Friday, 12 July 2013

प्रेम में आई लव यू

 "आई लव  यू "प्रेम का मूल एक मूल मन्त्र हुआ करता था ,

प्रेम  बहुत तरह की होती है ये इश्क वाले प्रेम सिम्बोल है , अब प्रेम तो घर के पालतू कुत्ते से भी करते है उसे आई लव यू कहना अजीब नहीं लगेगा !

पर आज कल तो प्रेम में इसकी हालत ऐसी हो गयी है जैसे भाजपा में आडवानी की , कांग्रेस में मनमोहन की ,
आम आदमी में आन्ना की !



ILU तो साहब प्रेम के इजहार का एक शब्द ना हुआ सत्यनारायण भगवान का प्रसाद हो गया तुम भी ले लो आप भी लेलो !
एक  तीर है निशाने पर लगी तो ठीक है वरना गया क्या , अपन दूसरे जगह ट्राय कर लेगे ! तर्क होता है की जमाना बदल गया ! क्या बदल गया प्रेम का फील बदल गया !

माँ अगर जींस पहन ले तो क्या माँ नहीं रही क्या !

दोस्ती और प्रेम दोनों ही पवित्र रिश्ते है , दोनों की अपनी अपनी मर्यादाये है ,

 इश्क दोस्ती मिल सकती है पर दोस्ती में इश्क नहीं विस्फोट होगा और इसकी मर्यादा ध्वसत हो जायगी !

कहते है प्रेम तो कभी भी हो सकता है , ये मान लेते है पर ये किसी से भी होने लगे तो भैये दिमाग में केमिकल लोचा है !
प्रेम और दोस्ती दोनों विश्वास के डोर से बंधी होती है , एक बार ये टूट जाय तो बड़ी मुश्किल होती है ! जाहे दुनिया के सारे मंदिर मस्जिद तोड दिए जाय जब तक विश्वास जिन्दा है तब तक इश्वर है !

रहीम ने कहा है ,
रहिमन धागा प्रेम का मत तोडो चटकाय ,
टूटे तो ये जुड़े नहीं , जुड़े तो फिर गाठ पड़ जाय !!!


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