टिक आहार हमें मिला वो खट्टा ही है ! तभी तो कहा गया है जिंदगी का मज़ा तो खट्टे में है !
फिर तो जीवन में खट्टे ही खट्टे है !

जिसको चाहा उसे पटा नहीं पाए तो अंगूर खट्टे है !

साथियों को हरा कर यानी दात खट्टे कर जॉब लो !

फिर हर दिन बोस खट्टा सा मुह बना कर सामने खड़ा हो जायगा !


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