मेरी जिन्दगी की डायरी ।
कवार्फ़ पीले पड़ चुके है जिसकी ...
पर लफ्ज सुरक्षित है अब भी ...
कुछ पन्ने फट चुके है , वो जो किस्से का हिस्सा था अब वी नहीं है ।
एक गुलाब दवी है मगर जो सूख चुकी है । खुशबु मगर अब भी है उसमे ।
कुछ कोरे भी है पन्ने जो कहती है लिखेगी कुछ नयी कहानी के अल्फाज जिंदगी ।।
कवार्फ़ पीले पड़ चुके है जिसकी ...
पर लफ्ज सुरक्षित है अब भी ...
कुछ पन्ने फट चुके है , वो जो किस्से का हिस्सा था अब वी नहीं है ।
एक गुलाब दवी है मगर जो सूख चुकी है । खुशबु मगर अब भी है उसमे ।
कुछ कोरे भी है पन्ने जो कहती है लिखेगी कुछ नयी कहानी के अल्फाज जिंदगी ।।
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