एक
बार बंगला सिखने का धुन सबार हुआ , मैंने सोचा क्यों न बंगला फिल्म देखी
जाय,फ़िल्म की विशेषता थी कि वह बंगला में थी और हमारी विशेषता थी कि हम
बंगला नहीं जानते। पर मैंने भी कसम खायी थी की चित्र से समझना है ......
एक बंगला फ़िल्म पूरी गरिमा के साथ देखने बैठे, कहानी बंगाल के एक छोटे से क़स्बे में रहनेवाले बंगाली परिवार की थी।और हम बड़ी जल्दी समझ गए कि फ़िल्म सामान्य प्रेमकथा नहीं है। हीरोइन (आह, क्या भरी–पूरी हीरोइन थी!) इंटर कर चुकी है और उसके बी.ए. करने की समस्या है।हीरो भी इसी समस्या से ग्रस्त था। हीरोइन से पहली मुलाकात में ही पूछा, तोमार बीए होये गे छे?
हीरोइन ने इस प्रश्न पर कुछ उड़ता–उड़ता–सा जवाब दिया, आमार बीए कोरबार दोरकार नेई।
हम समझ गए कि लड़की इंटर कर चुकी है, मगर फिलहाल बी.ए. करने कै मूड में नहीं है, मगर हीरो चाहता था कि हिरोइन बी.ए. कर ले। वह जब मिलता, हीरोइन से एक ही प्रश्न घुमा–फिराकर करता, बीए, कोरबे ना कोरबे?
पिक्चर में एक अदद विलेन भी था, वह भी चाहता था कि हीरोइन ग्रेज्युएट हो जाए। जब हीरोइन कमर में घड़ा दाब झरने की तरफ़ जाती, विलेन पगडंडी काट खड़ा हो जाता और कहता, शुंदोरी! आमी तोमार शोंगे बीए कोरबोई कोरबो!
हमें आश्चर्य हुआ कि यह मुछंदर विलेन बी.ए. करने से अभी तक सिर्फ़ इसीलिए रुका हुआ है, क्यों कि यह हीरोइन शुंदोरी के साथ बी.ए. करना चाहता है!कमबख़्त हीरोइन बी.ए. क्यों नहीं कर लेती?
समझ नहीं आ रहा था कि हीरोइन यूनिवर्सिटी डिग्री लेने के मामले में गंभीर है, अथवा नहीं। वह हीरो के सामने मान लेती कि वह बी.ए. कर लेगी, जो ज़रूरी भी है, मगर जब विलेन उससे कहता तो वह साफ़ इनकार कर देती। एक बार तो उसने विलेन को कसकर डाँट दिया, जेटा आमी भावी, शेटा आमी कोरबो।
एक और दृश्य में हीरोइन की सहेली ने हीरोइन को इसी विषय में समझाते हुए कहा कि तुम बी.ए. क्यों नहीं कर लेतीं। हीरोइन ने कुछ कहा जिसका अर्थ शायद था कि 'ठीक है, मैं कर लूँगी!'
मेरे ख़याल से इसके बाद फ़िल्म समाप्त हो जानी चाहिए थी।मगर ऐसा नहीं हुआ। विलेन के स्नेही मित्रों ने हीरो को डंडे से पीटा। जवाब में हीरो ने भी हाथ दिखाए। शैक्षणिक प्रश्न का अंतत: इस स्तर पर निपटारा होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। हीरोइन ने हीरो की बाँह पर पट्टी बाँधी और कड़े शब्दों में अपने बाप से बी.ए. करने का ऐलान करते हुए कहा, आमा के बीए कोरते केऊ थामाते पारबे ना।
और सच भी है। इस स्वतंत्र भारत में यदि कोई बी.ए. का अध्ययन करना चाहे तो उसे कौन थाम सकता है? चित्र के अंत में हीरो हीरोइन का हाथ पकड़ एक ओर चला गया। शायद कालेज उसी ओर रहा होगा।
'बंगालवाले भी कमाल कर रहे हैं। कितनी नई थीम उठाकर फ़िल्में बना रहे हैं।' मैंने कहा।
वो तो बाद में एक मित्र दत्ता बाबु ने बताया अरे, बीए मतलब बैचलर ऑफ आर्टस् नहीं। बीए यानी ब्याह, शादी, मैरेज।
एक बंगला फ़िल्म पूरी गरिमा के साथ देखने बैठे, कहानी बंगाल के एक छोटे से क़स्बे में रहनेवाले बंगाली परिवार की थी।और हम बड़ी जल्दी समझ गए कि फ़िल्म सामान्य प्रेमकथा नहीं है। हीरोइन (आह, क्या भरी–पूरी हीरोइन थी!) इंटर कर चुकी है और उसके बी.ए. करने की समस्या है।हीरो भी इसी समस्या से ग्रस्त था। हीरोइन से पहली मुलाकात में ही पूछा, तोमार बीए होये गे छे?
