बरसात के मौसम के पहले ही आकाश में ढेर सारी तितलिया उड़ने लगती थी।
(गीता की कसम खा कर कहता हूँ यहाँ तितली मतलब तितली ही है।)
(गीता =भगवत गीता )
और जब छोटे थे पता नहीं किसने ये अपवाह फैला राखी थी की तितली की मुंडी मचोड़ कर गोबर में गाड दो तो सोना बन जाता है।
अब चुनाव का मौसम आते ही बहुत से नेता उड़ने लगते है।
मुंडी वाली बात सोच रहा था इनपर ट्राय किया जाए तो ...........
(गीता की कसम खा कर कहता हूँ यहाँ तितली मतलब तितली ही है।)
(गीता =भगवत गीता )
और जब छोटे थे पता नहीं किसने ये अपवाह फैला राखी थी की तितली की मुंडी मचोड़ कर गोबर में गाड दो तो सोना बन जाता है।
अब चुनाव का मौसम आते ही बहुत से नेता उड़ने लगते है।
मुंडी वाली बात सोच रहा था इनपर ट्राय किया जाए तो ...........
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