प्रिय मित्र को समर्पित (पहलीबार और ताज़ी ब्रेकअप हुई है बेचारे की )
गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड का रिश्ता ऐसा है जैसे गठबंधन सरकार !इतिहास गवाह है गठबंधन घर्म के पालन में सैकडो समझोते करने पड़ते है ! मन संसद बन जाता है , राजनीती जोरो पर होती है , रोज नए दाँव खेले जाते हैं और रोज नए पैतरे बदले जाते हैं। अजब प्रेम की गजब कहानी।
इस राजनीती में लड़का स्वम को सत्ता पक्ष का समझता है और मज़े की बात तो ये है की लड़की भी स्वम के प्रति यही राय रखती है ! विवाद यहीं से शुरू हो जाता है ! फिर तो संसद सत्र बारहों महीने चलता है। न कोई छुट्टी, न कोई अवकाश। यहाँ बहस के लिए मुद्दों की आवश्यकता नहीं होती..."बहस अपनी जगह है और मुद्दे अपनी जगह।"
फिर आपके दोस्त स्पीकर की भूमिका अपना लेते है कभी कभी तो मार्सल बन कर आपको बाहर ही भिजवा सकते है ! गर्लफ्रेंड की फ्रेंड की कजरारी भोली नजरो पर मत जाए दरअसल ये शतिर अपनी भूमिका बदलने में एय्यारो को भी मात दे दे ! ये पत्रकार की तरह होते है सनसनी की तरह किसी को चटकारे ले कर सुना सकते है "ध्यान से देखिये भोला भाला दिखने वाला ये शख्स असल में वहसी दरिंदा है !"
अगर आप गुस्से में आके उसपर आघात करने की कोशिश करते है तो लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस पर हमले से सबका बोखलाना भी लाजमी है , मानवाधिकार की बाते होगी , विपक्ष बात करने को राजी न होगा , आपके खिलाफ विशेष प्रताव लाने की तैयारी भी हो सकती है मतलब फोन पर ब्लेक लिस्ट् , फेसबुक पर ब्लोक !
इस राजनीती में भी अपने प्रधानमंत्री से कुछ सीखना चाहिए कभी कभी कमजोर होना राजनितिक रूप से सही होता है तो आपको भी सदन में सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांग लेनी चाहिए !
अंत में आपके लीये कबीर की ये लाइन याद आती है " दुइ पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई.."
गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड का रिश्ता ऐसा है जैसे गठबंधन सरकार !इतिहास गवाह है गठबंधन घर्म के पालन में सैकडो समझोते करने पड़ते है ! मन संसद बन जाता है , राजनीती जोरो पर होती है , रोज नए दाँव खेले जाते हैं और रोज नए पैतरे बदले जाते हैं। अजब प्रेम की गजब कहानी।
इस राजनीती में लड़का स्वम को सत्ता पक्ष का समझता है और मज़े की बात तो ये है की लड़की भी स्वम के प्रति यही राय रखती है ! विवाद यहीं से शुरू हो जाता है ! फिर तो संसद सत्र बारहों महीने चलता है। न कोई छुट्टी, न कोई अवकाश। यहाँ बहस के लिए मुद्दों की आवश्यकता नहीं होती..."बहस अपनी जगह है और मुद्दे अपनी जगह।"
फिर आपके दोस्त स्पीकर की भूमिका अपना लेते है कभी कभी तो मार्सल बन कर आपको बाहर ही भिजवा सकते है ! गर्लफ्रेंड की फ्रेंड की कजरारी भोली नजरो पर मत जाए दरअसल ये शतिर अपनी भूमिका बदलने में एय्यारो को भी मात दे दे ! ये पत्रकार की तरह होते है सनसनी की तरह किसी को चटकारे ले कर सुना सकते है "ध्यान से देखिये भोला भाला दिखने वाला ये शख्स असल में वहसी दरिंदा है !"
अगर आप गुस्से में आके उसपर आघात करने की कोशिश करते है तो लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस पर हमले से सबका बोखलाना भी लाजमी है , मानवाधिकार की बाते होगी , विपक्ष बात करने को राजी न होगा , आपके खिलाफ विशेष प्रताव लाने की तैयारी भी हो सकती है मतलब फोन पर ब्लेक लिस्ट् , फेसबुक पर ब्लोक !
इस राजनीती में भी अपने प्रधानमंत्री से कुछ सीखना चाहिए कभी कभी कमजोर होना राजनितिक रूप से सही होता है तो आपको भी सदन में सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांग लेनी चाहिए !
अंत में आपके लीये कबीर की ये लाइन याद आती है " दुइ पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई.."
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