हीरोइन ने इस प्रश्न पर कुछ उड़ता–उड़ता–सा जवाब दिया, आमार बीए कोरबार दोरकार नेई।
हम समझ गए कि लड़की इंटर कर चुकी है, मगर फिलहाल बी.ए. करने कै मूड में नहीं है, मगर हीरो चाहता था कि हिरोइन बी.ए. कर ले। वह जब मिलता, हीरोइन से एक ही प्रश्न घुमा–फिराकर करता, बीए, कोरबे ना कोरबे?
पिक्चर में एक अदद विलेन भी था, वह भी चाहता था कि हीरोइन ग्रेज्युएट हो जाए। जब हीरोइन कमर में घड़ा दाब झरने की तरफ़ जाती, विलेन पगडंडी काट खड़ा हो जाता और कहता, शुंदोरी! आमी तोमार शोंगे बीए कोरबोई कोरबो!
हमें आश्चर्य हुआ कि यह मुछंदर विलेन बी.ए. करने से अभी तक सिर्फ़ इसीलिए रुका हुआ है, क्यों कि यह हीरोइन शुंदोरी के साथ बी.ए. करना चाहता है!कमबख़्त हीरोइन बी.ए. क्यों नहीं कर लेती?
समझ नहीं आ रहा था कि हीरोइन यूनिवर्सिटी डिग्री लेने के मामले में गंभीर है, अथवा नहीं। वह हीरो के सामने मान लेती कि वह बी.ए. कर लेगी, जो ज़रूरी भी है, मगर जब विलेन उससे कहता तो वह साफ़ इनकार कर देती। एक बार तो उसने विलेन को कसकर डाँट दिया, जेटा आमी भावी, शेटा आमी कोरबो।
एक और दृश्य में हीरोइन की सहेली ने हीरोइन को इसी विषय में समझाते हुए कहा कि तुम बी.ए. क्यों नहीं कर लेतीं। हीरोइन ने कुछ कहा जिसका अर्थ शायद था कि 'ठीक है, मैं कर लूँगी!'
मेरे ख़याल से इसके बाद फ़िल्म समाप्त हो जानी चाहिए थी।मगर ऐसा नहीं हुआ। विलेन के स्नेही मित्रों ने हीरो को डंडे से पीटा। जवाब में हीरो ने भी हाथ दिखाए। शैक्षणिक प्रश्न का अंतत: इस स्तर पर निपटारा होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। हीरोइन ने हीरो की बाँह पर पट्टी बाँधी और कड़े शब्दों में अपने बाप से बी.ए. करने का ऐलान करते हुए कहा, आमा के बीए कोरते केऊ थामाते पारबे ना।
और सच भी है। इस स्वतंत्र भारत में यदि कोई बी.ए. का अध्ययन करना चाहे तो उसे कौन थाम सकता है? चित्र के अंत में हीरो हीरोइन का हाथ पकड़ एक ओर चला गया। शायद कालेज उसी ओर रहा होगा।
'बंगालवाले भी कमाल कर रहे हैं। कितनी नई थीम उठाकर फ़िल्में बना रहे हैं।' मैंने कहा।
वो तो बाद में एक मित्र दत्ता बाबु ने बताया अरे, बीए मतलब बैचलर ऑफ आर्टस् नहीं। बीए यानी ब्याह, शादी, मैरेज।
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